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“सनातन को मिटाओ!” — उदयनिधि स्टालिन ने तमिलनाडु विधानसभा में फिर उगला जहर, CM विजय मूकदर्शक बने रहे — सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बावजूद नहीं बदली नेपोटिज्म के राजकुमार की जुबान

12 मई 2026 — वह काला दिन जो इतिहास में दर्ज होगा

तमिलनाडु विधानसभा का पहला सत्र। नई सरकार, नया मुख्यमंत्री। देश की नजरें इस ऐतिहासिक पल पर टिकी थीं। लेकिन जो हुआ, उसने करोड़ों हिंदुओं का दिल दहला दिया।

12 मई 2026 को तमिलनाडु विधानसभा में, नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री चंद्रशेखर जोसफ विजय के सामने, विपक्ष के नेता और DMK विधायक उदयनिधि स्टालिन ने कहा: “सनातनम, जिसने लोगों को बाँटा, उसे मिटाया जाना चाहिए।”

यह कोई पहली बार नहीं है। यह वही उदयनिधि हैं जिन्होंने 2023 में सनातन धर्म की तुलना मच्छर, डेंगू, मलेरिया और कोरोना से की थी। जिन पर सुप्रीम कोर्ट ने 4 मार्च 2024 को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा था: “आप एक सामान्य नागरिक नहीं हैं। आप एक मंत्री हैं। आपको अपनी बातों के परिणामों की जानकारी होनी चाहिए।”

लेकिन “भाई साहब” को कोई फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि वे MK स्टालिन के बेटे हैं। क्योंकि उनके पिता DMK के सर्वेसर्वा हैं। क्योंकि वे नेपोटिज्म की उस कुर्सी पर बैठे हैं जो उन्हें विरासत में मिली है — बिना किसी जनादेश के, बिना किसी संघर्ष के।


विधानसभा में फिर वही जहर

तमिलनाडु विधानसभा में बोलते हुए DMK विधायक उदयनिधि स्टालिन ने कहा, “सनातनम, जो लोगों को अलग करता है, उसे समाप्त किया जाना चाहिए।”

यह बयान नई विधानसभा के पहले सत्र में आया, जिसने फिर से एक राजनीतिक विवाद को जन्म दिया। BJP ने उदयनिधि स्टालिन पर घृणास्पद भाषण फैलाने और लाखों लोगों की धार्मिक भावनाओं का अपमान करने का आरोप लगाया।

यह विवाद तब और गहरा हो गया जब मद्रास हाईकोर्ट ने पहले ही अपने फैसले में कहा था कि उदयनिधि की 2023 की टिप्पणियाँ हिंदू समुदाय के विरुद्ध घृणास्पद भाषण थीं।

इसके अलावा, उदयनिधि ने वंदे मातरम् राष्ट्रगीत को लेकर भी आपत्ति जताई और कहा कि तमिलनाडु राज्यगीत ‘तमिल थाई वाझ्थु’ को कभी दूसरे स्थान पर नहीं रखा जाना चाहिए।

विजय की चुप्पी: सबसे बड़ा सवाल

तमिलनाडु के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री विजय के सामने ही यह बयान दिया गया। अब देखना यह है कि TVK प्रमुख इन टिप्पणियों पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं।

लेकिन जो सामने आया — वह और भी चिंताजनक था। विजय ने उदयनिधि के बयान का कोई विरोध नहीं किया। रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने उदयनिधि का अभिवादन हाथ जोड़कर स्वीकार किया।

यह एक ऐसा प्रश्न खड़ा करता है जिसका जवाब करोड़ों हिंदू माँग रहे हैं:

यदि उदयनिधि ने कहा होता “ईसाई धर्म को मिटाना चाहिए” — तो क्या जोसफ विजय तब भी चुप रहते?

यह वही विजय हैं जिन्होंने शपथ लेते समय कहा था: “मैं ईमानदारी से काम करूँगा, नफरत दूर करूँगा और सभी वर्गों के लिए काम करूँगा।”

“नफरत दूर करने” का वादा करने वाले विजय ने जब सनातन धर्म के विरुद्ध जहरीले बयान पर मौन साध लिया — तो वह मौन लाखों हिंदुओं के दिलों में एक गहरा घाव बन गया।


नेपोटिज्म का राजकुमार: उदयनिधि स्टालिन कौन हैं?

