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पाक का युद्धाभ्यास भी नापाक

तालिबान और अलकायदा से लड़ने के लिए दी गई अमेरिकी सैन्य सामग्री का इस्तेमाल पाकिस्तान भारतीय सीमाओं से सटे अपने इलाकों में युद्ध अभ्यास में कर रहा है। बीते 10 अप्रैल से शुरू हुए पाकिस्तानी युद्ध अभ्यास अज्म-ए-नाउ-3 ने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। श्रीगंगानगर से महज पचास किमी की दूरी पर पाकिस्तानी सीमा में बीते बीस वर्षो के इस सबसे बड़े सैन्य प्रदर्शन में ऐसे हथियारों, रणनीतियों और साजो-सामान का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिनका प्रयोग सुरक्षात्मक युद्धाभ्यासों में नहीं बल्कि आक्रमण में किया जाता है। सूत्रों के मुताबिक 15 मई तक चलने वाले इस शक्ति प्रदर्शन में पाक सेना अमेरिकी मिल्रिटी से मिले उस हार्डवेयर का इस्तेमाल कर रही है जिन्हें उसे अफगानिस्तान में लड़ने के लिए दिया गया है। इनमें एफ-16 फाइटर एयरक्राफ्ट, कोबरा अटैक हेलिकॉप्टर, शोल्डर फायर्ड विपेन सिस्टम, एन्जा मार्क-2 मिसाइल, विपेन लोकेटिंग राडार और कई अत्याधुनिक राइफल हैं। भारत सरकार पहले ही इन खतरों से अमेरिका को आगाह कर चुकी थी और अब ताजा खुफिया रिपोर्टो ने भारतीय अंदेशों की पुष्टि कर दी है। इस बारे में रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय को रिपोर्ट मिल चुकी है। असल उद्देश्य पाक सेना का दावा है कि यह युद्धाभ्यास सुरक्षात्मक उपायों और रणनीतियों के प्रशिक्षण के लिए है। हकीकत यह है कि यह एक्सरसाइज जरूरत पड़ने पर भारत पर आक्रमण करने की तैयारियों के संदर्भ में है। पाक के खिलाफ भारतीय रणनीति को ‘कोल्ड स्टार्ट वार डाक्ट्रिन’ के नाम से जाना जाता है। यह युद्धाभ्यास उसे काउंटर करने के लिए है।सूत्र बताते हैं कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया के सामने पाक ने अपने इस युद्धाभ्यास को सुरक्षा तैयारियों के तौर पर प्रचारित किया है। हकीकत यह है कि इसमें सिर्फ आक्रमण करने का अभ्यास किया जा रहा है.
श्रीगंगानगर से सुधीर मिश्र
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