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“सत्ता का संरक्षण, पीड़िताओं का अपमान” — IPS पापिया सुल्ताना: संदेशखाली की बलात्कार पीड़िताओं से “मेडिकल रिपोर्ट माँगने” वाली अधिकारी अब शपथ समारोह में PM मोदी के सामने भी बैठी रहीं

: वह अधिकारी जो दो बार सुर्खियों में आई — दोनों बार गलत कारणों से

2015 बैच की IPS अधिकारी पापिया सुल्ताना, जो वर्तमान में पश्चिम मेदिनीपुर की पुलिस अधीक्षक हैं, एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा में हैं। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के शपथ समारोह का एक वायरल वीडियो सोशल मीडिया पर तीव्र बहस का विषय बन गया है।

वायरल वीडियो में IPS पापिया सुल्ताना उस समय भी अपनी सीट पर बैठी दिखती हैं जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंच पर आए। उन्होंने नवनिर्वाचित BJP विधायकों के लिए भी सीट नहीं छोड़ी — कम से कम 5 नवनिर्वाचित BJP विधायक खड़े थे।

यह अकेली घटना नहीं है। पापिया सुल्ताना पहले भी संदेशखाली विवाद में राष्ट्रीय ध्यान का केंद्र बन चुकी हैं, जहाँ उन्होंने शिकायतकर्ताओं से आरोपों से संबंधित दस्तावेजी और चिकित्सा साक्ष्य माँगने के बाद आलोचना झेली थी।


संदेशखाली: वह घाव जो अभी तक नहीं भरा

क्या हुआ था संदेशखाली में?

जनवरी 2024 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एक टीम पश्चिम बंगाल के संदेशखाली गाँव में TMC नेता शेख शाहजहाँ से पूछताछ करने गई थी। इसी दौरान तीन ED अधिकारी शाहजहाँ के स्थानीय समर्थकों द्वारा घायल किए गए और शाहजहाँ फरार हो गया।

इसके बाद फरवरी 2024 में मुख्यधारा मीडिया में संदेशखाली की अनेक महिलाओं पर व्यवस्थित यौन हमले के आरोप सामने आए। महिलाओं ने आरोप लगाया कि शिबू हाजरा और उत्तम सरदार ने रात के अँधेरे में उन्हें अपने कार्यालयों में बुलाकर बलात्कार किया और पुलिस FIR दर्ज करने से मना कर रही थी।

यह वह पृष्ठभूमि थी जिसमें पापिया सुल्ताना को भेजा गया।


वह अक्षम्य माँग: “बलात्कार साबित करने के लिए मेडिकल रिपोर्ट लाओ”

संदेशखाली की एक पीड़िता ने ANI को बताया: “वे हमसे मेडिकल रिपोर्ट माँग रहे हैं। क्या उन्होंने हमारे साथ जो किया, उसकी मेडिकल रिपोर्ट दी थी? अब हम मेडिकल रिपोर्ट कैसे दें? सभी विवाहित हैं, उनके पति हैं। पापिया सुल्ताना ने मेडिकल रिपोर्ट माँगी। जिनके पति और बच्चे हैं, वे मेडिकल रिपोर्ट कैसे दे सकती हैं? यह संभव नहीं है।”

ANI को दिए बयान में बताया गया: “पापिया सुल्ताना, पश्चिम बंगाल कैडर की 2015 बैच की IPS अधिकारी, महिलाओं से बात करने गई थीं और उन्होंने पीड़िताओं की पहचान उजागर करने और आरोपों को साबित करने के लिए मेडिकल रिपोर्ट जमा करने को कहा।”

यह माँग न केवल संवेदनहीन थी, बल्कि कानूनी दृष्टि से भी गलत थी। बलात्कार कानून के तहत पीड़िता का बयान ही प्रमाण माना जाता है। पुराने मेडिकल साक्ष्य की माँग करना — जब घटनाएँ महीनों पहले हुई हों — न्याय की भावना के विरुद्ध है।


“TMC की समर्पित सहयोगी”: वह पहचान जो सवाल उठाती है

सोशल मीडिया पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, पापिया सुल्ताना को “एक समर्पित TMC-सहयोगी” के रूप में वर्णित किया गया है। ममता बनर्जी ने उन्हें संदेशखाली में एक जमीनी निरीक्षण आयोग के हिस्से के रूप में भेजा था।

यहाँ मूल सवाल यह है: जब संदेशखाली की पीड़िताएँ हिंदू महिलाएँ थीं और मुख्य आरोपी TMC नेता थे — तब ममता सरकार ने किस उद्देश्य से उन्हें वहाँ भेजा? पीड़िताओं को न्याय दिलाने के लिए — या जाँच को कमजोर करने के लिए?