वंशवाद की वह कहानी जो DMK की असलियत बताती है

उदयनिधि स्टालिन — MK स्टालिन के पुत्र। यानी करुणानिधि के पोते। तमिलनाडु की राजनीति में वंशवाद का सबसे ताजा और सबसे शर्मनाक उदाहरण।

क्या उन्होंने जनता के बीच काम किया? नहीं। क्या उन्होंने किसी आंदोलन का नेतृत्व किया? नहीं। क्या उन्होंने कोई त्याग किया? नहीं।

वे एक फिल्म निर्माता थे, जिन्हें सीधे मंत्री बना दिया गया — सिर्फ इसलिए कि उनके पिता मुख्यमंत्री थे। और अब वे विपक्ष के नेता हैं — बिना किसी राजनीतिक संघर्ष के, सिर्फ वंश के आधार पर।

यह वही “नेपो किड” है जो:

  • संसद का सम्मान नहीं करता
  • न्यायालय की फटकार को अनदेखा करता है
  • करोड़ों हिंदुओं की आस्था को “बीमारी” कहता है
  • और फिर भी बेखौफ घूमता है

2023 से 2026: घृणा की एक निरंतर यात्रा

वह “सनातन उन्मूलन सम्मेलन” जिसने देश को हिला दिया था

2 सितंबर 2023 को चेन्नई में तमिलनाडु प्रगतिशील लेखक-कलाकार संघ द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में उदयनिधि स्टालिन ने कहा था: “जैसे डेंगू, मच्छर, मलेरिया या कोरोनावायरस का उन्मूलन करना जरूरी है, वैसे ही सनातन का उन्मूलन जरूरी है।”

इस बयान के बाद जब देशभर में आक्रोश फैला, तो उदयनिधि ने न माफी माँगी, न पीछे हटे। बल्कि उन्होंने कहा: “मैं तैयार हूँ, जो भी केस करना हो करो। मैं यह कहता रहूँगा।”

यह बेशर्मी की पराकाष्ठा है। यह संविधान की आत्मा का अपमान है।


सुप्रीम कोर्ट की ऐतिहासिक फटकार

जब भारत की सर्वोच्च अदालत ने “नेपो किड” को कड़ी चेतावनी दी

4 मार्च 2024 को सुप्रीम कोर्ट की पीठ — जिसमें जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपंकर दत्ता शामिल थे — ने उदयनिधि स्टालिन को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा:

“आपने अनुच्छेद 19(1)(a) (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) के तहत अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया। अब आप अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में सुरक्षा माँगने आए हैं? क्या आपको अपनी बातों के परिणाम पता नहीं? आप सामान्य नागरिक नहीं, एक मंत्री हैं।”

यह सुप्रीम कोर्ट की भाषा में उदयनिधि को “सार्वजनिक रूप से लज्जित” करना था। लेकिन उनके कानों पर जूँ भी नहीं रेंगी।


मद्रास हाईकोर्ट का फैसला: यह घृणास्पद भाषण है

मद्रास हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति एस. श्रीमती ने अपने फैसले में कहा: “उदयनिधि की टिप्पणियाँ घृणास्पद भाषण की श्रेणी में आती हैं।”

न्यायमूर्ति ने स्पष्ट किया: “उन्होंने कहा कि सनातन धर्म का केवल विरोध नहीं, बल्कि उन्मूलन होना चाहिए। तमिल में उन्होंने ‘सनातन एथिर्प्पू’ (सनातन का विरोध) नहीं, बल्कि ‘सनातन ओझिप्पू’ (सनातन का उन्मूलन) शब्द का प्रयोग किया।”

कोर्ट ने यह भी कहा: “इस बात से पीड़ा होती है कि घृणास्पद भाषण देने वाले बेखौफ घूमते हैं, लेकिन जो उनकी प्रतिक्रिया देते हैं, उन्हें कानून का शिकार बनना पड़ता है।”

