दिल्ली — देश की राजधानी, सत्ता का केंद्र, करोड़ों सपनों का शहर। लेकिन इसी शहर की गलियों में कुछ ऐसे खूँखार गिरोह भी पलते रहे हैं जिन्होंने बेगुनाह लोगों का खून बहाया, व्यापारियों से जबरन वसूली की, और जेल की चारदीवारी के भीतर बैठकर बाहर हत्याओं के आदेश दिए। हाशिम बाबा और राशिद काबलेवाला — ये दो नाम दिल्ली के अपराध जगत में आतंक के पर्याय बन चुके थे।
लेकिन आज दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने एक बार फिर साबित किया कि कानून के लंबे हाथ हर अपराधी तक पहुँचते हैं। एक बड़ी कार्रवाई में दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने हाशिम बाबा और राशिद काबलेवाला गैंग के 6 सक्रिय ऑपरेटिव और शूटरों को गिरफ्तार किया है — यह गिरफ्तारी उस व्यापक अभियान का हिस्सा है जिसने दिल्ली के संगठित अपराध के ढांचे को एक और जबरदस्त झटका दिया है।
यह केवल 6 गिरफ्तारियाँ नहीं हैं — यह उस आपराधिक पारिस्थितिकी तंत्र के विरुद्ध एक सुनियोजित और निर्णायक प्रहार है जो वर्षों से दिल्ली की शांति को खंडित करता रहा है।
कौन हैं हाशिम बाबा और राशिद काबलेवाला?
हाशिम बाबा — मंडोली जेल से चलाता है साम्राज्य
पुलिस सूत्रों के अनुसार, हाशिम बाबा की गैंग की गतिविधियाँ मंडोली जेल से निर्देशित की जाती हैं, जहाँ वह एक विचाराधीन कैदी के रूप में बंद है। यह दिल्ली के संगठित अपराध की सबसे भयावह सच्चाई है — जेल की सलाखों के पीछे बैठकर भी ये अपराधी अपने नेटवर्क को संचालित करते हैं।
हाशिम उर्फ बाबा दिल्ली पुलिस की “मोस्ट वांटेड” सूची में भी रहा है। उसके गैंग का दायरा पूर्वोत्तर दिल्ली से लेकर पूरे NCR तक फैला हुआ है। हत्या, हत्या का प्रयास, जबरन वसूली, अवैध हथियारों की तस्करी — ये सब इस गैंग के “कारोबार” के हिस्से हैं।
पुलिस जाँचकर्ताओं के अनुसार, गैंग के दोनों सदस्य राजधानी में कानून व्यवस्था के लिए बड़े खतरे थे। पुलिस उनसे हिंसा की कई पिछली घटनाओं, निगरानी अभियानों और गैंग से जुड़े अन्य संवेदनशील मामलों में पूछताछ कर रही है।
राशिद काबलेवाला — ट्रांस-यमुना का खूँखार सरगना
राशिद उर्फ काबलेवाला उत्तर-पूर्वी दिल्ली के ट्रांस यमुना क्षेत्र के चौहान बांगर इलाके का निवासी है। वह हत्या और शस्त्र अधिनियम समेत कई मामलों में वांछित रहा है।
राशिद काबलेवाला के निर्देश पर ही उसके गैंग के ऑपरेटिव दिल्ली में हत्याएं और आपराधिक गतिविधियाँ अंजाम देते थे। वह मैसेजिंग के जरिए हमलों को निर्देशित करता था और अपने शूटरों को वित्तीय सहायता भी प्रदान करता था।
इन दोनों सरगनाओं के गठजोड़ ने एक ऐसा आपराधिक नेटवर्क बनाया था जो पूरी दिल्ली के लिए खतरा था।
ऑपरेशन गैंग बस्ट 2.0: वह महाअभियान जिसने अपराध की कमर तोड़ दी
48 घंटे, 1000 टीमें, 5 राज्य — दिल्ली पुलिस का सबसे बड़ा प्रहार
दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने “ऑपरेशन गैंग बस्ट 2.0” के तहत 482 लोगों को गिरफ्तार किया और 1,014 परिसरों पर छापेमारी की। यह अभियान दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में संगठित अपराध सिंडिकेट और आतंक से जुड़े आपराधिक नेटवर्क को लक्षित करते हुए 5 मई सुबह 8 बजे से 7 मई सुबह 8 बजे तक चला।
पुलिस के अनुसार, 48 घंटे के इस अभियान में 1,000 से अधिक टीमें एक साथ कई स्थानों पर तैनात की गईं। यह दिल्ली पुलिस के इतिहास में अपनी तरह का सबसे बड़ा और सुनियोजित ऑपरेशन था।
इस अभियान में जिला पुलिस इकाइयों और स्पेशल सेल ने संयुक्त कार्रवाई में गैंगस्टरों, हथियार आपूर्तिकर्ताओं, वित्तपोषकों, सोशल मीडिया हैंडलरों, शरण देने वालों और राष्ट्रीय राजधानी और उसके आसपास काम करने वाले संगठित आपराधिक नेटवर्क के अन्य सदस्यों के खिलाफ समन्वित कार्रवाई की।
हाशिम बाबा और राशिद काबलेवाला गैंग के 6 शूटरों की गिरफ्तारी
क्राइम ब्रांच की सटीक कार्रवाई
इस महाअभियान में क्राइम ब्रांच ने हाशिम बाबा और राशिद काबलेवाला गैंग के 6 सक्रिय ऑपरेटिव और शूटरों को दबोचा। ये वे लोग हैं जो सीधे जमीनी स्तर पर गैंग के आपराधिक ऑपरेशन को अंजाम देते थे — हत्याएँ करना, जबरन वसूली का डर दिखाना, हथियार पहुँचाना और भागे हुए अपराधियों को शरण देना।
पुलिस ने बताया कि अभियान में कई प्रमुख गैंगों को निशाना बनाया गया। इनमें हाशिम बाबा से जुड़े सदस्यों को भी गिरफ्तार किया गया।
इन 6 गिरफ्तारियों का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि:
- ये “एक्टिव शूटर” थे — यानी जो सीधे हत्याओं को अंजाम देते हैं
- इनके पास अवैध हथियार थे — जो पाकिस्तान या अवैध नेटवर्क से आए थे
- ये रडार से बाहर रहते थे — लगातार ठिकाने बदलते थे
- इनके तार ISI-लिंक्ड नेटवर्क से भी जुड़ी जाँच में सामने आ सकते हैं
हाशिम बाबा गैंग का काला इतिहास: अपराधों की एक लंबी फेहरिस्त
जब-जब कानून ने छापा मारा, तब-तब बड़ा खुलासा हुआ
जिम मालिक नादिर शाह की हत्या: हाशिम बाबा का नाम दक्षिण दिल्ली के ग्रेटर कैलाश-1 में जिम मालिक नादिर शाह की हत्या की योजना बनाने में भी सामने आया है। इस हत्याकांड ने पूरी दिल्ली को हिला दिया था। दिन-दहाड़े एक व्यापारी की हत्या ने दिखाया कि यह गैंग कितना निडर और संगठित है।
दीवाली पर दोहरी हत्या: वासिम, जो हाशिम बाबा और राशिद काबलेवाला गैंग का एक प्रमुख ऑपरेटिव था, शाहदरा में दीवाली के दौरान हुए दोहरे हत्याकांड में शामिल था जिसमें एक 40 वर्षीय व्यक्ति और उसके किशोर भतीजे की गोली मारकर हत्या कर दी गई और एक 10 वर्षीय बच्चा घायल हो गया।
अदालत में गवाहों को धमकी: वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने खुलासा किया कि अनवर चाचा और अन्य गैंग सदस्यों ने कर्कर्डूमा अदालत में एक सुनवाई के दौरान कथित रूप से गवाहों को अपने बयान बदलने के लिए मजबूर किया। यह दर्शाता है कि इस गैंग की जड़ें न्याय प्रणाली को भी प्रभावित करने की हद तक फैली थीं।
