Vsk Jodhpur

कट्टरता पर कर्तव्य हावी कैप्टन के शौर्य ने बचाई भारत की वैश्विक साख

कैप्टन स्मित मच्छार  द्वारा फ्लाईदुबई  की उड़ान में हाईजैक व संभावित आत्मघाती हमले की साजिश को नाकाम करने की घटना वैश्विक विमानन इतिहास के सबसे साहसिक अध्यायों में गिनी जा रही है। दुबई से तेल अवीव जा रही इस उड़ान में कॉकपिट के भीतर हुए जानलेवा हमले के बावजूद उन्होंने जिस सूझबूझ और अदम्य साहस से 174 से अधिक यात्रियों की जान बचाई, उसने भारत सहित पूरी दुनिया में उन्हें एक नायक का दर्जा दिलाया है।

फ्लाईदुबई की उड़ान (FZ1073) में कॉकपिट के भीतर भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार  और ओमानी सह-पायलट हम्माम अल-हमामी  के बीच घटी यह घटना केवल एक उड्डयन आपातकाल नहीं, बल्कि भू-राजनीति, धार्मिक संवेदनशीलता और वैश्विक आतंकवाद के त्रिकोण पर स्थित एक अत्यंत संवेदनशील मामला है।

इस घटना के दोनों पहलुओं—यदि यह आत्मघाती हमला सफल हो जाता तब, और चूंकि इसे नाकाम कर दिया गया तब—का भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि और आंतरिक विमर्श पर प्रभाव को समझने का प्रयास करते है।

यदि यह हमला/क्रैश सफल हो जाता, यदि वह कट्टरपंथी सह-पायलट विमान को इजराइल में किसी आबादी वाले क्षेत्र पर क्रैश कराने में सफल हो जाता, तो वैश्विक स्तर पर यह 9/11 के बाद की सबसे भीषण त्रासदी बनती। इसके भारत की छवि पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ते:-

कॉकपिट नियंत्रण और पेशेवर विफलता का नैरेटिव:-

अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन में अंतिम जिम्मेदारी ‘पायलट-इन-कमांड’ (PIC) यानी मुख्य कैप्टन की होती है। भले ही हमला अचानक और जानलेवा था, लेकिन त्रासदी होने की स्थिति में जांच और वैश्विक मीडिया का एक वर्ग यह सवाल जरूर उठाता कि भारतीय कैप्टन अपने कॉकपिट पर नियंत्रण क्यों नहीं रख सके। 

ध्रुवीकरण और सूचना युद्ध

पाकिस्तान और भारत विरोधी प्रचार तंत्र इसे तुरंत एक सांप्रदायिक और भू-राजनीतिक रंग देने का प्रयास करते।

इंटरनेट और सोशल मीडिया पर षड्यंत्रकारी सिद्धांत (Conspiracy Theories) फैलाए जाते कि विमान में हिंदू और मुस्लिम पायलटों के बीच कोई व्यक्तिगत या वैचारिक विवाद हुआ, जिसने विमान को गिरा दिया। इससे भारत की पेशेवर तटस्थता पर झूठे लांछन लगाए जाते। 

मध्य पूर्व में भारतीय प्रवासियों पर अप्रत्यक्ष दबाव:

खाड़ी देशों की एयरलाइंस में हजारों भारतीय पेशेवर, तकनीकी विशेषज्ञ और पायलट कार्यरत हैं। इतने बड़े पैमाने के हादसे के बाद गल्फ करियर में सुरक्षा समीक्षाएं और सख्त हो जातीं, जिसका अवांछित असर भारतीय वर्कफोर्स के विश्वास पर पड़ता।  यह तो बात थी अगर यह घटना होती तो क्या संभावनाएं थी अब बात करते  घटना नाकाम होने के बाद भारत की छवि पर वास्तविक प्रभाव क्या होगा।