BJP की तीखी प्रतिक्रिया

BJP प्रवक्ता CR केसवन ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा: “DMK ने कार्थिगई दीपम के प्रज्वलन का विरोध किया था। DMK के मुख्यमंत्री ने कभी दीवाली पर तमिलनाडु की जनता को शुभकामनाएं नहीं दीं। एक DMK सांसद ने बेशर्मी से कहा था कि हिंदू धर्म न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक खतरा है। इन बार-बार के अपराधियों को याद रखना चाहिए कि तमिलनाडु के राज्य प्रतीक में एक मंदिर का गोपुरम है और तमिलनाडु की जनता ऐसे खुले अपमान को न भूलेगी, न माफ करेगी।”

वंदे मातरम् विवाद: भारत-विरोधी एजेंडे का एक और नमूना

उदयनिधि ने इसी सत्र में यह भी कहा कि शपथ समारोह में तमिलनाडु राज्यगीत ‘तमिल थाई वाझ्थु’ से पहले वंदे मातरम् बजाया गया। उन्होंने TVK सरकार से इसे फिर कभी न होने देने की माँग की।

उन्होंने पश्चिम बंगाल के शपथ समारोह का हवाला देते हुए कहा कि “वहाँ वंदे मातरम् नहीं बजाया गया। यहाँ बजाया गया। आप जानते हैं कि वहाँ का राज्यपाल कौन है।”

यानी सनातन को मिटाने की माँग के साथ-साथ वंदे मातरम् — भारत का राष्ट्रगीत — का भी अपमान। यह “भारत माता की जय” कहने वाले राष्ट्र के प्रति खुली अवज्ञा है।


सनातन धर्म क्या है? — जिसे “मिटाने” की माँग हो रही है

उदयनिधि स्टालिन जिस “सनातन” को मिटाने की बात करते हैं, वह क्या है? आइए समझें:

सनातन धर्म — यानी वह शाश्वत, अनादि, अनंत परंपरा जो:

  • वेदों, उपनिषदों और गीता का आधार है
  • वसुधैव कुटुंबकम् — “पूरी दुनिया एक परिवार है” — का संदेश देती है
  • सर्वधर्म समभाव की शिक्षा देती है
  • अहिंसा, करुणा और सत्य को सर्वोच्च मानती है
  • भारत की 1 अरब से अधिक जनसंख्या की आत्मा है

जब कोई इसे “मच्छर, डेंगू, मलेरिया” से तुलना करता है और इसके “उन्मूलन” की बात करता है — तो वह भारत के हर हिंदू को यही कह रहा है: “तुम्हारी आस्था बीमारी है। तुम्हारा अस्तित्व मिटाना चाहिए।”

क्या यह नरसंहार का आह्वान नहीं है?


दोहरे मानदंड: अगर किसी और धर्म के बारे में कहा जाता तो?

यह सबसे महत्वपूर्ण सवाल है जो हर भारतीय को पूछना चाहिए:

परिदृश्य 1: यदि कोई नेता कहता, “इस्लाम को मिटाया जाना चाहिए” — क्या वह एक दिन भी जेल के बाहर रहता?

परिदृश्य 2: यदि कोई नेता कहता, “ईसाई धर्म को मिटाया जाना चाहिए” — क्या अंतरराष्ट्रीय मीडिया चुप रहती?

परिदृश्य 3: यदि उदयनिधि ने विधानसभा में कहा होता, “ईसाई धर्म को मिटाया जाना चाहिए” — क्या जोसफ विजय हाथ जोड़कर उनका अभिवादन करते?