घटना स्थल पर गोलीबारी: जब एक बार हाशिम बाबा गैंग के एक वांछित शूटर अयान को सिग्नल देकर रुकने और आत्मसमर्पण करने को कहा गया, तो उसने भागने की कोशिश में पुलिस टीम पर गोलियाँ चलाईं। आत्मरक्षा में पुलिस ने भी फायरिंग की, जिसमें अयान के पैरों में गोली लगी।
यह दिखाता है कि ये शूटर कितने खतरनाक हैं — पुलिस को देखकर भी नहीं रुकते।
राशिद काबलेवाला गैंग: पूर्वोत्तर दिल्ली का आतंक
काबलेवाला का तरीका — मैसेज से मर्डर
राशिद काबलेवाला के निर्देश पर हत्याओं की योजना बनाई जाती थी। वह मैसेजिंग निर्देशों के जरिए हमलों को निर्देशित करता था और अपने शूटरों को काम अंजाम देने के लिए वित्तीय सहायता भी देता था।
यह आधुनिक अपराध का सबसे खतरनाक रूप है — जहाँ सरगना खुद सुरक्षित रहता है और अपने नेटवर्क के जरिए हत्याएं करवाता है। काबलेवाला का यह मॉडस ऑपरेंडी उसे पारंपरिक गिरफ्तारी से बचाए रखता था।
उसके गैंग के सदस्यों का नेटवर्क ट्रांस यमुना क्षेत्र — वेलकम, जाफराबाद, सीलमपुर, मुस्तफाबाद — में गहरी जड़ें जमाए हुए था। यहाँ के आम निवासी इस खौफ में जीते थे कि कहीं वे इस गैंग की नजर में न आ जाएं।
ISI कनेक्शन: जब अपराध और आतंक एक हो जाते हैं
पाकिस्तान की ISI का हाथ — दिल्ली में अशांति की साजिश
इस अभियान का एक प्रमुख फोकस पाकिस्तान स्थित ISI से जुड़े शाहजाद भट्टी नेटवर्क पर था, जिसके बारे में जाँचकर्ताओं का आरोप है कि वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए भारत में फुट सोल्जरों की भर्ती कर रहा था। पुलिस के अनुसार, नेटवर्क के सदस्य IP-आधारित CCTV कैमरे लगाने, संवेदनशील स्थानों की रेकी करने, हथियार और नशे की डिलीवरी समन्वित करने और लक्षित हमले करने में शामिल थे।
इस ऑपरेशन की सबसे महत्वपूर्ण सफलता ISI-प्रायोजित शाहजाद भट्टी नेटवर्क का भंडाफोड़ था, जो संगठित आपराधिक गतिविधियों के पीछे सीमा पार समर्थन की मौजूदगी को उजागर करता है। Republic World
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के नेटवर्क का उपयोग स्थानीय आपराधिक तत्वों का फायदा उठाकर कानून-व्यवस्था को अस्थिर करने के लिए किया जा सकता है।
हाशिम बाबा और राशिद काबलेवाला गैंग के इन शूटरों के ISI से जुड़े नेटवर्क के साथ संभावित संपर्क की भी जाँच की जा रही है। जब संगठित अपराध और सीमा पार आतंकवाद मिलते हैं, तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला बन जाता है।
पहले भी हुई हैं इस गैंग पर बड़ी कार्रवाइयाँ
दिल्ली पुलिस का लगातार शिकंजा
अप्रैल 2026 — शदाब अहमद की गिरफ्तारी: दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने हाशिम बाबा गैंग के दो सहयोगियों को अलग-अलग ऑपरेशन में गिरफ्तार किया, जिनमें एक हत्या के मामले में वांछित फरार शूटर भी शामिल था। अधिकारियों ने उनके पास से दो भरी हुई अर्ध-स्वचालित पिस्तौलें और 11 जिंदा कारतूस बरामद किए।
