वैश्वीकरण, आर्थिक सुधार जैसे बड़े-बडे़ नाम देकर भारतीय जनमानस को गुमराह किया जा रहा है – अरूण ओझा कृषि निवेश और पेटेंट को व्यापार वार्ताओं से बाहर किया जाना चाहिए – डाॅ. अश्विनी महाजन
जीवन शैली को भारतीय संस्कारों में ढाल देना ही स्वदेशी – अरूण ओझा जब भी बाजार जायेगें, माल स्वदेशी लायेंगे’’, ’’स्वदेशी अपनाओ,देश बचाओ’ उद्घोषों के साथ स्वदेशी संदेश यात्रा निकाली हुंकार सभा का आयोजन