भारत विशेष — राष्ट्रीय सुरक्षा रिपोर्ट
राष्ट्र की आवाज़
शुक्रवार, २४ अप्रैल २०२६ | नई दिल्ली विशेष संस्करण
डोभाल-पॉवेल वार्ता : भारत-ब्रिटेन की ऐतिहासिक रणनीतिक साझेदारी को नई उड़ान — प्रौद्योगिकी, रक्षा और सुरक्षा में सहयोग का नया अध्याय
नई दिल्ली में वार्षिक भारत-ब्रिटेन रणनीतिक संवाद में NSA अजित डोभाल ने की UK के समकक्ष जोनाथन पॉवेल की मेज़बानी — सेमीकंडक्टर, AI, क्वांटम, साइबर सुरक्षा और रक्षा उद्योग पर बनी व्यापक सहमति
विशेष संवाददाता | नई दिल्ली | २३–२४ अप्रैल २०२६
नई दिल्ली में २३ अप्रैल २०२६ को भारत-ब्रिटेन संबंधों के इतिहास में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ा, जब भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार श्री अजित डोभाल ने ब्रिटेन के अपने समकक्ष जोनाथन पॉवेल की मेज़बानी की। वार्षिक भारत-ब्रिटेन रणनीतिक संवाद के अंतर्गत आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा हुई। यह वार्ता न केवल दो देशों के बीच की कूटनीतिक बैठक थी, बल्कि यह एक उभरते हुए महाशक्ति भारत और उसके पुराने साझेदार ब्रिटेन के बीच एक नए युग की शुरुआत की प्रतीक भी थी।
बैठक में प्रतिबंधित और प्रतिनिधिमंडल स्तर पर दोनों पक्षों के बीच विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। भारत के विदेश मंत्रालय ने इसे “व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम” बताया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि दोनों NSA ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने सहित व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा की और क्षेत्रीय एवं वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।
India-UK Vision 2035 : एक साझा भविष्य की रूपरेखा
दोनों NSA ने India-UK Vision 2035 दस्तावेज़ में परिकल्पित लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता को दोहराया। यह Vision दस्तावेज़ दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक द्विपक्षीय रणनीतिक सहयोग की नींव है, जिसमें प्रौद्योगिकी, रक्षा और सुरक्षा क्षेत्रों में सहयोग को विशेष प्राथमिकता दी गई है। यह वह समय है जब वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य अत्यंत उथल-पुथल भरा है — पश्चिम एशिया में संघर्ष, रूस-यूक्रेन युद्ध और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच भारत-ब्रिटेन की यह रणनीतिक साझेदारी वैश्विक स्थिरता के लिए एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभर रही है।
भारत आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और एक वैश्विक तकनीकी शक्ति के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। ऐसे में ब्रिटेन के साथ यह रणनीतिक संवाद भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को और अधिक पुष्ट करता है। यह संवाद इस बात का प्रमाण है कि भारत अब केवल एक विकासशील देश नहीं है, बल्कि विश्व की प्रमुख शक्तियाँ उसे एक अपरिहार्य रणनीतिक भागीदार के रूप में देखती हैं।
आतंकवाद और खालिस्तान : भारत का स्पष्ट और दृढ़ संदेश
इस वार्ता का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू आतंकवाद, उग्रवाद और खालिस्तानी तत्वों से संबंधित सुरक्षा चिंताओं पर गहन चर्चा था। NSA डोभाल ने इन मामलों पर ब्रिटेन सरकार के निरंतर समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि दोनों देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग को और गहरा करके इस गति को बनाए रखना आवश्यक है।
यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। ब्रिटेन में भारतीय मूल का एक बड़ा समुदाय रहता है और वहाँ खालिस्तान समर्थक तत्वों की सक्रियता भारत के लिए दीर्घकाल से एक संवेदनशील मुद्दा रही है। NSA डोभाल का यह स्पष्ट संदेश कि भारत इस मोर्चे पर किसी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं करेगा, भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति उसकी दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है। ब्रिटेन का इस विषय पर सहयोगी रुख यह सिद्ध करता है कि भारत की कूटनीति अपने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा में कितनी प्रभावशाली हो चुकी है।
