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ढाणी-ढाणी और गाँव -गाँव में पहुँचा पाथेय कण- बेरवाल समाज के लोगों को जागरुक करने का कार्य कर रहा है पाथेय कण-ललित शर्मा

ढाणी-ढाणी और गाँव -गाँव में पहुँचा पाथेय कण- बेरवाल
समाज के लोगों को जागरुक करने का कार्य कर रहा है पाथेय कण-ललित शर्मा 
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पाथेय कण के मारवाड़ अंक का  लोकार्पण करते हुए

जयपुर ८ दिसम्बर १६।  “ढाणी-ढाणी
और गाँव-गाँव में पहुँचकर लोगों को जागरुक कर रहा है पाथेय कण। इसमें
प्रकाशित सामग्री बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों का ज्ञान वर्धन कर रही है।”
यह विचार ‘डॉ.भीमराव अम्बेडकर फाउण्डेशन’ अम्बेडकर पीठ के महानिदेशक श्री
कन्हैयालाल बेरवाल ने पाथेय कण के मारवाड़ अंक के लोकार्पण कार्यक्रम की
अध्यक्षता करते हुए व्यक्त किये। जयपुर में 8 दिसम्बर को मालवीय नगर में
पाथेय कण के मारवाड़ विशेषांक का लोकार्पण किया गया।  उन्होंने कहा 31 साल
पहले एक छोटे से कार्यालय से शुरु हुए पाथेय कण जागरण पत्रक ने आज
गांव-गांव, ढाणी-ढाणी में अपनी पहचान बनाई है। इसमें संतों, देशभक्तों,
महापुरुषों के बारे में दी गई जानकारी सभी वर्ग के लोगों का ज्ञान बढ़ाती है
 
कार्यक्रम में आशीर्वचन देते हुए संवित सुबोधगिरिजी ने कहा कि
हम सब स्मृति के आधार पर जीते हैं। स्मृति हमारी शक्ति होती है। जो समाज
स्मृति विहीन हो जाता है। वह अधिक समय तक जीवित नहीं रह सकता। राजस्थान
वीरों-धीरों की भूमि रही है। जो देश के लिये जीया, जो सत्य के लिये जीये वह
हमारे आदर्श पुरुष हैं, उसे हमने पूज्य पुरुष के रूप में स्वीकारा है।
जबकि पश्‍चिम में जो देशद्रोह करता है जो अमानुषिक अत्याचार कहता है वहाँ
पर उसकी पूजा की जाती है। राजस्थान का इतिहास लिखने वाले कर्नल टॉड ने भी
कहा है कि यदि तराजू के एक पलड़े में राजस्थान का इतिहास रखा जाए और दूसरे
पलड़े में विश्‍व के वीरों का इतिहास रखा जाए तो राजस्थान का पलड़ा भारी
रहेगा। उन्होंने कहा कि यह हमारे देश का दुर्भाग्य रहा है कि जिन
आक्रांताओं ने भारत को विश्‍व के मानचित्र से हटाने की कोशिश की, जिन्होंने
देश को लूटा स्वाधीनता के बाद उन्हीं को महिमा मंडित किया जा रहा है।
पाथेय कण समाज में लोगों को देश के वीरों के विषय में रचनाएं प्रकाशित कर
उन्हें जागरुक करने का कार्य कर रहा है।
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लोकार्पण समारोह के
मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जोधपुर प्रांत के प्रांत संघचालक श्री
ललित शर्मा थे। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि सृष्टि के सभी-अंगों का
अपना-अपना स्वभाव होता है। यही स्वभाव धीरे-धीरे उसका धर्म बन जाता है। ठीक
इसी प्रकार पाथेय कण का भी अपना स्वभाव है लोगों को धर्म के प्रति जागरुक
करने का। पाथेय कण अपने प्रारंभिक काल 1985 से अपना यह धर्म निभाता चला आ
रहा है। साहित्य समाज का दर्पण होता है। जिस प्रकार दर्पण पर यदि धूल जम
जाए तो उसमें से सब धुंधला नजर आता है। स्पष्ट देखने के लिए उस धूल को
हटाना जरूरी होता है। साहित्य जगत पर समय-समय पर विदेशी संस्कृतियों का
आक्रमण रहा है। पाथेय कण (पाक्षिक) उसी धूल को हटाने का प्रयास कर रहा है।
यह समाज के लोगों को जागरुक करने का कार्य कर रहा है।
 
समारोह के
प्रारम्भ में सभी आगंतुक अतिथियों का पुष्पहार पहनाकर स्वागत किया गया। इस
अवसर पर पाथेय कण संस्थान द्वारा सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किया
गया । पाथेय कण संस्थान के अध्यक्ष श्री गोविन्द प्रसाद अरोड़ा ने कार्यक्रम
में उपस्थित सभी गणमान्य नागरिकों को धन्यवाद ज्ञापित किया।
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