भारतीय खुफिया एजेंसियों की बड़ी कामयाबी, डी-कंपनी के सिंथेटिक ड्रग नेटवर्क की रीढ़ माने जाने वाले सलीम इस्माइल डोला को तुर्की से लाया गया भारत
#WATCH | Delhi: Close aide of Dawood Ibrahim, Salim Dola, brought to Narcotics Control Bureau (NCB) Headquarters. He was recently apprehended in Istanbul and has now been deported to India. https://t.co/I1y4sZcMQk pic.twitter.com/o5nis69US4
— ANI (@ANI) April 28, 2026
नई दिल्ली/मुंबई/इस्तांबुल। भारत की खुफिया और जांच एजेंसियों के लिए मंगलवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ। अंतरराष्ट्रीय अपराध जगत के सबसे बड़े नामों में से एक, अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के सबसे करीबी सहयोगी और डी-कंपनी के अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क की रीढ़ माने जाने वाले सलीम इस्माइल डोला को आखिरकार भारत लाया गया। तुर्की के इस्तांबुल शहर में पकड़े जाने के कुछ ही दिनों बाद उसे डिपोर्ट करके मंगलवार सुबह दिल्ली के एक तकनीकी हवाई अड्डे पर एक विशेष विमान से उतारा गया। यह कार्रवाई भारतीय खुफिया एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के बीच महीनों चले समन्वित ऑपरेशन का परिणाम बताई जा रही है।
खुफिया एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार, सलीम डोला को विमान से उतरते ही केंद्रीय खुफिया अधिकारियों की हिरासत में ले लिया गया और उसकी प्रारंभिक पूछताछ शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक पूछताछ के बाद उसे मुंबई पुलिस को सौंपे जाने की पूरी तैयारी कर ली गई है, जहां उसके खिलाफ कई संगीन मामलों में पूछताछ और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। माना जा रहा है कि नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) भी उसकी कस्टडी की मांग कर सकती है, क्योंकि उसके खिलाफ कई राज्यों में दर्ज मामलों की जांच में राष्ट्रीय स्तर के हस्तक्षेप की आवश्यकता होगी।
इस्तांबुल के बेलिकदुजु में हुआ था ड्रामाई गिरफ्तारी का ऑपरेशन
सलीम डोला की गिरफ्तारी की कहानी किसी हॉलीवुड थ्रिलर से कम नहीं है। तुर्की के इस्तांबुल शहर के पश्चिमी इलाके बेलिकदुजु (Beylikdüzü) में 25 अप्रैल 2026 को इस्तांबुल पुलिस विभाग के नार्कोटिक्स क्राइम डिवीजन ने एक हाई-प्रोफाइल छापेमारी की। यह बेलिकदुजु इलाका मध्यम वर्ग के निवासियों और प्रवासियों के बीच काफी लोकप्रिय है, और सलीम डोला यहां पिछले कई महीनों से एक संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के नागरिक की फर्जी पहचान के साथ छिपकर रह रहा था।
तुर्की पुलिस ने बताया कि भारतीय एजेंसियों से मिले इनपुट के आधार पर लंबे समय तक तकनीकी और भौतिक निगरानी (सर्विलांस) की गई। इस निगरानी से सुरक्षा टीमों को संदिग्ध के सटीक ठिकाने की पुष्टि हुई। इसके बाद चिन्हित पते पर एक ऑपरेशन को अंजाम दिया गया, जहां डोला को सफलतापूर्वक पकड़ लिया गया। तुर्की के नेशनल इंटेलिजेंस ऑर्गनाइजेशन (एमआईटी) ने भी इस ऑपरेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गिरफ्तारी के बाद इस्तांबुल पुलिस विभाग ने सभी आवश्यक स्टेशन प्रक्रियाएं पूरी कीं और फिर उसे भारत डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
