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नारी का सम्मान यहां की गौरवशाली परम्परा, राष्ट्र सेविका समिति नागौर विभाग का प्रारंभिक शिक्षा वर्ग संपन्न

राष्ट्र सेविका समिति नागौर विभाग का प्रारंभिक शिक्षा वर्ग शारदा बालिका निकेतन में संपन्न हुआ, सात दिवसीय इस शिक्षा वर्ग में स्वयं सेविकाओं ने शारीरिक व बौद्धिक प्रशिक्षण किया। डॉ सुनीता आर्य की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में नगर परिषद सभापति नीतू तोलावत मुख्य अतिथि के रूप में मंचस्थ रहे। वर्ग में राष्ट्र सेविका समिति के जोधपुर प्रांत प्रचारिका ऋतु शर्मा का मुख्य वक्ता के रूप में बौद्धिक प्राप्त हुआ।

नागौर में इस वर्ग में नागौर विभाग के मेड़ता, डीडवाना व नागौर जिले की सहभागिता रही। वर्ग वर्गाधिकारी डॉ मंजू सारस्वत ने अतिथियों का परिचय करवाते हुए वर्ग का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। नागौर जिला कार्यवाही का इंदुमति चौधरी द्वारा आभार व्यक्त किया गया।

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शारीरिक कार्यक्रमों के माध्यम से महिला शक्ति का आह्वान वर्ग के समापन पर स्वयं सेविकाओं ने बिना अस्त्र-शस्त्र के युद्ध की कला नियुद्ध तथा योगासन का प्रदर्शन किया। इसी प्रकार से आत्मरक्षा के लिए दंड (लाठी) के प्रयोग, यष्टि (लघु दंड) का भी प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में अमृत वचन व काव्य गीत भी प्रस्तुत किया गया। स्वयंसेविकाओं द्वारा समवेत स्वर में “नारी का सम्मान यहां की गौरवशाली परंपरा, समरस जीवन से टूटेगी भेदभाव की धारा” का गान किया।

इस अवसर पर अपने संबोधन में प्रांत प्रचारिका ऋतु शर्मा ने कहा कि हमारा सौभाग्य है कि भारत माता की सेवा हेतु शाखा रूपी संजीवनी मिली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना शताब्दी वर्ष में हम सब शून्य से शताब्दी की यात्रा के शाक्षी बने हैं। विपरीत परिस्थितियों में समाज सेवा का व्रत धारा है। हमारा ध्येय तेजस्वी राष्ट्र का पुनर्निर्माण है। इस हेतू वर्ग के माध्यम से तेजस्विता निर्माण किया जा रहा है। शाखा मंदिर है भारत माता का जिसके माध्यम से व्यक्तित्व निर्माण करें जो हमारे ध्येय हेतु सहायक बन सके।

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उन्होंने कहा कि हम आज रानी बक्का का 400वां जन्म शताब्दी वर्ष मना रहे हैं। जिन्होंने भारत भक्ति के माध्यम से पुर्तगालियों से संघर्ष किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि संघ स्थापना का के शताब्दी वर्ष में व्यक्तिगत परिवर्तन के बाद हम स्वयं से समाज तक बदलाव के माध्यम बने। अपने जीवन में स्वयं परिवर्तन करके समाज में समर समय वातावरण बनाना है। परिवार समाज की रीढ है। परिवार मजबूत है तो समाज मजबूत होगा। स्वयं कर्तव्य का पालन करेंगे तो समाज में परिवर्तन आएगा और उसी से देश में परिवर्तन होगा।

समाज को आगे बढ़ाना है तो जिस प्रकार से गाड़ी के दोनों पहियों से काम चलता है उसी प्रकार से पुरुष व महिला दोनों का विकास आवश्यक है। स्त्री ही राष्ट्र की आधारशिला है।कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत वंदे मातरम से किया गया।

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