दक्षिण 24 परगना के फलता विधानसभा क्षेत्र में हाई-वोल्टेज ड्रामा; ‘सिंघम’ अजय पाल शर्मा के नेतृत्व में CAPF कर्मियों ने की संदिग्ध स्थानों की तलाशी; TMC के ‘दादागिरी’ कल्चर पर पहली बार लगा बड़ा झटका; 29 अप्रैल को दूसरे चरण की वोटिंग
कोलकाता/फलता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण की वोटिंग से एक दिन पहले, दक्षिण 24 परगना जिले के फलता विधानसभा क्षेत्र में मंगलवार 28 अप्रैल को नाटकीय दृश्य देखने को मिला। पश्चिम बंगाल चुनाव के पुलिस ऑब्ज़र्वर और 2011 बैच के IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा के नेतृत्व में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) ने फलता विधानसभा क्षेत्र में बड़ा तलाशी अभियान चलाया। अजय पाल शर्मा – जिन्हें उत्तर प्रदेश में “सिंघम” और “एनकाउंटर स्पेशलिस्ट” के नाम से जाना जाता है – ने व्यक्तिगत रूप से इस तलाशी अभियान का नेतृत्व किया, जिससे तृणमूल कांग्रेस (TMC) के समर्थकों में हड़कंप मच गया। CAPF की कार्रवाई इतनी आक्रामक थी कि TMC प्रत्याशी जहांगीर खान के पार्टी कार्यालय के बाहर भीड़ जमा हो गई और केंद्रीय बलों के खिलाफ तीखे नारे लगने लगे।
यह कार्रवाई पश्चिम बंगाल में चुनाव से ठीक पहले, मतदाताओं को डराने-धमकाने के TMC समर्थकों के कथित प्रयासों की शिकायतों के बाद हुई। फलता क्षेत्र, जो डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है और तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का गढ़ माना जाता है, इस बार चुनावी कुरुक्षेत्र बन गया है। अजय पाल शर्मा का यह हस्तक्षेप ऐतिहासिक है क्योंकि बंगाल के पिछले कई चुनावों में, यहां की सत्ताधारी पार्टी ने अपने उम्मीदवारों के पक्ष में हिंसा और मतदाता उत्पीड़न के कई मामलों का सामना किया है। यह पहली बार है कि चुनाव आयोग की ओर से नियुक्त एक पुलिस ऑब्ज़र्वर ने इतनी कठोर कार्रवाई की है, जिससे साफ संदेश गया है कि “TMC की दादागिरी” अब बंगाल में नहीं चलेगी।
#WATCH | West Bengal Elections 2026 | Falta, South 24 Parganas: CAPF (Central Armed Police Forces) personnel conduct a search in Falta Assembly constituency, under the leadership of Ajay Pal Sharma – the election observer for the West Bengal polls.
— ANI (@ANI) April 28, 2026
TMC supporters gather outside… pic.twitter.com/YC38W2Sv1m
घटना का पूरा विवरण: कैसे हुई CAPF की कार्रवाई?
मंगलवार 28 अप्रैल 2026 की दोपहर का यह घटनाक्रम बंगाल के चुनावी इतिहास में दर्ज होगा:
1. शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई: पुलिस ऑब्ज़र्वर अजय पाल शर्मा को TMC नेता और फलता प्रत्याशी जहांगीर खान के समर्थकों द्वारा मतदाताओं को धमकाने की शिकायतें मिली थीं।
2. व्यक्तिगत नेतृत्व: शिकायतें मिलते ही अजय पाल शर्मा खुद CAPF कर्मियों के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। यह असामान्य है क्योंकि आमतौर पर पुलिस ऑब्ज़र्वर पर्दे के पीछे से काम करते हैं।
3. व्यापक तलाशी अभियान:
- फलता विधानसभा क्षेत्र के कई संदिग्ध स्थानों पर तलाशी
- TMC प्रत्याशी जहांगीर खान के पार्टी कार्यालय के आसपास भी
- मतदाताओं को डराने-धमकाने के संदिग्धों की पहचान का प्रयास
4. TMC समर्थकों का विरोध:
- जहांगीर खान के कार्यालय के बाहर समर्थकों की भीड़ जमा
- CAPF के खिलाफ नारेबाज़ी
- “केंद्रीय बल वापस जाओ” जैसे नारे
- तनाव की स्थिति
5. अजय पाल शर्मा की कड़ी चेतावनी: पुलिस ऑब्ज़र्वर ने जहांगीर खान को सीधा संदेश दिया कि यदि उनके लोगों ने मतदाताओं को धमकाना जारी रखा, तो उनके साथ “उचित तरीके से निपटा जाएगा।”
6. वायरल वीडियो: BJP पश्चिम बंगाल ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक वीडियो साझा किया जिसमें अजय पाल शर्मा को जहांगीर खान को कड़ी चेतावनी देते देखा जा सकता है।
VIDEO | West Bengal Polls: Police observer Ajay Pal Sharma faces protests from Trinamool Congress supporters as he arrives in Falta to oversee voting arrangements.
