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लेंसकार्ट का विवादास्पद ‘ड्रेस कोड’: हिंदू कर्मचारियों पर कलावा-टिका प्रतिबंध, सोशल मीडिया पर भड़का गुस्सा

ऑनलाइन चश्मा रिटेलर लेंसकार्ट एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार किसी प्रमोशन या नई लॉन्च के लिए नहीं। कंपनी के कथित ‘ड्रेस कोड डॉक्यूमेंट’ ने सोशल मीडिया पर तूफान मचा दिया है। इस दस्तावेज़ में हिंदू कर्मचारियों के लिए कलावा, टीका, बिंदी और जनेऊ पहनने पर सख्त पाबंदी लगाई गई है, जबकि मुस्लिम कर्मचारियों को हिजाब, टोपी या दाढ़ी रखने की छूट दी गई दिखाई दे रही है। वायरल पोस्ट्स में लोग इसे ‘हिंदू-विरोधी नीति’ बता रहे हैं, जिससे कंपनी के बहिष्कार की मांग तेज हो गई है।
सोशल मीडिया पर भड़के गुस्से की तस्वीरें देखिए तो साफ है कि लोग खरीदारी बंद करने का ऐलान कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “लेंसकार्ट से कुछ नहीं खरीदेंगे।” वहीं दूसरे ने तंज कसते हुए कहा, “मैं लेंसकार्ट से कभी चश्मा नहीं खरीदूँगा। अब हिजाब पहनने वाली महिलाएँ ही चश्मे खरीदें। कृपया कर्मचारियों को नमाज पढ़ने और रमजान में रोजा रखने का तरीका भी सिखा दो।” ये पोस्ट्स हजारों लाइक्स और शेयर बटोर रही हैं, जो कंपनी की छवि पर सवाल खड़े कर रही हैं। कई यूजर्स ने इसे ‘धार्मिक भेदभाव’ का नाम देते हुए ब्रांड को बॉयकॉट करने का आह्वान किया है।

यह घटना तब सामने आई जब सोशल मीडिया पर यह डॉक्यूमेंट वायरल हुआ, जिसमें साफ-साफ लिखा है कि हिंदू प्रतीकों पर रोक है, लेकिन इस्लामी पोशाक पर कोई पाबंदी नहीं। आलोचकों का कहना है कि यह कंपनी की ‘सेकुलर’ छवि के नाम पर एकतरफा नीति है, जो कर्मचारियों के धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन करती है। लेंसकार्ट, जो भारत में तेजी से बढ़ रही ई-कॉमर्स कंपनी है, पहले भी विज्ञापनों और सर्विस को लेकर विवादों में रही है, लेकिन यह धार्मिक संवेदनशीलता वाला मामला उसकी प्रतिष्ठा को सबसे बड़ा झटका दे सकता है।
कई ग्राहक अब वैकल्पिक ब्रांड्स जैसे टाइटन आई या लोकल ऑप्टिशियन की ओर रुख कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी नीतियाँ ब्रांड की सेल्स पर असर डालेंगी, खासकर जब भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में धार्मिक भावनाएँ संवेदनशील होती हैं। क्या लेंसकार्ट इस विवाद से उबर पाएगी या यह बॉयकॉट अभियान उसके लिए नुकसानदेह साबित होगा? आने वाले दिनों में कंपनी का रुख तय करेगा।

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