यह उल्लेखनीय है कि सलीम डोला के खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस पहले से जारी था, जिसमें उस पर भारत के नार्कोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट, 1985 के तहत कई गंभीर आरोप दर्ज हैं। इसी नोटिस के आधार पर तुर्की के अधिकारियों ने त्वरित कार्रवाई की और बिना किसी देरी के डिपोर्टेशन की प्रक्रिया पूरी की। यह बात विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत और तुर्की के बीच अभी तक कोई औपचारिक प्रत्यर्पण संधि (एक्सट्रेडिशन ट्रीटी) नहीं है, फिर भी इंटरपोल के माध्यम से यह कार्रवाई संभव हो सकी।
कौन है सलीम डोला: मुंबई की गलियों से अंतरराष्ट्रीय ड्रग किंगपिन तक का सफर
सलीम इस्माइल डोला, उम्र लगभग 60 वर्ष, की कहानी मुंबई की भीड़भाड़ भरी गलियों से शुरू होती है। उसका जन्म और शुरुआती जीवन मुंबई के मजदूर वर्ग के मोहल्ले कॉटन ग्रीन में बीता। 1980 के दशक में डोला ने डोंगरी का रुख किया, जो उस समय दाऊद इब्राहिम के डी-कंपनी का गढ़ माना जाता था। यहीं से उसने अंडरवर्ल्ड में अपना स्थान बनाना शुरू किया।
डोंगरी में अपने शुरुआती सालों में डोला ने नशीले पदार्थों की तस्करी में अपनी पैठ बनाई। धीरे-धीरे उसकी पकड़ इतनी मजबूत होती गई कि वह डी-कंपनी के ड्रग ऑपरेशन का प्रमुख चेहरा बन गया। भारतीय जांच एजेंसियों के अनुसार, डोला ने वही भूमिका निभाई जो कभी इकबाल मिर्ची ने डी-कंपनी में निभाई थी। इकबाल मिर्ची को दाऊद इब्राहिम का “ड्रग ऑपरेशन हेड” कहा जाता था, और उसकी मृत्यु के बाद डोला ने उसी जगह को भर दिया।
डोला का मुख्य ध्यान मेफेड्रोन (एमडी) नामक सिंथेटिक स्टिमुलेंट पर रहा, जिसे आम भाषा में “म्याऊं म्याऊं” या “एमडी” कहा जाता है। यह नशीला पदार्थ भारत की गुप्त प्रयोगशालाओं में आयातित प्रीकर्सर रसायनों का इस्तेमाल करके बनाया जाता था। डोला ने अपना नेटवर्क इस तरह से बुना कि उसके ड्रग्स महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश तक फैल गए। एजेंसियों के अनुमान के अनुसार, यह नेटवर्क सालाना हजारों करोड़ रुपये का कारोबार करता था।
डोला के नेटवर्क की सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि उसने दक्षिण अफ्रीकी और मेक्सिकन ड्रग कार्टेल के साथ भी अंतरराष्ट्रीय संबंध स्थापित कर लिए थे। इन अंतरराष्ट्रीय कनेक्शनों के जरिए वह न केवल भारत में बल्कि कई देशों में नशीले पदार्थों की आपूर्ति करता था। इस अवैध व्यापार से प्राप्त धन को हवाला के माध्यम से लॉन्डर किया जाता था और फिर रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में निवेश किया जाता था।
Union Home Minister Amit Shah tweets, "The Narcotics Control Bureau today made a major breakthrough in securing the return of notorious drug trafficker Mohammad Salim Dola from Turkiye. Under Modi govt's mission to ruthlessly smash drug cartels, our anti-narcotics agencies have… pic.twitter.com/qHbjNtgLLY
— ANI (@ANI) April 28, 2026
अपराध का लंबा सिलसिला: 1998 से 2026 तक
सलीम डोला का कानून से पहला बड़ा सामना 1998 में हुआ था, जब उसे मुंबई के सहार हवाई अड्डे (अब छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा) पर 40 किलोग्राम मैंड्रैक्स गोलियों की तस्करी करते हुए गिरफ्तार किया गया था। अदालती दस्तावेजों के अनुसार, डोला और उसके साथियों ने एयरपोर्ट के अंदरूनी लोगों की मदद से सुरक्षा को बाईपास करने की कोशिश की थी, लेकिन खुफिया जानकारी मिलने पर एयरपोर्ट अधिकारियों ने उसे पकड़ लिया था। इस मामले में उसे सजा भी मिली थी।
