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यूएई में ईरानी हमले की फोटो शेयर की, ब्रिटिश महिला गिरफ्तार: मिडिल ईस्ट का ‘फ्रीडम ऑफ स्पीच’ का दिखावा, भारत जैसी आजादी कहां!

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में सोशल मीडिया पर ईरानी हमलों की तस्वीरें शेयर करना अपराध बन गया है। एक ब्रिटिश फ्लाइट अटेंडेंट को इसी ‘अपराध’ के लिए गिरफ्तार किया गया, जो पश्चिम एशिया में सख्त साइबर कानूनों का नंगा सच उजागर करता है। फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच अभिव्यक्ति की आजादी पर सवाल खड़े करती है।

ब्रिटिश महिला, जो दुबई एयरपोर्ट पर काम करती थी, ने इंस्टाग्राम पर ईरान के मिसाइल हमलों की कुछ तस्वीरें पोस्ट कीं। यूएई पुलिस ने इसे ‘फेक न्यूज फैलाने’ का मामला बताते हुए उसे हिरासत में ले लिया। यूएई के फेडरल डिक्री-लॉ नंबर 34 ऑफ 2021 के तहत सोशल मीडिया पर ‘झूठी जानकारी’ या ‘राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा’ पहुंचाने वाली पोस्ट पर 10 साल जेल और भारी जुर्माना हो सकता है। यह कानून युद्धकाल में और सख्त हो जाते हैं।


मिडिल ईस्ट में अभिव्यक्ति की आजादी का ‘मिरेज’
यूएई सहित खाड़ी देशों में बोलने की आजादी नाममात्र की है। सऊदी अरब, कतर और बहरीन में भी साइबरक्राइम लॉ के नाम पर पत्रकार, ब्लॉगर और आम नागरिक जेल में सड़ते हैं। 2025 में यूएई ने 50 से अधिक लोगों को सोशल मीडिया पोस्ट के लिए गिरफ्तार किया। Amnesty International की रिपोर्ट कहती है कि इन देशों में ‘राय व्यक्त करना’ अपराध है। सरकार की आलोचना या संवेदनशील मुद्दों पर पोस्ट करने वाले विदेशी कामगारों को डिपोर्ट कर दिया जाता है।


भारत की तुलना में अंतर स्पष्ट है। यहां संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत बोलने की आजादी बुनियादी अधिकार है। ट्विटर, फेसबुक पर कोई भी सरकार, सेना या धर्म की आलोचना कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कई बार सेंसरशिप को रोका। लेकिन यूएई जैसे देशों में शेखों की सल्तनत में कोई बहस नहीं बर्दाश्त।


एनआरआई की चुप्पी: भारत पर बोलते हैं, खुद के ‘गुलाम’ देश पर मौन!
भारत के लाखों एनआरआई यूएई, सऊदी और गल्फ देशों में रहते हैं। वे सोशल मीडिया पर भारत सरकार, पीएम मोदी, CAA या राम मंदिर पर खुलकर आलोचना करते हैं। लेकिन अब जब खुद उनके ‘स्वर्ग’ यूएई में फोटो शेयर करने पर जेल हो रही है, वे खामोश हैं। पंचजanya और अन्य राष्ट्रवादी प्लेटफॉर्म्स ने इसे ‘दोहरी नैतिकता’ कहा। एक एनआरआई ने नाम न बताते हुए कहा, “भारत में आजादी है, यहां डर लगता है।”


2024 के एक सर्वे में 70% गल्फ एनआरआई ने स्वीकार किया कि वे स्थानीय कानूनों से डरते हैं। वे भारत को ‘गुंडागर्दी’ कहते हैं, लेकिन खाड़ी के ‘कानूनी जुल्म’ पर चुप। यह घटना एनआरआई को आईना दिखाती है कि असली लोकतंत्र भारत में है, जहां आलोचना पर जेल नहीं होती।
युद्ध और सेंसरशिप का वैश्विक संदर्भ


पश्चिम एशिया युद्ध (इजरायल-ईरान) में सभी देश सेंसरशिप बढ़ा रहे हैं। ईरान ने इंटरनेट काट दिया, सऊदी ने 100+ अकाउंट ब्लॉक किए। यूएई ने ‘नेशनल सिक्योरिटी’ के नाम पर मीडिया कंट्रोल सख्त कर दिया। भारत ने भी IT नियम 2021 के तहत सावधानी बरती, लेकिन अभिव्यक्ति की गुंजाइश बरकरार रखी।


यह ब्रिटिश महिला का केस गल्फ में काम करने वाले 90 लाख भारतीयों के लिए चेतावनी है। सरकार ने एमईए के जरिए उनकी सहायता का आश्वासन दिया। लेकिन सवाल वही है: क्या एनआरआई अब ‘गल्फ के गुलामों’ की हकीकत स्वीकार करेंगे?

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