— Press Trust of India (@PTI_News) April 28, 2026
IPS officer Ajay Pal Sharma, popularly known as Uttar Pradesh’s ‘encounter specialist’, has been deployed as the… pic.twitter.com/uZbaxvSkmH
कौन हैं अजय पाल शर्मा? UP के “सिंघम” का बंगाल में पदार्पण
अजय पाल शर्मा का नाम भारत के सबसे प्रसिद्ध और विवादास्पद IPS अधिकारियों में आता है:
1. बैच और सेवा:
- 2011 बैच के IPS अधिकारी
- उत्तर प्रदेश पुलिस कैडर
- वर्तमान आयु: 41 वर्ष
2. वर्तमान पद: प्रयागराज में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) के रूप में पदस्थ हैं।
3. “सिंघम” की उपाधि:
- अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के कारण इन्हें “सिंघम” कहा जाता है
- एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के रूप में प्रसिद्ध
- नोएडा, मेरठ, गाजियाबाद जैसे जिलों में SSP रह चुके हैं
4. प्रमुख उपलब्धियां:
- 100 से अधिक एनकाउंटर में शामिल
- कई कुख्यात अपराधियों को मार गिराया
- गैंगस्टर्स के खिलाफ निरंतर अभियान
- संगठित अपराध पर कड़ी कार्रवाई
5. UP में प्रसिद्धि: उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के “जीरो टॉलरेंस ऑन क्राइम” नीति के तहत अजय पाल शर्मा एक प्रमुख चेहरा रहे हैं।
6. बंगाल नियुक्ति: चुनाव आयोग ने उन्हें पश्चिम बंगाल चुनावों के लिए दक्षिण 24 परगना के पुलिस ऑब्ज़र्वर के रूप में नियुक्त किया है।
7. नियुक्ति का महत्व: दक्षिण 24 परगना – जो अभिषेक बनर्जी के गढ़ डायमंड हार्बर का हिस्सा है – में अजय पाल शर्मा जैसे कड़े अधिकारी की नियुक्ति बहुत मायने रखती है।
फलता विधानसभा क्षेत्र: एक संवेदनशील चुनावी मैदान
फलता विधानसभा क्षेत्र पश्चिम बंगाल के राजनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक है:
1. भौगोलिक स्थिति:
- दक्षिण 24 परगना जिले में स्थित
- डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा
- कोलकाता से लगभग 60-70 किमी दूर
- सुंदरबन क्षेत्र के नज़दीक
2. राजनीतिक पृष्ठभूमि:
- अभिषेक बनर्जी का गढ़
- TMC का परंपरागत मजबूत क्षेत्र
- मुस्लिम बहुल आबादी
- ग्रामीण और अर्ध-शहरी मिश्रण
3. पिछले चुनाव का इतिहास:
- 2021 में TMC की जीत
- शिवदाशन घोष ने जीत हासिल की थी
- 2024 लोकसभा चुनाव में अभिषेक बनर्जी ने डायमंड हार्बर से रिकॉर्ड मार्जिन से जीत दर्ज की थी
4. वर्तमान चुनाव:
- TMC प्रत्याशी: जहांगीर खान
- BJP प्रत्याशी: स्थानीय नेता
- कांग्रेस-CPI(M) गठबंधन: संयुक्त उम्मीदवार
5. चुनावी मुद्दे:
- स्थानीय विकास
- रोजगार
- बुनियादी सुविधाएं
- कानून-व्यवस्था
- मतदाता उत्पीड़न के आरोप
A day after being cautioned by Election Commission observer IPS Ajay Pal Sharma, TMC candidate Jehangir Khan threatens central forces in South 24 Parganas
