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पेपर लीक पर मोदी सरकार का बड़ा एक्शन: अब 10 साल की जेल, ₹10 करोड़ जुर्माना और 3 महीने में होगा फैसला

देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार अब इस समस्या पर सख्त कार्रवाई की तैयारी में है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में संशोधित पेपर लीक बिल के मसौदे को मंजूर दे दी गई।

देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार अब इस समस्या पर सख्त कार्रवाई की तैयारी में है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में संशोधित पेपर लीक बिल के मसौदे को मंजूरी दे दी गई। साथ ही, पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 को और अधिक प्रभावी बनाने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी, निष्पक्ष और भरोसेमंद बनाने के लिए कड़े कानूनी प्रावधान जरूरी है।

सख्त कानून से पेपर लीक पर शिकंजा

प्रस्तावित संशोधनों के तहत पेपर लीक में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया जाएगा। ऐसे मामलों में दोषियों को अधिकतम दस साल तक की जेल और दस करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। इसके साथ ही सरकार विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों को कानूनी मान्यता देने की भी तैयारी कर रही है। इन अदालतों का उद्देश्य पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच और सुनवाई तीन महीने के भीतर पूरी करना होगा, ताकि छात्रों को जल्द न्याय मिल सके और दोषियों के खिलाफ समय पर कार्रवाई हो। प्रधानमंत्री PM नरेंद्र मोदी पहले भी कह चुके हैं कि पेपर लीक सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। उनका मानना है कि मेहनत करने वाले विद्यार्थियों के साथ किसी भी तरह का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी वजह से सरकार परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने के लिए नए और सख्त कानूनी कदम उठा रही है।

इसी बीच छात्रों के आंदोलन को देखते हुए सरकार ने बातचीत का रास्ता भी चुना है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों और केंद्र सरकार के मंत्रियों के बीच नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में बैठक हुई। इस दौरान CJP ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच और आंदोलन के दौरान छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने जैसी मांगें रखीं। हालांकि इन मांगों पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी रखने पर सहमति बनी है।

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