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गंधीनगर संबोधन: अजित डोभाल का राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रेरक उद्बोधन

राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू) के पांचवें दीक्षांत समारोह में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल ने भारत में व्याप्त नई जागरूकता पर जोर दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा, “इतिहास में लंबे समय बाद हम देख रहे हैं कि भारत में एक नया जागरण आ गया है। राष्ट्रीय सुरक्षा सारे देश का दायित्व है। यह केवल सेना, पुलिस या खुफिया एजेंसियों का कार्य नहीं, बल्कि सबका सामूहिक बल है। आप सबकी सामूहिक शक्ति ही मिलकर राष्ट्रीय मनोबल बनाती है।”
डोभाल ने राष्ट्रीय शक्ति को जटिल और बहुआयामी बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की ताकत में सैन्य क्षमता, तकनीकी श्रेष्ठता, संपदा, प्राकृतिक संसाधन, कूटनीतिक प्रभाव और मानव पूंजी शामिल हैं, लेकिन सबसे बड़ी भूल लोगों के मनोबल और आंतरिक शक्ति को नजरअंदाज करना है। उन्होंने उदाहरण दिया कि युद्धों में अक्सर जनता की इच्छाशक्ति निर्णायक साबित होती है। “राष्ट्रीय सुरक्षा में सिल्वर मेडल नहीं होता। या तो जीत होती है या हार। जीतने वाले इतिहास रचते हैं।”
स्नातकों को संबोधित करते हुए उन्होंने आधुनिक चुनौतियों जैसे साइबर खतरों, आंतरिक सुरक्षा और रणनीतिक लचीलापन पर निपुणता की आवश्यकता बताई। विश्वविद्यालय के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह भारत की सुरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में मील का पत्थर है। डोभाल ने युवाओं से अपील की कि वे जागरूक नागरिक बनें, क्योंकि राष्ट्र की अदृश्य शक्ति मनोबल ही विजय या पराजय तय करता है।
यह उद्बोधन वर्तमान भू-राजनीतिक परिवेश में प्रासंगिक है, जहां आंतरिक-बाहरी खतरे बढ़ रहे हैं। डोभाल का संदेश नागरिकों को सुरक्षा में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान करता है, जो भारत को सजग और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

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