जोधपुर के एक संवेदनशील आतंकी मामले में सेशन कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी मोहम्मद अमार यासर की जमानत रद्द कर दी है। यह जमानत उसे पहले सुप्रीम कोर्ट से मिली थी, लेकिन जमानत की शर्तों के उल्लंघन के कारण अदालत ने इसे निरस्त कर दिया।
अपर सेशन न्यायाधीश संख्या-3 (जोधपुर महानगर) देवेंद्र सिंह भाटी ने आदेश जारी करते हुए कहा कि यदि कोई आरोपी जमानत की शर्तों का उल्लंघन करता है, तो ट्रायल कोर्ट को उसे रद्द करने का पूर्ण अधिकार है, चाहे जमानत सर्वोच्च अदालत से ही क्यों न मिली हो।
कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ प्रोडक्शन वारंट जारी किया है। वर्तमान में वह रांची की सेंट्रल जेल में बंद है और उसे जल्द ही जोधपुर लाया जाएगा।
जमानत की शर्तों का किया उल्लंघन
विशिष्ट लोक अभियोजक (एटीएस) दिनेश कुमार शर्मा के अनुसार, मोहम्मद अमार यासर को 3 मई 2024 को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी। इसके बाद 6 मई 2024 को जोधपुर ट्रायल कोर्ट ने जमानत की शर्तें तय की थीं। इन शर्तों में स्पष्ट रूप से उल्लेख था कि आरोपी किसी भी प्रकार की आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं होगा।
हालांकि, जमानत पर रिहा होने के बाद आरोपी दोबारा देश-विरोधी गतिविधियों में शामिल हो गया। झारखंड एटीएस ने 26 अप्रैल 2025 को उसके खिलाफ नया मामला दर्ज किया और 30 अप्रैल 2025 को उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के दौरान उसके मोबाइल से संदिग्ध सामग्री भी बरामद हुई।
2014 में सामने आया था आतंकी मॉड्यूल
यह मामला वर्ष 2014 का है, जब राजस्थान एटीएस और दिल्ली पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए इंडियन मुजाहिदीन के राजस्थान मॉड्यूल का खुलासा किया था। इस दौरान आरोपियों के पास से 50 किलो विस्फोटक सामग्री, डेटोनेटर, इलेक्ट्रॉनिक टाइमर और बम बनाने से संबंधित दस्तावेज बरामद किए गए थे।
इस मॉड्यूल को पाकिस्तान से जुड़े आतंकी जिया-उ-रहमान उर्फ वकास द्वारा संचालित किया जा रहा था, जो राजस्थान में बड़े हमलों की साजिश रच रहा था।
पहले मिल चुकी है आजीवन कारावास की सजा
जयपुर के जिला एवं सेशन न्यायालय (महानगर-प्रथम) ने मार्च 2021 में इस मामले में 12 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जिनमें मोहम्मद अमार यासर भी शामिल था। आरोपियों को देशद्रोह, गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम (UAPA) और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत दोषी पाया गया था।

जोधपुर में मामला अब भी विचाराधीन
जोधपुर का एक संबंधित मामला अभी भी अपर सेशन न्यायाधीश संख्या-3 की अदालत में विचाराधीन है। आरोपी पर वर्ष 2013 में मंडोर गार्डन में प्रतिबंधित संगठन इंडियन मुजाहिदीन के सदस्यों के साथ बैठक करने, आतंकी साजिश रचने और अन्य लोगों को संगठन से जोड़ने के आरोप हैं।
अदालत अब आरोपी को जोधपुर लाकर आगे की सुनवाई करेगी।