प्राथमिक आरोपी शादाब अहमद (28), जाफराबाद निवासी, को 11 अप्रैल 2026 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सिग्नेचर ब्रिज के पास गाड़ी मेंडू इलाके से गिरफ्तार किया गया था। वह दो साल से फरार था।
जनवरी 2026 — ऑपरेशन गैंग बस्ट 1.0: 48 घंटे के ऑपरेशन गैंग बस्ट में हाशिम बाबा गैंग के 5 सदस्यों सहित 280 गैंगस्टरों को गिरफ्तार किया गया था।
अनवर चाचा और असिफ बतला की गिरफ्तारी: दिल्ली पुलिस ने जेल में बंद गैंगस्टर हाशिम बाबा के दो करीबी सहयोगियों को गिरफ्तार किया जिनमें अनवर चाचा भी शामिल था, जो जिम मालिक नादिर शाह की हत्या का कथित मास्टरमाइंड था।
हथियार आपूर्तिकर्ता पकड़े गए: दिल्ली पुलिस ने हाशिम बाबा गैंग से जुड़े दो हथियार आपूर्तिकर्ताओं को तीन अर्ध-स्वचालित पिस्तौलों और छह जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार किया था।
दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच: वह शक्ति जो अपराध को नहीं बख्शती
खुफिया जानकारी से लेकर गिरफ्तारी तक — एक सुनियोजित प्रक्रिया
दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की इस सफलता के पीछे महीनों की मेहनत, तकनीकी और मानवीय खुफिया जानकारी, और एक सुनियोजित रणनीति है। जब 6 एक्टिव शूटरों को एक साथ पकड़ा जाता है, तो इसका अर्थ है:
तकनीकी निगरानी: फोन कॉल, मैसेज और लोकेशन ट्रैकिंग के जरिए महीनों तक इन पर नजर रखी गई।
ह्यूमन इंटेलिजेंस: जमीनी स्रोतों से मिली जानकारी ने इनके ठिकानों का पता लगाने में मदद की।
समन्वित कार्रवाई: एक साथ कई स्थानों पर छापेमारी ताकि कोई एक-दूसरे को सूचित न कर सके।
जोखिम प्रबंधन: ये शूटर खतरनाक हैं — कार्रवाई के दौरान पुलिसकर्मियों की जान भी खतरे में थी।
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त, स्पेशल सेल, प्रमोद सिंह कुशवाहा ने बताया कि पुलिस टीमों ने दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में 1,014 से अधिक स्थानों पर एक साथ छापेमारी की।
गिरफ्तार शूटरों से मिलने वाली जानकारी: जाँच की नई राहें
पूछताछ से खुलेंगे कई राज
इन 6 शूटरों की गिरफ्तारी से जाँच एजेंसियों को अनेक महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद है:
हथियारों का स्रोत: ये अवैध हथियार कहाँ से आए? किस नेटवर्क के जरिए पहुँचे? क्या पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए आए?
फंडिंग का रास्ता: गैंग को पैसा कैसे मिलता है? क्रिप्टोकरेंसी, हवाला या सीधे ट्रांसफर?
अगली योजना: क्या कोई हत्या या बड़ी वारदात की योजना बन रही थी?
नेटवर्क का नक्शा: और कौन-कौन से लोग इस गैंग से जुड़े हैं जो अभी भी फरार हैं?
ISI लिंक: क्या इनके तार शाहजाद भट्टी या अन्य पाकिस्तान-प्रायोजित नेटवर्क से जुड़े हैं?