उत्तर सबको पता है। लेकिन जब बात हिंदुओं की हो — तो “सेकुलरिज्म” का नाटक शुरू हो जाता है। यही भारत के हिंदुओं के साथ सबसे बड़ा अन्याय है।

इस दोहरेपन पर एक विश्लेषक ने लिखा: “नूपुर शर्मा को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी ‘ढीली जुबान’ के लिए फटकारा था। लेकिन उदयनिधि बेखौफ हैं। विडंबना यह है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग केवल तब ‘अपराध’ बनता है जब निशाना हिंदू हों।”

विजय का मौन: एक ईसाई नेता की परीक्षा

जोसफ विजय — एक ईसाई, तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री। उन्होंने शपथ में कहा था कि वे “सभी वर्गों के लिए” काम करेंगे।

लेकिन जब विधानसभा में उनके सामने हिंदुओं के 1.4 अरब लोगों की आस्था को “मिटाने” की माँग हुई — और उन्होंने एक शब्द नहीं बोला — तो “सभी वर्गों” वाला वादा खोखला साबित हो गया।

सवाल यह नहीं कि विजय हिंदू हैं या नहीं। सवाल यह है:

क्या एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की यह जिम्मेदारी नहीं कि वह किसी भी धर्म के विरुद्ध घृणास्पद भाषण का विरोध करे?

विजय की चुप्पी यह बताती है कि या तो वे डीएमके के दबाव में हैं — या उनकी “सभी वर्गों” वाली बात केवल चुनावी जुमला था।


राष्ट्रीय माँग: अब बहुत हो गया

करोड़ों हिंदुओं की माँग है:

1. तत्काल FIR: उदयनिधि स्टालिन के विरुद्ध IPC की धारा 153A (धार्मिक समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और 295A (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना) के तहत तत्काल FIR।

2. OCI रद्द जैसी नजीर: जैसे विदेशियों पर कार्रवाई होती है, वैसे ही जन-प्रतिनिधियों पर भी विशेष जवाबदेही होनी चाहिए।

3. विधानसभा अध्यक्ष की कार्रवाई: विधानसभा की मर्यादा के विरुद्ध इस बयान को रिकॉर्ड से हटाया जाए।

4. CM विजय का स्पष्टीकरण: मुख्यमंत्री को सार्वजनिक रूप से यह बताना चाहिए कि वे इस बयान के समर्थन में हैं या विरोध में।

5. सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका: हाईकोर्ट के “घृणास्पद भाषण” के निर्णय के बाद विधानसभा में दोबारा यही बयान — यह अदालत की अवमानना भी हो सकती है।


निष्कर्ष: सनातन धर्म — जो था, है और रहेगा

उदयनिधि स्टालिन को एक बात समझनी चाहिए — जो उनके पिता ने नहीं, उनके दादा ने नहीं सिखाया, लेकिन इतिहास हमेशा सिखाता है:

सनातन धर्म हजारों वर्षों से है। ग्रीस की सभ्यता मिटी। रोम का साम्राज्य मिटा। बाबर आया और गया। औरंगजेब आया और गया। अंग्रेज आए और गए। लेकिन सनातन धर्म — वह था, वह है, और वह रहेगा।

एक “नेपो किड” की जुबान से निकले शब्द उस शाश्वत सत्य को नहीं मिटा सकते।

लेकिन इन शब्दों का जवाब जरूरी है — कानून से, लोकतंत्र से, और भारत की चुनावी ताकत से।

BJP के CR केसवन ने सही कहा: “तमिलनाडु के राज्य प्रतीक में एक मंदिर का गोपुरम है। तमिलनाडु की जनता अपनी आस्था का यह अपमान न भूलेगी, न माफ करेगी।”

कालक्रम: उदयनिधि का सनातन-विरोध

दिनांकघटना
2 सितंबर 2023“सनातन उन्मूलन सम्मेलन” में सनातन को डेंगू, मलेरिया से तुलना
4 सितंबर 2023देशभर में विरोध, FIR दर्ज, उदयनिधि ने माफी नहीं माँगी
22 सितंबर 2023सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर नोटिस जारी किया
4 मार्च 2024SC ने फटकार लगाई — “आपने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग किया”
जून 2024बेंगलुरु कोर्ट ने जमानत दी
जनवरी 2026मद्रास हाईकोर्ट ने कहा — यह “घृणास्पद भाषण” है
12 मई 2026तमिलनाडु विधानसभा में फिर वही बयान — CM विजय चुप
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