लेकिन सजा काटने के बाद डोला और भी बड़े ऑपरेशनों के साथ वापस आया। साल 2017 में, राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने उसे गुजरात के पीपावाव बंदरगाह से 5.5 करोड़ रुपये की गुटखा तस्करी के मामले में गिरफ्तार किया था। एक साल बाद, 2018 में, मुंबई हवाई अड्डे के पास वकोला सांताक्रूज़ ईस्ट से 1,000 करोड़ रुपये की फेंटानिल जब्ती के मामले में डोला का नाम सामने आया। यह उस समय भारत में सिंथेटिक ड्रग की सबसे बड़ी जब्ती में से एक थी।
इस मामले के बाद डोला ने भारत से भागने में सफलता पाई। पहले वह यूएई पहुंचा, जहां से उसने अपने ऑपरेशन को संचालित करना जारी रखा। बाद में, जब यूएई में भारतीय एजेंसियों का दबाव बढ़ा, तो वह तुर्की चला गया, जहां उसने एक नई पहचान के साथ अपना ठिकाना बनाया।
मुंबई पुलिस की एंटी-नार्कोटिक्स सेल ने तोड़ी डोला की कमर
सलीम डोला के खिलाफ मौजूदा कार्रवाई की शुरुआत फरवरी 2024 में हुई थी, जब मुंबई क्राइम ब्रांच को कुर्ला इलाके में एक महिला द्वारा ड्रग्स की आपूर्ति की सूचना मिली थी। 16 फरवरी 2024 को मिली इस सूचना के आधार पर पुलिस ने परवीन बानो गुलाम शेख को गिरफ्तार किया, जिसके पास से 641 ग्राम मेफेड्रोन (कीमत 12.20 लाख रुपये) और 12 लाख रुपये नकद बरामद किए गए।
पूछताछ में परवीन ने स्वीकार किया कि उसे ड्रग्स दुबई से सलीम शेख और सलीम डोला के नेटवर्क के माध्यम से मिलते थे, और स्थानीय आपूर्तिकर्ता मीरा रोड का रहने वाला साजिद मोहम्मद आसिफ शेख उर्फ डैब्ज़ था। इस सुराग के आधार पर पुलिस ने साजिद को गिरफ्तार किया, जिसके घर से 3 किलोग्राम एमडी ड्रग्स (कीमत 6 करोड़ रुपये) और 3.68 लाख रुपये नकद बरामद हुए।
जांच आगे बढ़ी और पुलिस को सांगली में एक बड़ी मेफेड्रोन उत्पादन इकाई का पता चला। 25 मार्च 2024 को मुंबई क्राइम ब्रांच ने सांगली की इस फैक्ट्री पर छापा मारा और 122.5 किलोग्राम मेफेड्रोन (कीमत 245 करोड़ रुपये) के साथ-साथ कच्चा माल, मशीनरी, वाहन भी बरामद किए। इस छापेमारी में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया।
मुंबई पुलिस की एंटी-नार्कोटिक्स सेल की बारीक जांच ने पाया कि यह नेटवर्क सूरत, यूएई और अंत में तुर्की तक फैला हुआ था। जांच के अनुसार, कच्चे रसायन यूएई-स्थित एक केमिकल कंपनी के माध्यम से आपूर्ति किए जाते थे। 2025 के अंत तक, एक दर्जन से अधिक गिरफ्तारियों ने नेटवर्क के कई हिस्सों को नष्ट कर दिया, लेकिन डोला तब तक अप्रैल 2026 के तुर्की ऑपरेशन तक मायावी बना रहा।
परिवार पर भी कसा शिकंजा: बेटा और भतीजा पहले ही डिपोर्ट
सलीम डोला के नेटवर्क पर शिकंजा कसते हुए भारतीय एजेंसियों ने उसके परिवार के सदस्यों पर भी ध्यान केंद्रित किया। डोला के बेटे ताहेर डोला और भतीजे मुस्तफा मोहम्मद कुब्बावाला को यूएई में ट्रैक किया गया, और भारतीय एजेंसियों ने 2025 के मध्य में उन्हें भारत डिपोर्ट कराने में सफलता पाई।
इन दोनों की पूछताछ से एजेंसियों को महत्वपूर्ण जानकारी मिली, जिसने आगे के ऑपरेशन की रूपरेखा तैयार करने में मदद की। डोला के एक और करीबी सहयोगी मोहम्मद सलीम सुहैल शेख को भी अक्टूबर 2025 में दुबई से डिपोर्ट करके मुंबई लाया गया था। शेख को भी सलीम डोला के साथ-साथ विदेश से ड्रग ऑपरेशन के समन्वय के लिए जाना जाता था। उसे 22 अक्टूबर 2025 को मुंबई क्राइम ब्रांच ने औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया और कोर्ट में पेश किया, जहां उसे 30 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।