दिल्ली के आम नागरिक का दर्द और राहत
जब गैंगवार का खौफ रोज़मर्रा की जिंदगी बन जाए
जाफराबाद, सीलमपुर, वेलकम, मुस्तफाबाद, शाहदरा — ये वे इलाके हैं जहाँ हाशिम बाबा और राशिद काबलेवाला गैंग का आतंक सबसे अधिक था। यहाँ के व्यापारी रात को दुकान बंद करते समय डरते थे। माता-पिता अपने बच्चों को देर से घर आने पर परेशान होते थे। कोई गवाह बनने से घबराता था क्योंकि गवाहों को धमकियाँ दी जाती थीं।
गैंग के सदस्यों ने कर्कर्डूमा अदालत में सुनवाई के दौरान गवाहों को अपने बयान बदलने के लिए मजबूर किया था। यह न्याय व्यवस्था की जड़ों पर हमला था।
आज इन 6 शूटरों की गिरफ्तारी से उन इलाकों के लोगों को राहत की साँस मिली है। यह उन बेगुनाहों के लिए न्याय की दिशा में एक कदम है जिन्होंने इस गैंग के हाथों अपने प्रियजनों को खोया।
ऑपरेशन गैंग बस्ट 2.0 की व्यापक सफलता
482 गिरफ्तारियाँ, ISI नेटवर्क का भंडाफोड़
ऑपरेशन गैंग बस्ट 2.0 एक उन्नत संस्करण था जिसमें खुफिया जानकारी पर आधारित टार्गेटिंग पारंपरिक संगठित अपराध सिंडिकेट और उभरते आतंक-अपराध नेटवर्क दोनों को नष्ट करने पर केंद्रित थी।
इस ऑपरेशन के दौरान हाशिम बाबा गैंग और तिल्लू ताजपुरिया गैंग सहित कई कुख्यात आपराधिक संगठनों से जुड़े 30 से अधिक गैंगस्टरों को गिरफ्तार किया गया। इन गैंगों के बारे में कहा जाता है कि वे जबरन वसूली, कॉन्ट्रैक्ट किलिंग, अवैध हथियार व्यापार और नशे की तस्करी में शामिल रहे हैं।
अधिकारियों के संबोधन में प्रमोद कुशवाहा ने कहा, “इस ऑपरेशन से ISI-प्रायोजित शाहजाद भट्टी गैंग मॉड्यूल का भी भंडाफोड़ हुआ है, जिसमें नेटवर्क के प्रमुख सदस्यों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया गया है, जिससे संगठित आपराधिक गतिविधियों के पीछे सीमा पार की कड़ियाँ सामने आई हैं।”
आगे की जाँच: और खुलासे होने की उम्मीद
यह गिरफ्तारी केवल शुरुआत है। इन 6 शूटरों से पूछताछ में जो जानकारी निकलेगी, वह गैंग के पूरे ढाँचे को उजागर कर सकती है। दिल्ली पुलिस के सूत्रों के अनुसार जाँच में निम्नलिखित पहलुओं पर ध्यान दिया जाएगा:
- फरार सदस्यों की तलाश जो अभी भी सक्रिय हैं
- हथियार आपूर्ति शृंखला को पूरी तरह तोड़ना
- जेल में बंद हाशिम बाबा के जेल से संचालन के सबूत जुटाना
- राशिद काबलेवाला के नेटवर्क के नए सदस्यों की पहचान
- वित्तीय लेन-देन को ट्रेस करके मनी लॉन्ड्रिंग के तार खोलना
निष्कर्ष: दिल्ली पुलिस को सलाम — अपराध का कोई भविष्य नहीं
हाशिम बाबा और राशिद काबलेवाला गैंग के 6 सक्रिय ऑपरेटिव और शूटरों की यह गिरफ्तारी दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की एक ऐतिहासिक सफलता है। यह उन अनगिनत जाँबाज पुलिसकर्मियों की मेहनत, साहस और समर्पण का परिणाम है जो दिन-रात अपनी जान जोखिम में डालकर राजधानी को सुरक्षित रखते हैं।
इन गिरफ्तारियों से इन गैंगों की परिचालन क्षमता में महत्वपूर्ण कमी आने की उम्मीद है।
यह संदेश स्पष्ट है — चाहे जेल की दीवारें हों या शहर की गलियाँ, दिल्ली पुलिस का हाथ हर अपराधी तक पहुँचता है। आज 6 शूटर गिरफ्त में हैं। कल उनके सरगना की बारी होगी।