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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘धर्म चक्रवर्ती’ की उपाधि से सम्मानित किया गया

आचार्य श्री 108 विद्यानंद जी महाराज के शताब्दी समारोह में हुआ भव्य आयोजन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आज जैन समाज के प्रमुख संत आचार्य श्री 108 विद्यानंद जी महाराज के शताब्दी समारोह के अवसर पर ‘धर्म चक्रवर्ती’ की विशिष्ट उपाधि से सम्मानित किया गया। यह समारोह देश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना के केंद्र बेंगलुरु में अत्यंत भव्यता और श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ।

इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने आचार्य विद्यानंद जी महाराज को भारतीय चिंतन परंपरा का एक आदर्श प्रतिनिधि बताया और कहा कि उनका जीवन अहिंसा, तप, संयम और आत्मकल्याण के पथ पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा,
“आचार्य विद्यानंद जी महाराज का शताब्दी वर्ष केवल जैन समाज के लिए नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए गौरव का विषय है।”

कार्यक्रम में देशभर से आए हुए जैनाचार्यों, विद्वानों, राजनेताओं और श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। श्री मोदी को ‘धर्म चक्रवर्ती’ की उपाधि देने का उद्देश्य उनके राष्ट्र निर्माण में धर्म, नीति, और संस्कृति के समन्वयात्मक योगदान को सम्मानित करना था।

जैनाचार्य श्री 108 विमल सागर जी ने प्रधानमंत्री को सम्मानित करते हुए कहा, “प्रधानमंत्री मोदी न केवल भारतवर्ष के राजनेता हैं, बल्कि वे भारतीय संस्कृति के संवाहक हैं। उन्होंने धर्म को केवल उपासना नहीं, बल्कि कर्तव्य और सेवा का माध्यम बनाया है।”

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की आत्मा उसकी धार्मिक विविधता और आध्यात्मिक परंपराओं में निहित है। उन्होंने यह भी कहा कि जैन धर्म की शिक्षाएं – अहिंसा, अपरिग्रह और अनेकांतवाद – आज के युग में अधिक प्रासंगिक हो गई हैं।

आचार्य श्री 108 विद्यानंद जी महाराज की स्मृति में यह शताब्दी समारोह एक सांस्कृतिक-आध्यात्मिक संगम बन गया, जहाँ धर्म, दर्शन और राष्ट्रधर्म की त्रिवेणी बहती दिखाई दी। कार्यक्रम में आयोजित संगोष्ठियों, प्रदर्शनी और भक्ति संगीत के माध्यम से आचार्य श्री के जीवन-दर्शन और उनके योगदान को जनमानस तक पहुँचाया गया। जैनाचार्यों ने मोदी के नेतृत्व की नीतिगत नैतिकता की सराहना की।


यह आयोजन यह दर्शाता है कि भारत में धर्म और राजनीति के बीच एक संतुलित, राष्ट्रोन्मुख संवाद की परंपरा अब भी जीवित है, जहाँ आध्यात्मिक मूल्यों को सार्वजनिक जीवन में सम्मानपूर्वक स्थान दिया जाता है।

स्रोत: organiser.org

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