मुंबई क्राइम ब्रांच की इस पूरी जांच में अब तक 15 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जिनमें एक महिला भी शामिल है। कुल मिलाकर 256.49 करोड़ रुपये की संपत्ति और प्रतिबंधित सामग्री जब्त की जा चुकी है। जब्त सामान में 126 किलोग्राम से अधिक मेफेड्रोन (कीमत 252 करोड़ रुपये से अधिक), 4.19 करोड़ रुपये नकद, 1.5 लाख रुपये का सोना, 11.4 लाख रुपये के वाहन, और 55.5 लाख रुपये की अवैध संपत्ति शामिल है।
इंटरपोल रेड नोटिस और कानूनी प्रक्रिया
सलीम डोला के खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी होना उसकी गिरफ्तारी में निर्णायक साबित हुआ। यह नोटिस उसे एनडीपीएस एक्ट, 1985 के तहत भारत में मांगा जा रहा था। इस कानून के अंतर्गत बड़े पैमाने पर ड्रग तस्करी के लिए न्यूनतम 10 साल की कैद की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा, जब वाणिज्यिक मात्रा में नशीले पदार्थ बरामद होते हैं, तो जमानत मिलना भी बेहद कठिन हो जाता है।
भारतीय अधिकारियों के अनुसार, अब डोला पर एनडीपीएस एक्ट के अलावा कई अन्य अधिनियमों के तहत भी आरोप लगाए जाएंगे। इसमें मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), संगठित अपराध को नियंत्रित करने वाला महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट (मकोका) और अन्य संबंधित कानूनों के प्रावधान शामिल हो सकते हैं।
प्रत्यर्पण नहीं बल्कि डिपोर्टेशन: यह भी ध्यान देने योग्य है कि सलीम डोला को भारत प्रत्यर्पण के माध्यम से नहीं, बल्कि डिपोर्टेशन के माध्यम से लाया गया है। प्रत्यर्पण एक औपचारिक कानूनी प्रक्रिया है, जिसके लिए दोनों देशों के बीच संधि होनी आवश्यक है। चूंकि भारत और तुर्की के बीच कोई प्रत्यर्पण संधि नहीं है, इसलिए तुर्की ने उसे फर्जी पहचान और दस्तावेजों के आधार पर डिपोर्ट करने का रास्ता चुना। यह भारत के लिए राजनयिक स्तर पर भी एक बड़ी जीत है।
डी-कंपनी के लिए बड़ा झटका, सिंथेटिक ड्रग्स की ओर शिफ्ट का खुलासा
सलीम डोला की गिरफ्तारी और भारत डिपोर्टेशन को दाऊद इब्राहिम की डी-कंपनी के लिए सबसे बड़े झटकों में से एक माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में डी-कंपनी ने पारंपरिक नशीले पदार्थों जैसे हेरोइन और हशीश से हटकर सिंथेटिक ड्रग्स, खासकर मेफेड्रोन और फेंटानिल, की ओर रुख किया था। इन सिंथेटिक ड्रग्स में मुनाफा कई गुना अधिक होता है, और इन्हें छिपी हुई प्रयोगशालाओं में आसानी से बनाया जा सकता है।
सलीम डोला इसी सिंथेटिक ड्रग शिफ्ट का मास्टरमाइंड था। उसके पास तकनीकी समझ थी कि कैसे चीन और अन्य देशों से प्रीकर्सर रसायन मंगवाए जाएं और उन्हें भारत में मेफेड्रोन में बदला जाए। उसकी गिरफ्तारी से न केवल डी-कंपनी का यह नया व्यापार मॉडल टूटेगा, बल्कि उन सभी अंतरराष्ट्रीय कार्टेलों को भी संदेश जाएगा जो भारत के बाजार पर नज़र रखे हुए हैं।
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, “डोला की गिरफ्तारी संगठित अपराध में एक महत्वपूर्ण कड़ी को तोड़ती है, और यह संकेत देती है कि लंबे समय से फरार अपराधी अब तेजी से पकड़ में आ रहे हैं। भारत के सिंथेटिक ड्रग नेटवर्क के खिलाफ लड़ाई जारी है।”
भारत-तुर्की सहयोग का नया अध्याय
सलीम डोला की डिपोर्टेशन भारत और तुर्की के बीच सुरक्षा सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत भी मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों में राजनयिक संबंधों में कई उतार-चढ़ाव देखे गए हैं, खासकर कश्मीर के मुद्दे पर तुर्की के रुख को लेकर। लेकिन संगठित अपराध और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ता दिखाई दे रहा है।
