Vsk Jodhpur

सुदृढ़ समाज के निर्माण में युवा निभाएं निर्णायक भूमिका -अरुण कुमार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के युवा चिकित्सा और प्राध्यापक सम्मेलन आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय करवड व महालक्ष्मी कॉलेज प्रताप नगर में संपन्न हुए। सम्मेलनों में मुख्य वक्ता संघ के सह सरकार्यवाह अरुण कुमार रहे। कार्यक्रम मुख्य अतिथि आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलगुरु गोविंद सहाय शुक्ला व अध्यक्षता प्रांत संघचालक हरदयाल वर्मा की।


मुख्य वक्ता अरुण कुमार ने कहा कि संघ समाज परिवर्तन का बड़ा प्रयास है, हम संपूर्ण समाज का संगठन है, 100 वर्ष में इस विचार को बढ़ाने के लिए न्यूनतम आधार बन गया है। शताब्दी वर्ष हमारे लिए महत्वपूर्ण है। कि हम कहां से चले क्या कर पाए, क्या नहीं कर पाए, हम अपना आत्म विश्लेषण करें और आने वाले समय के लिए योजना बनाएं। शताब्दी वर्ष में गृह संपर्क में 12 से 18 करोड़ परिवारों तक पहुंचे। 20 हजार युवा सम्मेलन के ऐसे कार्यक्रम हम युवा वर्ग में करने जा रहे हैं। उनसे संवाद करेंगे तथा सुझाव भी लेंगे।

IMG 20260814 WA00091


संघ की 100 वर्ष की यात्रा में चार बातें महत्वपूर्ण है व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण द्वारा हमारा गौरवशाली अतीत के प्रति गौरवान्वित होकर,आत्मविश्वास महसूस करना। बीच के कालखंड में एक हजार वर्ष हमने अस्तित्व की लड़ाई लड़ी और वह समय हमारे लिए कठिन समय रहा। उससे पहले हम एक अनुकरणीय राष्ट्र के रूप में रहे।


राष्ट्र का भाग्य बदलना है, तो समाज बदलना पड़ेगा। कुछ महान लोग, महान राष्ट्र नहीं बना सकते। जिस देश के लोग महान होते हैं, वह देश महान होता है। राष्ट्र के स्वरूप की स्पष्ट कल्पना समाज के लोगों में रहे। देश की सबसे बड़ी समस्या आत्मविस्मृति है। आत्मा विस्मृति से सब समस्याएं आती है, लोग अपने को छोटी बातों से जोड़ना प्रारंभ कर देते हैं, और हमारी अपनी साझी विरासत को भूल जाते हैं। संपूर्ण देश में एकात्मकता भाव और एक सांस्कृतिक भाव सदियों से रहा है। मध्यकाल में विदेशी आक्रमण के समय राष्ट्र भाव कमजोर हो गया। विशुद्ध राष्ट्रभक्ति का भाव हर क्षण,हर पल देश के लिए जीना है। हमारी प्रतिभा विकसित होने में हमारे समाज और राष्ट्र का योगदान है। तो हमें प्रतिक्षण राष्ट्र सर्वोपरि का भाव हमारे अंदर जागृत करते हुए देश के लिए जीते रहे और देश पर संकट आए तब बलिदान के लिए तैयार रहें।

अनुशासन और संगठन का भाव को सुदृढ़ कर आगे बढ़े। जिससे समाज का आत्मविश्वास और आत्म गौरव बड़े जिनका आत्म गौरव और आत्मविश्वास समाप्त हो जाता, उनका कर्तत्व भी समाप्त हो जाता। राष्ट्र का भाग्य बदलना है तो यह बदलाव, भाषण से नहीं होगा। भाषण से व्यक्ति प्रभावित हो सकते हैं, परिवर्तन नहीं आ सकता है। परिवर्तन का प्रारंभ अपने से शुरू करना पड़ता है। परिवर्तन सामूहिक नहीं होकर व्यक्ति से शुरू होता है। हम भेदों से ऊपर उठकर राष्ट्र भाव लेकर कम करें।

IMG 20260814 WA0011


संघ कार्य ईश्वरीय कार्य है और यह किसी के विरुद्ध नहीं है। संघ कार्य करते हुए संघ ने कभी श्री नहीं लिया है। 2047 तक विकसित समाज जीवन खड़ा हो। समाज में समरसता, परिवार भाव सुदृढ़ कर, परिवारों को संस्कारित करें, पर्यावरण को संरक्षित कर, नागरिक कर्तव्य का पालन कर, स्व का भाव जगाये। 1000 वर्ष तक जिन शक्तियों से हमारा संघर्ष रहा वह शक्तियां प्राप्त हुई है समाप्त नहीं हुई है समाज को तोड़ने वाली शक्तियां सफल नहीं हो इस हेतु वैचारिक क्षेत्रों के विमर्शों में भी काम करे और एक सुदृढ़, स्वस्थ समाज के निर्माण में युवा अपना योगदान करें।

सोशल शेयर बटन

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Archives
Scroll to Top