India-UK Technology Security Initiative : तकनीक के मोर्चे पर क्रांतिकारी कदम
दोनों NSA ने India-UK Technology Security Initiative (TSI) के अंतर्गत हुई प्रगति की समीक्षा की। जुलाई २०२४ में लॉन्च किया गया यह TSI दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है। इसके अंतर्गत दूरसंचार, क्रिटिकल मिनरल्स और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की गई हैं। TSI की सात प्राथमिकता क्षेत्र हैं — दूरसंचार, क्रिटिकल मिनरल्स, सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी एवं स्वास्थ्य तकनीक, और उन्नत सामग्री। इन सभी क्षेत्रों में भारत-ब्रिटेन सहयोग नई ऊँचाइयों को छू रहा है।
इस वार्ता में NSA डोभाल ने विशेष संतोष व्यक्त किया कि TSI के अंतर्गत सहयोग से भुवनेश्वर, ओडिशा में Clas-SiC Wafer Fab Ltd (UK) और SiCSem Pvt. Ltd (India) द्वारा सिलिकॉन कार्बाइड आधारित कम्पाउंड सेमीकंडक्टर सुविधा की स्थापना संभव हो सकी है। यह भारत की पहली व्यावसायिक कम्पाउंड फैब इकाई होगी — एक ऐसी उपलब्धि जो भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाएगी। यह संयंत्र लगभग ₹२,००० करोड़ ($220 मिलियन) के निवेश से बन रहा है और इससे क्षेत्र में ५,००० प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। इसके अलावा दोनों पक्षों ने सेमीकंडक्टर, क्वांटम, जैव प्रौद्योगिकी और उन्नत सामग्री के क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने पर सहमति व्यक्त की।
“TSI के अंतर्गत सहयोग से सिलिकॉन कार्बाइड आधारित कम्पाउंड सेमीकंडक्टर सुविधा की भुवनेश्वर में स्थापना भारत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह भारत में पहला व्यावसायिक कम्पाउंड फैब होगा।” — NSA अजित डोभाल, वार्षिक भारत-UK रणनीतिक संवाद, नई दिल्ली
साइबर सुरक्षा : डिजिटल भारत की सुरक्षा का संकल्प
दोनों NSA ने साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में संस्थागत सहयोग को और गहरा करने पर सहमति व्यक्त की। आज के युग में साइबर युद्ध राष्ट्रीय सुरक्षा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण आयाम बन चुका है। भारत जैसा देश जो डिजिटल क्रांति की अगुवाई कर रहा है, उसके लिए साइबर सुरक्षा में मजबूती अत्यंत आवश्यक है। ब्रिटेन के GCHQ (Government Communications Headquarters) और भारत की संबंधित एजेंसियों के बीच बढ़ता सहयोग इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। भारत के Chief of Defence Staff जनरल अनिल चौहान ने भी UK अपने दौरे में साइबर, इंटेलिजेंस और अंतरिक्ष डोमेन में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया।
रक्षा सहयोग : भारत की ‘आत्मनिर्भर’ रक्षा नीति को मिला वैश्विक साझेदार
दोनों पक्षों ने स्वीकार किया कि द्विपक्षीय रक्षा सहयोग ने अच्छी गति पकड़ी है और India-UK Defence Industrial Roadmap के समग्र ढाँचे के अंतर्गत रक्षा औद्योगिक सहयोग को और गहरा करना महत्वपूर्ण है। NSA डोभाल ने UK के OEM (Original Equipment Manufacturers) के लिए भारतीय रक्षा उद्योग के साथ भागीदारी करने और रक्षा आपूर्ति श्रृंखलाओं में सहयोग बढ़ाने के अवसरों को रेखांकित किया। यह भारत के “आत्मनिर्भर भारत” अभियान की वैश्विक स्तर पर सफलता का प्रमाण है।
Aero India 2025 में UK और भारत के बीच कई महत्वपूर्ण रक्षा समझौते हुए, जिनमें Defence Partnership-India (DP-I) का औपचारिक शुभारम्भ और Thales (UK) और भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL) के बीच Laser Beam Riding MANPADs अनुबंध शामिल हैं। इस बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा के महत्व पर भी विशेष बल दिया गया। दोनों पक्षों ने समुद्री रक्षा प्रौद्योगिकियों में नवाचार पर मिलकर काम करने की सहमति जताई। यह भारत की भू-राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि हिंद महासागर भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं के केंद्र में है।
CDS जनरल अनिल चौहान : लंदन में भारत की रक्षा शक्ति का प्रदर्शन
