सिणधरी – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष कार्यक्रमों के क्रम में मंगलवार को सिणधरी में प्रमुखजन गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें बालोतरा जिले के सिवाना, सिणधरी व गुड़ामालानी खंड के समाज की विभिन्न श्रेणियों के प्रमुख व्यक्ति की सहभागिता रही।
कार्यक्रम में मुख्यवक्ता जोधपुर प्रांत प्रचारक विजयानंद ने संबोधित करते हुए कहा कि 1925 के विजयादशमी को प्रारंभ हुए संघ कार्य को 2025 में सौ वर्ष पूर्ण हुए है। संघ की यह शतायु यात्रा कार्यकर्ताओं के समर्पण, राष्ट्रप्रेम की अखंड श्रद्धा, भारतमाता के खोए हुए गौरव को पुनः स्थापित करने की उत्कंठा के ध्येय को समर्पित रही है। उन्होंने कहा कि भारत एक जीवन्त राष्ट्र पुरुष है जिसकी संस्कृति अत्यंत प्राचीन और सर्व कल्याणमयी रही है लेकिन इस राष्ट्र को खंडित करने की कुत्सित सोच रखने वाले लोगों ने कई नकारात्मक विमर्श खड़े किए, संघ को मिटाने का प्रयास किया परन्तु इस देश की मिट्टी को मातृभूमि, पितृभूमि, पुण्यभूमि मानने वाले हिंदू समाज ने सैकड़ों सालों तक संघर्ष करते हुए इसके गौरव को आगे बढ़ाया है।

उन्होंने कहा संघ के निष्ठावान कार्यकर्ता सदैव देश सेवा के भाव से जीते है फिर चाहे सेना को 500 यूनिट रक्तदान की बात हो या सुनामी और कोरोना जैसी महामारी में सेवा कार्य हो या विमान हादसे की व्यवस्था संभालना हो, हमेशा तत्परता से कार्य किया है। उन्होंने कहा आज भारत विश्व में मजबूती से आगे बढ़ रहा है इसे और गति देने के लिए हर व्यक्ति का योगदान महत्वपूर्ण है। संघ शाखाओं के माध्यम से राष्ट्रीय चरित्र से युक्त व्यक्तिनिर्माण का कार्य ही रहा है साथ ही संघ की शाखा से तैयार कार्यकर्ता समाज के हर क्षेत्र में विविध संगठनों के माध्यम से राष्ट्र कार्य को आगे बढ़ा रहे है।
उन्होंने कहा संघ ने शताब्दी वर्ष के अवसर पर विश्व को दिखाने के लिए कोई बड़े बड़े कार्यक्रम न करके स्वयं को समाज का ही अंग मानते हुए राष्ट्र गौरव के अनुरूप समाज परिवर्तन के छोटे छोटे कार्यक्रम तय करके भारतीय चिंतन खड़ा करना सुनिश्चित किया। संघ ने इस अवसर पर कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी और नागरिक कर्तव्य जैसे पंच परिवर्तन का आव्हान किया है जो मानवता मात्र के कल्याण का भाव दृढ़ करती है।
जिला कार्यवाह बाबूलाल प्रजापत ने बताया कि इस संगोष्ठी में सिणधरी, सिवाना व गुड़ामालानी के प्रमुख जनों ने सहभागिता कर संघ कार्य, वर्तमान समय में इसकी प्रासंगिकता और आवश्यकता के विषय में विस्तार से समझा।