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देहरादून में बिहार से 40+ बच्चों का मदरसा कांड: जनसंख्या परिवर्तन की साजिश या शिक्षा का बहाना?

16 अप्रैल 2026 को उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में एक विवादास्पद घटना सामने आई जब बिहार से एक मुस्लिम व्यक्ति 40 से अधिक नाबालिग बच्चों को लेकर स्थानीय मदरसे में दाखिले के लिए पहुंचा। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने इस व्यक्ति को पकड़ लिया और सवाल उठाया कि बिहार में मदरसे कम पड़ गए हैं या यह उत्तराखंड की जनसांख्यिकी को बदलने की सुनियोजित साजिश है। सोशल मीडिया पोस्ट्स के अनुसार ये बच्चे केवल कुरान और जन्नत की शिक्षा ले रहे हैं – न विज्ञान, न गणित, न आधुनिक शिक्षा का कोई अंश। यह घटना उत्तराखंड सरकार की हालिया मदरसा सुधार नीतियों के बीच आई है, जहां 1 जुलाई 2026 से मदरसा शिक्षा बोर्ड समाप्त हो रहा है और अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण गठित किया जा रहा है ताकि मदरसों को मुख्यधारा से जोड़ा जा सके। बजरंग दल ने इसे ‘लव जिहाद’ और ‘पॉपुलेशन जिहाद’ का हिस्सा बताते हुए स्थानीय प्रशासन से कार्रवाई की मांग की।
घटना का पूरा विवरण सोशल मीडिया और स्थानीय रिपोर्ट्स से मिलता है। बिहार का यह व्यक्ति पहले भी 40-50 बच्चों की खेप देहरादून ला चुका था, और अब दूसरी खेप में 40 और बच्चे लाया। बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने मदरसे के बाहर धरना दिया और प्रशासन को सूचित किया। उन्होंने सवाल किया कि ये बच्चे इतने कम उम्र में दूसरे राज्य क्यों लाए जा रहे हैं, और उनकी शिक्षा केवल धार्मिक ग्रंथों तक सीमित क्यों है। उत्तराखंड में पहले से ही मदरसों पर सवाल उठ रहे हैं – 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार 54 मान्यता प्राप्त मदरसों में से 30 पूरी तरह छात्रविहीन हैं, और केवल 9 ही न्यूनतम छात्र मानकों को पूरा कर पा रहे हैं। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि मुंशी-मौलवी स्तर पर कम से कम 30 छात्र और उच्च कक्षाओं में 10 छात्र अनिवार्य हैं, अन्यथा मान्यता रद्द होगी।
इस मामले ने उत्तराखंड की जनसांख्यिकी पर बहस छेड़ दी। देहरादून में पहले भी मदरसा विवाद हुए हैं, जैसे आईएमए के पास शेखुल हिंद एजुकेशन ट्रस्ट द्वारा 20 एकड़ कृषि भूमि खरीदकर विशाल मदरसा या मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनाने की कोशिश, जिसके खिलाफ स्थानीय किसानों ने विरोध किया। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने रिपोर्ट मांगी थी। सरकार का नया अल्पसंख्यक शिक्षा कानून मदरसों को आधुनिक विषयों से जोड़ने का प्रयास है, लेकिन विपक्ष पूर्व सीएम हरीश रावत ने चेतावनी दी कि इससे कट्टरता बढ़ सकती है। बजरंग दल का कहना है कि बिहार जैसे राज्य से बच्चों का आयात उत्तराखंड के हिंदू बहुल चरित्र को बदलने की कोशिश है, जहां पहले से ही एमडीडीए फ्लैटों में अवैध मस्जिद-मदरसे बनाए गए थे।
पुलिस और प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। बच्चे सुरक्षित हैं, लेकिन उनके अभिभावकों की जानकारी और यात्रा दस्तावेजों की जांच हो रही है। बजरंग दल ने वीडियो वायरल कर पूरे देश में जागरूकता फैलाई। यह घटना उन रिपोर्ट्स को बल देती है जहां उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल हैं – केवल धार्मिक शिक्षा से बच्चे मुख्यधारा से कट जाते हैं। सरकार का फैसला सराहनीय है कि 1 जुलाई से बोर्ड समाप्त होकर नया प्राधिकरण बनेगा, जो विज्ञान-गणित जैसे विषय अनिवार्य करेगा। विपक्ष को चिंता है लेकिन तथ्य बताते हैं कि गिरावट असली समस्या है।
यह विवाद उत्तराखंड की पहचान की रक्षा का सवाल है। बजरंग दल की सतर्कता ने समय रहते रोक लगाई। जांच पूरी होने पर सच सामने आएगा, लेकिन सवाल वैध हैं – बिहार में मदरसे क्यों नहीं, देहरादून क्यों?

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