— Megh Updates 🚨™ (@MeghUpdates) April 28, 2026
“The game may have been started by them, but we will be the ones to finish it. Some are moving with central forces and… pic.twitter.com/ey3rD3YI9k
जहांगीर खान: TMC प्रत्याशी की प्रतिक्रिया
जहांगीर खान ने अजय पाल शर्मा की कार्रवाई पर कड़ी प्रतिक्रिया दी:
1. प्रत्यक्ष आरोप: “कल लगभग दोपहर 3 बजे, वे आए और मेरी पार्टी कार्यालय की सुरक्षा को धमकाने की कोशिश की। फिर वे मेरे परिवार को धमकाने गए।”
2. प्रश्न उठाए: “क्या यह एक पुलिस ऑब्ज़र्वर का कर्तव्य है? यदि उनके पास कुछ कहना है, तो उन्हें SP या IC को बताना चाहिए।”
3. ECI नियमों का हवाला: “ECI का कोई नियम नहीं है जो कहता हो कि एक पुलिस ऑब्ज़र्वर लोगों के घरों में जाकर उन्हें धमका सकता है।”
4. BJP पर आरोप: “BJP की मदद के लिए ये लोग अवैध काम कर रहे हैं।”
5. IANS को बयान: उन्होंने ये बातें समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में कहीं।
TMC का “दादागिरी कल्चर”: पूर्व इतिहास
बंगाल में TMC के तथाकथित “दादागिरी कल्चर” का लंबा इतिहास रहा है, जो इस बार चुनाव में मुख्य मुद्दा बना है:
1. 2021 विधानसभा चुनाव के बाद हिंसा:
- TMC की जीत के बाद बड़े पैमाने पर राजनीतिक हिंसा
- BJP कार्यकर्ताओं पर हमले
- सैकड़ों परिवार विस्थापित
- कलकत्ता हाई कोर्ट ने CBI जांच के आदेश दिए थे
2. 2024 लोकसभा चुनाव:
- मतदाता उत्पीड़न के कई मामले
- मतदान केंद्रों पर हिंसा
- BJP कार्यकर्ताओं पर हमले
3. पंचायत चुनाव 2023:
- नामांकन प्रक्रिया में हिंसा
- कई मौतें
- राज्यव्यापी अराजकता
4. विशेष शिकायतें:
- मतदाताओं को धमकाना
- वोट डालने से रोकना
- फर्जी वोटिंग
- मतदान केंद्रों पर कब्जा
5. केंद्रीय बलों की बड़ी भूमिका: चुनाव आयोग ने इन्हीं समस्याओं को देखते हुए बंगाल चुनाव में बड़ी संख्या में केंद्रीय बल तैनात किए हैं।
अजय पाल शर्मा बनाम जहांगीर खान: दो अलग संस्कृतियां
यह केवल एक व्यक्तिगत टकराव नहीं है, बल्कि दो अलग-अलग संस्कृतियों का टकराव है:
अजय पाल शर्मा का दृष्टिकोण:
- कानून का सख्त अनुपालन
- अपराधियों के खिलाफ शून्य सहनशीलता
- मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा
- संविधान का पालन
TMC का तथाकथित दृष्टिकोण (आरोपों के अनुसार):
- स्थानीय राजनीतिक दबदबा
- “हम जैसा कहें वैसा करो” की संस्कृति
- विरोधियों को डराने-धमकाने के आरोप
- कानून से ऊपर होने की भावना
जब “सिंघम” अजय पाल शर्मा बंगाल के “दादा कल्चर” से टकराते हैं, तो यह एक ऐतिहासिक क्षण है। यह संदेश है कि भारतीय लोकतंत्र में कोई भी कानून से ऊपर नहीं है।
TMC और CAPF: एक तनावपूर्ण रिश्ता
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) और बंगाल के TMC के बीच रिश्ता हमेशा तनावपूर्ण रहा है:
1. पिछली घटनाएं:
