उत्तर प्रदेश के नोएडा में न्यूनतम मजदूरी, ओवरटाइम भुगतान और श्रम कानूनों की मांग पर मजदूरों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन 12 अप्रैल से शुरू हुआ, लेकिन 13 अप्रैल को नकाबपोश उपद्रवियों ने इसे हिंसक बना दिया। हरियाणा के वेतन वृद्धि फैसले से प्रेरित यह आंदोलन सेक्टर 63, 65, 70, 80 और 84 में फैला। पुलिस ने व्हाट्सएप चैट्स और ऑडियो बरामद किए, जहां “मिर्च पाउडर ज्यादा लाओ”, “पुलिस पर हमला करो” जैसे निर्देश थे।
सरकार ने हाई पावर कमिटी के आधार पर न्यूनतम मजदूरी में 1000-3000 रुपये (21% तक) बढ़ोतरी का ऐलान किया, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू हुआ। अधिकांश मांगें मान ली गईं, फिर भी 150 से ज्यादा गाड़ियां जलीं, पथराव हुए, पुलिस पर हमले हुए। नकाबपोशों ने सीसीटीवी तोड़े। 90 हिरासत में, 200 की पहचान।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने मुजफ्फरनगर में कहा, “कुछ लोग शांति रोकने के लिए षड्यंत्र रच रहे हैं। देश में लगभग खत्म हो चुका नक्सलवाद फिर जिंदा करने की कोशिश हो रही है। कानून हाथ में लेने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी।” उन्होंने मजदूरों को आश्वासन दिया कि डबल इंजन सरकार उनके हित सुरक्षित रखेगी और कमेटी समाधान निकालेगी। पुलिस जांच में पाकिस्तान संबंध, नक्सल पुनरुद्धार और बॉट खातों का पता चला।
मजदूरों की आड़ में उपद्रवी शहर जला रहे थे। जिलाधिकारी मेधा रूपम ने शांति अपील की। हालात नियंत्रण में हैं, जांच जारी। यह घटना श्रम अधिकारों के साथ नक्सल खतरों पर सवाल उठाती है। मजदूरों को हक मिला, हिंसा ने आंदोलन बदनाम किया।