नक्सल इतिहास के सबसे क्रूर और खूंखार कमांडर माड़वी हिड़मा को सुरक्षा बलों ने आखिरकार मार गिराया। मंगलवार सुबह आंध्र प्रदेश के मरेडमिल्ली के जंगल में हिड़मा, उसकी पत्नी राजे और चार अन्य नक्सलियों को ढेर कर दिया गया। यह इलाका छत्तीसगढ़ की सीमा से लगा हुआ है।
कैसे हुआ ऑपरेशन
आंध्र प्रदेश के एडीजी इंटेलिजेंस महेश चंद्र लड्डा के अनुसार, एक सप्ताह पहले विजयवाड़ा और विशाखापट्टनम के आसपास से 31 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें से 7, नक्सल शीर्ष नेता देवजी के बॉडीगार्ड थे।
इनकी निशानदेही के आधार पर दो दिन पहले एक बड़ा संयुक्त ऑपरेशन शुरू किया गया, जिसमें आंध्र प्रदेश की ग्रेहाउंड्स और सीआरपीएफ ने भाग लिया।
अल्लूरी सीतारामा राजू जिले के जंगलों में सुरक्षा बलों ने हिड़मा और उसके साथियों को मार गिराया।

एक करोड़ का इनाम, पत्नी पर 40 लाख
छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में हिड़मा पर 1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था।
उसकी पत्नी राजे भी 40 लाख की इनामी नक्सली थी।
हिड़मा बस्तर का इकलौता नक्सली था जिसे संगठन की सेंट्रल कमेटी में जगह दी गई थी। पिछले 25 वर्षों में बस्तर में हुए लगभग हर बड़े नक्सली हमले में उसका नाम सामने आया।
25 साल तक बस्तर में आतंक
हिड़मा 16 साल की उम्र में नक्सल संगठन से जुड़ा और धीरे-धीरे पीएलजीए की बटालियन नंबर 1 का प्रमुख बन गया।
उसके नेतृत्व में नक्सलियों ने कई बड़े हमलों को अंजाम दिया, जिनमें शामिल हैं
2010 का ताड़मेटला हमला — 76 जवान शहीद
6 अप्रैल 2010, सुकमा के ताड़मेटला क्षेत्र में सीआरपीएफ के जवान गश्त कर रहे थे।
नक्सलियों ने घात लगाकर हमला किया, जिसमें 76 जवान शहीद हुए।
यह भारतीय इतिहास के सबसे घातक नक्सली हमलों में से एक माना जाता है।
हिड़मा को इस हमले का मुख्य साजिशकर्ता बताया गया था।
2013 का झीरम घाटी हमला — 32 लोगों की मौत
25 मई 2013, विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा झीरम घाटी से गुजर रही थी।
नक्सलियों ने काफिले पर हमला कर दिया, जिसमें:
- नंदकुमार पटेल
- विद्याचरण शुक्ल
- महेंद्र कर्मा
- उदय मुदलियार
- योगेंद्र शर्मा
सहित कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और कुल 32 लोग मारे गए।

हर सुरक्षा एजेंसी के रडार पर था हिड़मा
हिड़मा का नाम लगातार एनआईए, आईबी और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर रहा।
बस्तर में हुए कई बड़े हमलों की जांच एनआईए कर रही थी, और हर हमले में हिड़मा की भूमिका सामने आती रही।
अब माना जा रहा है कि हिड़मा के मारे जाने के बाद बस्तर में नक्सलवाद तेजी से कमजोर होगा।
12 दिन पहले ही पूरी हो गई ‘डेडलाइन’
सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हिड़मा को खत्म करने के लिए 30 नवंबर तक की डेडलाइन दी थी।
सुरक्षा बलों ने निर्धारित समय से 12 दिन पहले ही इस खूंखार नक्सली को ढेर कर दिया।