केंद्र सरकार में वरिष्ठ मंत्री और कर्नाटक से पांच बार लोकसभा सांसद चुने जा चुके प्रह्लाद वेंकटेश जोशी को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। धर्मेंद्र प्रधान के केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर जोशी को उनके मौजूदा विभागों के साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया है।
राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से 25 जुलाई 2026 को जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत धर्मेंद्र प्रधान का केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया। इसके बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया।
कौन हैं प्रह्लाद जोशी?
प्रह्लाद जोशी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं और लंबे समय से कर्नाटक की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। वह कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं और वर्ष 2004 से लगातार लोकसभा चुनाव जीतते आ रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में जीत के साथ वह लगातार पांचवीं बार संसद पहुंचे।
केंद्र की राजनीति में आने से पहले जोशी ने कर्नाटक भाजपा संगठन में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वह भाजपा की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष रह चुके हैं और राज्य में पार्टी संगठन को मजबूत करने वाले प्रमुख नेताओं में उनकी गिनती होती रही है।
मोदी सरकार में संभाल चुके हैं कई अहम मंत्रालय
प्रह्लाद जोशी को 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल में केंद्रीय मंत्रिमंडल में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं। उन्होंने 2019 से 2024 के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य, कोयला और खान मंत्री के रूप में काम किया।
2024 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तीसरी बार सरकार बनने के बाद उन्हें उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई।
अब शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिलने के बाद उनके पास शिक्षा क्षेत्र की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी आ गई है। राष्ट्रपति सचिवालय ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी उनके मौजूदा विभागों के अतिरिक्त दी गई है।
संसदीय कार्य मंत्री के रूप में रहा अहम कार्यकाल
2019 से 2024 तक संसदीय कार्य मंत्री रहते हुए जोशी की भूमिका सरकार और संसद के बीच समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण रही। इसी अवधि में संसद में कई बड़े और ऐतिहासिक विधायी फैसले हुए।
अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर से जुड़े अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधानों को निष्प्रभावी करने से संबंधित प्रस्ताव और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक संसद से पारित हुए। वहीं सितंबर 2023 में संसद ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने से संबंधित संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम पारित किया।
संसदीय कार्य मंत्री के तौर पर इन महत्वपूर्ण विधायी प्रक्रियाओं के दौरान सरकार की संसदीय रणनीति और सदन में समन्वय की जिम्मेदारियों में जोशी की अहम भूमिका रही।
कर्नाटक से दिल्ली तक लंबा राजनीतिक सफर
प्रह्लाद जोशी का राजनीतिक सफर कर्नाटक से शुरू होकर राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचा है। संगठनात्मक राजनीति में लंबे अनुभव के बाद उन्होंने 2004 में पहली बार लोकसभा चुनाव जीता। इसके बाद उन्होंने लगातार अपनी संसदीय सीट बरकरार रखी और 2009, 2014, 2019 तथा 2024 में भी जीत हासिल की।
लगातार पांच लोकसभा चुनाव जीतना कर्नाटक में उनकी मजबूत राजनीतिक पकड़ को दर्शाता है। सांसद के साथ-साथ पार्टी संगठन और फिर केंद्रीय मंत्री के तौर पर काम करने के कारण उन्हें प्रशासन और संसदीय प्रक्रिया दोनों का लंबा अनुभव है।
शिक्षा मंत्रालय में जोशी के सामने होंगी अहम जिम्मेदारियां
शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार ऐसे समय में प्रह्लाद जोशी को मिला है, जब देश की शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और परीक्षा प्रणाली को लेकर कई महत्वपूर्ण मुद्दे चर्चा में हैं।
नई जिम्मेदारी के तहत उच्च शिक्षा, स्कूली शिक्षा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन और विभिन्न राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं से जुड़े विषय उनके मंत्रालय के प्रमुख कार्यक्षेत्रों में शामिल होंगे।
वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री के रूप में कई मंत्रालय संभाल चुके प्रह्लाद जोशी के लिए अब शिक्षा मंत्रालय एक नई और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।