एक विश्लेषण में यह भी उठाया गया: “पश्चिम बंगाल सरकार ने पापिया सुल्ताना को संदेशखाली की हिंदू महिलाओं से बात करने के लिए भेजा, जबकि समान वरिष्ठता की गैर-मुस्लिम महिला IPS अधिकारियों की कमी नहीं थी।”


शपथ समारोह में बैठे रहना: प्रोटोकॉल का उल्लंघन

पापिया सुल्ताना को लेकर ताजा विवाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के शपथ समारोह के वायरल वीडियो से उपजा है, जिसमें वे PM मोदी के आगमन पर भी बैठी दिखती हैं। इस फुटेज ने ऑनलाइन बहस छेड़ दी है और आलोचकों ने इस उच्च-स्तरीय कार्यक्रम में उनके आचरण पर सवाल उठाए हैं।

वीडियो में दिखता है कि कम से कम 5 नवनिर्वाचित BJP विधायक — जिनमें वरिष्ठ नेता भी शामिल थे — खड़े थे, लेकिन IPS पापिया सुल्ताना ने सीट नहीं छोड़ी। अन्य अधिकारियों ने उन्हें जगह देने के लिए उठ गए।

यह प्रोटोकॉल का स्पष्ट उल्लंघन है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के सामने एक IPS अधिकारी का बैठे रहना — यह अनुशासनहीनता का खुला प्रदर्शन है।


पापिया सुल्ताना: एक परिचय

पापिया सुल्ताना पश्चिम बंगाल की पहली मुस्लिम महिला IPS अधिकारी के रूप में पहचानी जाती हैं। उन्होंने 2008 में राज्य पुलिस परीक्षा उत्तीर्ण की और बाद में राज्य पुलिस सेवा कोटे से IPS में पदोन्नति पाई।

उनके पास B.Sc., MBA, जेंडर विकास में स्नातकोत्तर, LLB, LLM और स्पेनिश-फ्रेंच में डिप्लोमा है। वे जादवपुर विश्वविद्यालय से महिला अध्ययन में PhD कर रही हैं। उन्हें 5वें मान्यता पुरस्कार में सम्मानित किया जा चुका है।

यानी एक उच्च शिक्षित, अनुभवी अधिकारी — जिनसे उम्मीद थी कि वे बलात्कार पीड़िताओं के साथ संवेदनशीलता से पेश आएंगी। लेकिन उन्होंने जो किया, वह उनकी सारी शैक्षणिक योग्यताओं को कठघरे में खड़ा करता है।


मूल समस्या: TMC का पुलिस पर राजनीतिक नियंत्रण

संदेशखाली और शपथ समारोह — दोनों घटनाएँ एक ही मूल बीमारी की लक्षण हैं: TMC शासन में पुलिस का राजनीतिकरण।

15 साल की ममता सरकार में पश्चिम बंगाल पुलिस एक स्वतंत्र संस्था नहीं, बल्कि TMC का औजार बन गई थी। जो अधिकारी सरकार के “काम” करते थे, उन्हें पदोन्नति और पोस्टिंग मिलती थी। जो विरोध करते थे, उन्हें कोने में धकेल दिया जाता था।

चुनाव आयोग ने 17 मार्च 2026 को पापिया सुल्ताना को पश्चिम मेदिनीपुर का SP नियुक्त किया — चुनाव कार्य के लिए।

अब जब BJP सरकार बन चुकी है, यह देखना होगा कि नई सरकार ऐसे अधिकारियों के साथ क्या रुख अपनाती है जिन्होंने पिछली सरकार के एजेंडे पर काम किया।


न्यायिक और प्रशासनिक जवाबदेही की माँग

इस पूरे प्रकरण से कुछ स्पष्ट माँगें उभरती हैं:

1. संदेशखाली मामले की फिर से जाँच: नई BJP सरकार को संदेशखाली जाँच की समीक्षा करनी चाहिए और पीड़िताओं को न्याय सुनिश्चित करना चाहिए।

2. पापिया सुल्ताना के आचरण की जाँच: शपथ समारोह में प्रोटोकॉल उल्लंघन और संदेशखाली में संवेदनहीन व्यवहार की विभागीय जाँच होनी चाहिए।

3. पुलिस का राजनीतिकरण समाप्त हो: नई सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि IPS अधिकारी राजनीतिक दलों के नहीं, संविधान और जनता के प्रति जवाबदेह हों।

4. बलात्कार पीड़िताओं के अधिकार: किसी भी पुलिस अधिकारी द्वारा बलात्कार पीड़ितों से “मेडिकल रिपोर्ट” की माँग करना POCSO और IPC की भावना के विरुद्ध है — इस पर स्पष्ट दिशानिर्देश जरूरी हैं।


जवाबदेही का समय आ गया है

पापिया सुल्ताना का मामला एक व्यक्ति का नहीं — यह उस व्यवस्था का प्रतीक है जो 15 साल में बनी। जब पुलिस सत्ता की सेवक बन जाए, तो सबसे पहले पीड़ित महिलाएँ और कमजोर वर्ग भुगतते हैं।

संदेशखाली की वे महिलाएँ जो बलात्कार की शिकार थीं और जिनसे “मेडिकल रिपोर्ट” माँगी गई — वे आज भी न्याय की प्रतीक्षा में हैं।

अब जब बंगाल में परिवर्तन आया है — तो उन पीड़िताओं को न्याय दिलाना नई सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

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