बेलिकदुजु में हुई यह कार्रवाई भारत-तुर्की के बीच बढ़ते सुरक्षा सहयोग का प्रमाण है। तुर्की के नेशनल इंटेलिजेंस ऑर्गनाइजेशन (एमआईटी) ने भारतीय एजेंसियों के साथ मिलकर महीनों तक डोला पर निगरानी रखी और फिर सही समय पर कार्रवाई की। यह सहयोग भविष्य में दूसरे फरार अपराधियों को पकड़ने के लिए भी एक मॉडल साबित हो सकता है।
मुंबई पुलिस की तैयारी और आगे की कार्रवाई
दिल्ली में प्रारंभिक पूछताछ के बाद सलीम डोला को मुंबई पुलिस को सौंपे जाने की पूरी तैयारी कर ली गई है। मुंबई पुलिस की एंटी-नार्कोटिक्स सेल और क्राइम ब्रांच पहले से ही उसके खिलाफ केस तैयार कर चुकी है। कोर्ट में पेश किए जाने पर उसकी पुलिस हिरासत मांगी जाएगी, और लंबी पूछताछ के दौरान उसके पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने की कोशिश की जाएगी।
विशेष सूत्रों के अनुसार, डोला से पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं। पहली बात, दाऊद इब्राहिम के मौजूदा ठिकाने और उसकी गतिविधियों के बारे में जानकारी। दूसरी बात, डी-कंपनी के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी। तीसरी बात, हवाला नेटवर्क और मनी लॉन्ड्रिंग के तरीकों के बारे में जानकारी। चौथी बात, यूएई, तुर्की और अन्य देशों में छिपे फरार अपराधियों के ठिकानों के बारे में जानकारी।
इसके अलावा, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी उसके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में स्वतंत्र जांच शुरू कर सकता है। एनसीबी भी अपनी अलग जांच चलाएगा। इस तरह डोला से कई एजेंसियां अलग-अलग पहलुओं पर पूछताछ करेंगी।
दाऊद इब्राहिम पर शिकंजे की राह में बड़ा कदम
सलीम डोला की गिरफ्तारी को दाऊद इब्राहिम पर शिकंजा कसने की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। दाऊद इब्राहिम 1993 के मुंबई बम धमाकों का मास्टरमाइंड है, जिसमें 257 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक घायल हुए थे। वह भारत के मोस्ट वांटेड अपराधियों की सूची में सबसे ऊपर है, और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) द्वारा भी एक वैश्विक आतंकवादी के रूप में नामित है।
दाऊद इब्राहिम कथित तौर पर पाकिस्तान के कराची में छिपा हुआ है, हालांकि पाकिस्तान सरकार लगातार इसे नकारती रही है। उसके खिलाफ सीधी कार्रवाई करना मुश्किल रहा है, इसलिए भारतीय एजेंसियों ने उसके सहयोगियों और नेटवर्क पर शिकंजा कसने की रणनीति अपनाई है। इसी रणनीति के तहत पिछले कुछ वर्षों में डी-कंपनी के कई अहम सदस्यों को विभिन्न देशों से डिपोर्ट करवाया गया है।
इकबाल मिर्ची के बाद डी-कंपनी के ड्रग ऑपरेशन को संभालने वाला सलीम डोला उन कुछ प्रमुख सदस्यों में से एक था जो लंबे समय तक भारत की पकड़ से दूर रहे। उसकी गिरफ्तारी से न केवल डी-कंपनी की अंदरूनी कार्यप्रणाली के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है, बल्कि दाऊद इब्राहिम के खिलाफ नए सबूत भी हाथ लग सकते हैं।
भारत में मेफेड्रोन की महामारी और इसका सामाजिक प्रभाव
सलीम डोला के मामले ने भारत में मेफेड्रोन (“एमडी” या “म्याऊं म्याऊं”) की बढ़ती समस्या को भी सामने ला दिया है। यह सिंथेटिक ड्रग पिछले कुछ वर्षों में भारत के युवाओं में तेजी से लोकप्रिय हुआ है, खासकर महानगरों के पार्टी सर्किट में। इसकी आसान उपलब्धता और कोकीन की तुलना में सस्ता होना इसकी लोकप्रियता का मुख्य कारण है।