इस रणनीतिक संवाद के समानांतर, भारत के Chief of Defence Staff (CDS) जनरल अनिल चौहान ने भी UK का दौरा किया। उन्होंने UK के CDS से मुलाकात की और साइबर, इंटेलिजेंस और अंतरिक्ष डोमेन में सहयोग बढ़ाने पर बात की। जनरल चौहान ने UK के रक्षा उद्योग के नेताओं से भी मुलाकात की और इस बात पर जोर दिया कि बढ़ता आर्थिक एकीकरण रक्षा विनिर्माण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और आपूर्ति श्रृंखला लचीलेपन में आसान सहयोग सुनिश्चित करेगा।
उन्होंने Royal College of Defence Studies (RCDS) के Commandant और संकाय के साथ भी बातचीत की और विकसित होते वैश्विक सुरक्षा परिवेश, इसकी अंतर्निहित प्रवृत्तियों और उनके रणनीतिक प्रभाव पर चर्चा की। यह भारतीय सेना की बौद्धिक क्षमता और वैश्विक दृष्टि का प्रमाण है। जनरल चौहान ने UK के MoS for Indo-Pacific सीमा मल्होत्रा से भी मुलाकात की।
वैश्विक शांति के पक्षधर : डोभाल का कूटनीति का आह्वान
दोनों NSA ने क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर गहन विचार-विमर्श किया। पश्चिम एशिया के संघर्ष और समुद्री सुरक्षा तथा व्यापार मार्गों पर उसके प्रभाव पर भी चर्चा हुई। इस संदर्भ में NSA डोभाल ने स्पष्ट कहा कि संघर्ष को सुलझाने का एकमात्र रास्ता संवाद और कूटनीति है। भारत की यह स्थिति उसकी उस सनातन परंपरा के अनुरूप है जो हमेशा से “शांति और सद्भाव” को सर्वोच्च प्राथमिकता देती आई है। दोनों पक्षों ने रूस-यूक्रेन संघर्ष पर भी चर्चा की और इस मुद्दे पर संपर्क में बने रहने की सहमति जताई।
“संघर्ष को सुलझाने का एकमात्र रास्ता संवाद और कूटनीति है।” — NSA अजित डोभाल, India-UK Strategic Dialogue, नई दिल्ली, २३ अप्रैल २०२६
विदेश मंत्री जयशंकर और जोनाथन पॉवेल की मुलाकात
NSA स्तरीय वार्ता से पहले ब्रिटेन के NSA जोनाथन पॉवेल ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से भी मुलाकात की। इस मुलाकात में क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा मुद्दों और द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। डॉ. जयशंकर की कूटनीतिक तेजस्विता और भारत के हितों को वैश्विक मंच पर मजबूती से रखने की उनकी क्षमता विश्वविख्यात है। इस मुलाकात ने भारत-ब्रिटेन संबंधों की बहुआयामी प्रकृति को और अधिक स्पष्ट किया।
भारत की बढ़ती वैश्विक शक्ति का प्रमाण
यह पूरी वार्ता एक बड़ी कहानी कहती है — भारत अब वह देश नहीं रहा जो अपनी नीतियों के लिए बाहरी स्वीकृति का इंतजार करे। आज भारत वह देश है जो अपनी शर्तों पर वैश्विक साझेदारी करता है, अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करता है और विश्व की शांति व स्थिरता में सक्रिय योगदान देता है। ब्रिटेन का भारत के साथ इतने व्यापक और गहरे स्तर पर रणनीतिक संवाद करना यह दर्शाता है कि भारत का वैश्विक कद अब एक नई ऊँचाई पर है।
भारत-ब्रिटेन Comprehensive Strategic Partnership के अंतर्गत प्रौद्योगिकी, रक्षा, सुरक्षा और वैश्विक कूटनीति के क्षेत्रों में जो बहुआयामी सहयोग हो रहा है, वह भारत की उस महत्वाकांक्षा को साकार करने में सहायक है जो विश्व में शांति, समृद्धि और न्याय के लिए प्रयासरत है। भुवनेश्वर में सेमीकंडक्टर फैब हो, AI में संयुक्त केंद्र हो, क्वांटम प्रौद्योगिकी में सहयोग हो या रक्षा आपूर्ति श्रृंखलाओं में एकीकरण — हर मोर्चे पर भारत आगे बढ़ रहा है।
निष्कर्ष : एक नए भारत की विश्व-यात्रा
NSA अजित डोभाल की यह बैठक केवल एक कूटनीतिक संवाद नहीं थी। यह उस नए भारत का प्रकटीकरण था जो विश्व की सर्वश्रेष्ठ प्रौद्योगिकियों को अपनी धरती पर लाने में सक्षम है, जो आतंकवाद के विरुद्ध अपनी लड़ाई में वैश्विक समर्थन जुटाने में समर्थ है, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा का एक जिम्मेदार ध्वजवाहक है और जो वैश्विक संघर्षों को संवाद व कूटनीति से सुलझाने का पक्षधर है।
भारत की यह यात्रा केवल शुरू हुई है। India-UK Vision 2035 के लक्ष्य, Technology Security Initiative की सात प्राथमिकताएँ और Defence Industrial Roadmap के वादे — ये सब मिलकर एक ऐसे भारत का निर्माण कर रहे हैं जो आने वाले दशकों में विश्व की एक अपरिहार्य शक्ति होगी। NSA डोभाल के नेतृत्व में भारत की यह रणनीतिक कूटनीति देश को नई ऊँचाइयों पर ले जा रही है — और विश्व देख रहा है, सुन रहा है और स्वीकार कर रहा है।