- 28 अप्रैल 2026: बीरभूम में भीड़ ने CAPF कर्मियों पर हमला किया, 3 घायल
- कई बार CAPF कर्मियों पर हमले की घटनाएं
- CAPF वाहनों पर पथराव
2. CAPF क्या है?
- केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF)
- सीमा सुरक्षा बल (BSF)
- केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF)
- सशस्त्र सीमा बल (SSB)
- भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP)
3. चुनावों में भूमिका:
- मतदान केंद्रों की सुरक्षा
- संवेदनशील इलाकों में गश्त
- मतदाताओं को सुरक्षा प्रदान करना
- हिंसा रोकना
4. बंगाल में तैनाती: चुनाव आयोग ने हिंसा की रोकथाम के लिए बंगाल में बड़ी संख्या में CAPF कर्मी तैनात किए हैं।
चुनाव आयोग का कड़ा रवैया
चुनाव आयोग ने इस बार पश्चिम बंगाल चुनावों में अभूतपूर्व कदम उठाए हैं:
1. बड़ी संख्या में पुलिस ऑब्ज़र्वर: हर जिले में अनुभवी IPS अधिकारियों की नियुक्ति।
2. CAPF की व्यापक तैनाती: हिंसा-प्रवण इलाकों में विशेष ध्यान।
3. कड़ी निगरानी: CCTV कैमरों की व्यापक तैनाती, ड्रोन निगरानी।
4. शिकायत निवारण: तेज प्रतिक्रिया तंत्र।
5. प्रोटीन तैनाती: स्थानीय पुलिस के बजाय केंद्रीय बलों की प्राथमिकता।
29 अप्रैल का दूसरा चरण: क्या बदलेगा?
29 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण के मतदान के लिए यह घटना महत्वपूर्ण है:
1. मतदाताओं में आत्मविश्वास: CAPF की कार्रवाई से मतदाताओं को निडर होकर वोट डालने का हौसला मिलेगा।
2. TMC पर दबाव: पार्टी अपने कार्यकर्ताओं को नियंत्रित करने पर मजबूर होगी।
3. BJP को फायदा: स्वच्छ चुनाव से BJP को फायदा हो सकता है।
4. ध्रुवीकरण: मुस्लिम बहुल फलता क्षेत्र में ध्रुवीकरण की संभावना।
5. चुनाव आयोग की प्रतिष्ठा: यदि चुनाव शांतिपूर्ण होते हैं, तो ECI की प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
BJP की प्रतिक्रिया: स्वागत
BJP ने अजय पाल शर्मा के कदम का जोरदार स्वागत किया है:
1. वायरल वीडियो: BJP पश्चिम बंगाल ने वीडियो को व्यापक रूप से शेयर किया।
2. सुवेंदु अधिकारी का बयान: “यह बंगाल के मतदाताओं के लिए एक सकारात्मक संदेश है।”
3. केंद्रीय नेताओं का समर्थन:
- प्रधानमंत्री मोदी ने बंगाल चुनाव में मतदाताओं को सुरक्षित मतदान का आश्वासन दिया
- अमित शाह ने पहले से ही TMC के “हिंसा कल्चर” को उजागर किया था
4. प्रचार में शामिल: BJP ने इस घटना को अपने प्रचार का हिस्सा बना लिया है।
TMC की प्रतिक्रिया: कड़ी आलोचना
TMC ने अजय पाल शर्मा पर कड़ा प्रहार किया है:
1. ममता बनर्जी का रोष: मुख्यमंत्री ने केंद्र पर “बंगाल को निशाना बनाने” का आरोप लगाया।
2. अभिषेक बनर्जी: “यह डायमंड हार्बर के मतदाताओं के साथ अन्याय है।”
3. ECI से शिकायत: TMC ने अजय पाल शर्मा के खिलाफ ECI में शिकायत दर्ज कराई है।
4. हाई कोर्ट जाने की धमकी: TMC ने कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख करने की धमकी दी है।
ऐतिहासिक संदर्भ: बंगाल का चुनावी हिंसा रिकॉर्ड
बंगाल का चुनावी हिंसा रिकॉर्ड चिंताजनक रहा है:
1. कांग्रेस युग: 1947-1977 में राजनीतिक अस्थिरता।