मेफेड्रोन के सेवन से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ते हैं। इसमें हृदय रोग, मानसिक विकार, और लंबे समय तक उपयोग पर मस्तिष्क को क्षति शामिल है। डोला जैसे ड्रग किंगपिन के नेटवर्क ने इस समस्या को लाखों युवाओं तक पहुंचाया है, और इसके सामाजिक नुकसान को मापना मुश्किल है।
महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में मेफेड्रोन के मामले लगातार बढ़े हैं। पुलिस और एनसीबी की रिपोर्टों के अनुसार, हाल के वर्षों में सिंथेटिक ड्रग्स की जब्ती में कई गुना वृद्धि हुई है। डोला की गिरफ्तारी से इन राज्यों में मेफेड्रोन की आपूर्ति श्रृंखला पर भी असर पड़ने की उम्मीद है।
आगे क्या? सलीम डोला के सामने कानूनी चुनौतियां
अब जब सलीम डोला भारत में है, तो उसके सामने कई संगीन कानूनी चुनौतियां खड़ी हैं। सबसे पहले, उसे एनडीपीएस एक्ट के तहत मुंबई की एक विशेष अदालत में पेश किया जाएगा। इस कानून के तहत वाणिज्यिक मात्रा में ड्रग्स के मामले में जमानत मिलना लगभग असंभव होता है, और अधिकतम सजा आजीवन कारावास तक हो सकती है।
इसके अलावा, उस पर पीएमएलए के तहत भी मामले दर्ज होंगे, क्योंकि उसने अवैध ड्रग व्यापार से प्राप्त धन को रियल एस्टेट और अन्य संपत्तियों में निवेश किया है। मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में अधिकतम 10 साल की सजा का प्रावधान है।
मकोका के तहत भी उस पर मामले दर्ज होने की संभावना है, क्योंकि उसने एक संगठित आपराधिक सिंडिकेट का नेतृत्व किया है। इस कानून के तहत भी कठोर सजा का प्रावधान है। साथ ही, उसकी संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया भी शुरू होगी।
विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) और भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत भी उस पर मुकदमा चल सकता है। कुल मिलाकर, सलीम डोला अब लंबे समय तक भारत की कानूनी प्रक्रिया से जूझता रहेगा।
निष्कर्ष: एक युग का अंत?
सलीम इस्माइल डोला की भारत डिपोर्टेशन निश्चित रूप से अंडरवर्ल्ड के एक युग के अंत का प्रतीक है। यह वही व्यक्ति है जिसने मुंबई की गलियों से शुरू करके अंतरराष्ट्रीय सिंथेटिक ड्रग साम्राज्य खड़ा किया था। उसकी गिरफ्तारी और भारत वापसी ने यह साबित कर दिया है कि चाहे कोई अपराधी कितना भी बड़ा हो, चाहे वह कहीं भी छिप जाए, अंत में उसे न्याय का सामना करना ही पड़ेगा।
यह घटना भारत की खुफिया और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की क्षमता का भी प्रमाण है। यूएई से शुरू होकर तुर्की तक फैले इस ऑपरेशन में भारत ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग का बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। इंटरपोल, तुर्की के एमआईटी, यूएई के अधिकारियों और भारत की कई एजेंसियों के बीच समन्वय ने इस ऑपरेशन को सफल बनाया।
आने वाले हफ्तों में सलीम डोला से होने वाली पूछताछ कई बड़े खुलासे कर सकती है। डी-कंपनी के और सदस्यों की गिरफ्तारी, हवाला नेटवर्क का पर्दाफाश, और संभवतः दाऊद इब्राहिम की गतिविधियों के बारे में नई जानकारी सामने आ सकती है। यह केस आने वाले समय में भारत के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में से एक होगा।
कुल मिलाकर, मंगलवार 28 अप्रैल 2026 का दिन भारत की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए ऐतिहासिक रहेगा। दाऊद इब्राहिम के साम्राज्य की एक बड़ी कड़ी अब भारत की हिरासत में है, और अब देखना यह है कि यह कड़ी टूटने पर पूरा साम्राज्य कैसे प्रभावित होता है। एक बात तो तय है – डी-कंपनी के लिए यह बेहद मुश्किल समय है, और भारत की एजेंसियां पूरी ताकत से उसके अंत के लिए काम कर रही हैं।