कैप्टन स्मित मच्छार द्वारा जानलेवा वार सहते हुए भी अंतिम क्षणों में कॉकपिट का दरवाजा खोलकर और विमान का संतुलन बचाकर 174 यात्रियों की जान बचा लेने से भारत की वैश्विक छवि को असाधारण लाभ हुआ है:

‘सच्चा नायक’ और पेशेवर पराक्रम

इज़राइल, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और अमेरिका सहित वैश्विक नेतृत्व ने भारतीय कैप्टन की अदम्य वीरता को सार्वजनिक रूप से सराहा।

दुनिया के सामने यह साबित हुआ कि भारतीय नागरिक विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में भी बिना घबराए कर्तव्य और मानवीय दायित्व को अपने प्राणों से ऊपर रखते हैं। भारतीय पायलटों की अंतरराष्ट्रीय साख कई गुना बढ़ी है।

आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक विमर्श में नैतिक बढ़त:

कॉकपिट के भीतर कट्टरपंथ से प्रेरित हमलावर के सामने एक भारतीय का निहत्थे लड़ना और धर्म/नागरिकता देखे बिना (विमान में अधिकांश इज़राइली और विदेशी यात्री थे) सभी की जान बचाना, भारत की आतंकवाद-विरोधी छवि को नैतिक रूप से और मजबूत करता है।

यह घटना दिखाती है कि भारत वैश्विक शांति और निर्दोषों की सुरक्षा में प्रत्यक्ष रूप से एक ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ की भावना के साथ खड़ा है।

सांप्रदायिक नैरेटिव पर पेशेवर कर्तव्य की जीत:

भले ही कॉकपिट में दोनों पायलट अलग-अलग धर्मों के थे, लेकिन कैप्टन स्मित ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि वे अपने सह-पायलट की नमाज़ पढ़ने की प्रक्रिया का पेशेवर सम्मान कर रहे थे, तभी उन पर हमला हुआ।

इससे यह साबित हुआ कि भारतीय कैप्टन किसी पूर्वाग्रह से ग्रस्त नहीं थे, बल्कि पूरी तरह पेशेवर मर्यादा में थे; जबकि हमलावर सह-पायलट अपनी कट्टरपंथी मानसिकता का शिकार था। इसने भारत के बहुलवादी और समावेशी चरित्र को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सही ठहराया। 

इज़राइल और खाड़ी देशों के साथ संबंधों में प्रगाढ़ता:

इज़राइली नागरिकों की जान एक भारतीय द्वारा बचाए जाने से दोनों देशों के जनमानस में भावनात्मक और कूटनीतिक निकटता बढ़ी है।

साथ ही, यूएई सरकार द्वारा मामले की पारदर्शी जांच और कैप्टन को हर संभव चिकित्सा सहायता देना खाड़ी देशों के साथ भारत के गहरे रणनीतिक और मानवीय संबंधों को दर्शाता है।

कॉकपिट में धर्म की आड़ में रची गई यह हिंसक साजिश केवल एक विमान को नष्ट करने का प्रयास नहीं थी, बल्कि यह भारत के बहुलवादी चरित्र और पेशेवर मर्यादा की परीक्षा भी थी। यदि यह हादसा घट जाता, तो वैश्विक स्तर पर यह भ्रामक सांप्रदायिक नैरेटिव और रणनीतिक आघात का कारण बन सकता था। किंतु लहुलूहान होकर भी कैप्टन स्मित मच्छार ने जिस अडिग साहस से 174 निर्दोषों की रक्षा की, उसने कट्टरता पर मानवीय मूल्यों की विजय स्थापित की। इस अदम्य वीरता ने विश्व पटल पर यह सिद्ध कर दिया कि भारतीय संस्कार संकट की चरम घड़ी में भी सर्वोपरि कर्तव्य और विश्व-बंधुत्व की रक्षा के लिए प्राण न्योछावर करने से पीछे नहीं हटते।

 

सोशल शेयर बटन

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Archives
Scroll to Top