2. वाम मोर्चा युग: 1977-2011 में संगठित हिंसा का आरोप।
3. TMC युग: 2011 से अब तक राजनीतिक हिंसा के कई आरोप।
4. 2021 चुनाव: चुनाव बाद हिंसा में सैकड़ों परिवार प्रभावित।
5. पंचायत 2023: सबसे हिंसक स्थानीय निकाय चुनाव।
अजय पाल शर्मा के पुराने मामले
अजय पाल शर्मा का करियर कई महत्वपूर्ण घटनाओं से भरा रहा है:
1. नोएडा SSP के रूप में:
- अपराध दर में नाटकीय गिरावट
- कई एनकाउंटर
- संगठित अपराध पर हमला
2. एनकाउंटर्स:
- सुमित गुर्जर एनकाउंटर
- विकास दुबे ट्रांजिट से जुड़ी जांच
- कई कुख्यात गैंगस्टरों को मारा
3. विवाद:
- कुछ एनकाउंटर पर सवाल उठे थे
- मानवाधिकार आयोग की जांच
- लेकिन सब बरी कर दिए गए
4. UP सरकार का समर्थन: योगी आदित्यनाथ सरकार ने उनके काम का समर्थन किया।
मतदाता उत्पीड़न: ECI की चिंता
मतदाता उत्पीड़न चुनाव आयोग के लिए एक बड़ा मुद्दा है:
1. शिकायतों के प्रकार:
- वोटरों को धमकी देना
- वोट डालने से रोकना
- मतदान केंद्रों पर अराजकता
- मीडिया पर हमला
2. ECI की कार्रवाई:
- तेजी से प्रतिक्रिया
- कड़े पुलिस अधिकारियों की नियुक्ति
- CAPF तैनाती
- मतदाताओं को आश्वासन
3. कानूनी प्रावधान:
- IPC की धाराएं
- RPA (Representation of People Act)
- अदालती कार्यवाही
निष्कर्ष: बंगाल में लोकतंत्र की जीत?
फलता में अजय पाल शर्मा के नेतृत्व में CAPF का यह तलाशी अभियान केवल एक घटना नहीं है। यह बंगाल में दशकों से चले आ रहे “सत्ता के दादागिरी कल्चर” के खिलाफ एक ऐतिहासिक कदम है। यह संदेश है कि भारतीय लोकतंत्र में कोई भी राजनीतिक दल कानून से ऊपर नहीं है, चाहे वह कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो।
जहांगीर खान की प्रतिक्रिया – कि उन्हें अजय पाल शर्मा से डर लगा – खुद में बहुत कुछ बताती है। यदि एक पुलिस ऑब्ज़र्वर का काम सही ढंग से करना “धमकी” है, तो शायद यह बताता है कि TMC के कुछ नेता कानून के पालन को धमकी मानते हैं।
बंगाल के मतदाताओं के लिए यह एक नया अध्याय है। पहली बार, उन्हें यह आश्वासन है कि “बूथ कैप्चरिंग,” “मतदाता उत्पीड़न,” और “वोट डालने से रोकना” अब आसानी से नहीं हो पाएगा। केंद्रीय बल और कड़े पुलिस ऑब्ज़र्वर एक नई वास्तविकता पैदा कर रहे हैं।
अजय पाल शर्मा – उत्तर प्रदेश के “सिंघम” – ने बंगाल में आकर एक नई मिसाल कायम की है। उनका संदेश स्पष्ट है: कानून का पालन करो, नहीं तो परिणाम भुगतो। यह वह संदेश है जिसकी बंगाल को बहुत समय से जरूरत थी।
29 अप्रैल को जब मतदाता वोट डालने जाएंगे, तो उनके मन में एक विश्वास होगा – कि उनका वोट सुरक्षित है, उनकी आवाज सुनी जाएगी, और कोई भी राजनीतिक दादा उन्हें डराने में सफल नहीं हो पाएगा। यह भारतीय लोकतंत्र की जीत है।
प्रधानमंत्री मोदी का संदेश – “ज़र वोटिंग टर्नआउट का मतलब है BJP की जीत” – इस संदर्भ में और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। जब लोग सुरक्षित वोट डाल पाएंगे, तब असली लोकतंत्र दिखेगा।
जय हिंद। जय बंगाल। जय भारतीय लोकतंत्र। और सबसे महत्वपूर्ण – जय वह हर अधिकारी जो निर्भीक होकर अपना कर्तव्य निभाता है, चाहे राजनीतिक दबाव कितना भी हो।