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ईरान की ओर कोई कदम नहीं: भारतीय दूतावास ने तेहरान से दी कड़ी चेतावनी — “हवाई हो या ज़मीनी रास्ता, ईरान की यात्रा बिल्कुल न करें” — क्यों यह एडवाइज़री हर भारतीय के लिए जानना ज़रूरी है

23 अप्रैल 2026 को तेहरान स्थित भारतीय दूतावास (Embassy of India, Tehran) ने एक अत्यंत गंभीर और स्पष्ट यात्रा परामर्श (travel advisory) जारी किया है, जिसका संदेश कोई अस्पष्टता नहीं छोड़ता: “भारतीय नागरिकों को दृढ़ता से सलाह दी जाती है कि वे ईरान की यात्रा न करें, चाहे हवाई मार्ग से हो या ज़मीनी मार्ग से।”

यह एडवाइज़री कोई सामान्य “सावधानी बरतें” वाला संदेश नहीं है। यह भारत सरकार की जनवरी 2026 से जारी श्रृंखलाबद्ध चेतावनियों की ताज़ा और सबसे सख्त कड़ी है। इसके पीछे का कारण भी उतना ही गंभीर है — इस समय ईरान एक सक्रिय युद्ध क्षेत्र (active conflict zone) है, जहाँ अमेरिका-इज़रायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई और ईरान की जवाबी मिसाइल गतिविधियाँ लगातार जारी हैं।

भारतीय दूतावास ने इस एडवाइज़री में केवल यात्रा न करने की बात ही नहीं कही है, बल्कि वहाँ पहले से मौजूद भारतीय नागरिकों को तुरंत निर्दिष्ट ज़मीनी सीमा मार्गों से बाहर निकलने की भी स्पष्ट सलाह दी है। यह लेख उस एडवाइज़री की पूरी पृष्ठभूमि, उसमें निहित महत्वपूर्ण बिंदुओं, और हर भारतीय को क्या जानना चाहिए — इन सभी पहलुओं का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है।


एडवाइज़री में आखिर क्या कहा गया है?

शब्द-दर-शब्द विश्लेषण

तेहरान स्थित भारतीय दूतावास द्वारा X (पूर्व में ट्विटर) पर आधिकारिक हैंडल @India_in_Iran से 23 अप्रैल 2026 को जारी एडवाइज़री के मुख्य बिंदु:

1. मुख्य संदेश:

“भारत और ईरान के बीच कुछ उड़ानों के शुरू होने की रिपोर्टों के मद्देनज़र, और पूर्व एडवाइज़रियों के अनुक्रम में, भारतीय नागरिकों को दृढ़ता से सलाह दी जाती है कि वे ईरान की यात्रा न करें, चाहे हवाई मार्ग से हो या ज़मीनी मार्ग से।”

2. हवाई क्षेत्र की चेतावनी:

“क्षेत्रीय तनावों के कारण हवाई क्षेत्र प्रतिबंध और परिचालन अनिश्चितताएँ ईरान के लिए और ईरान से अंतरराष्ट्रीय उड़ान संचालन को प्रभावित करती रहती हैं।”

3. वहाँ मौजूद भारतीयों के लिए निर्देश:

“यह पुनः दोहराया जाता है कि ईरान में वर्तमान में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों को निर्दिष्ट ज़मीनी सीमा मार्गों के माध्यम से, कड़ाई से दूतावास के साथ समन्वय में, देश छोड़ देना चाहिए।”

एडवाइज़री की भाषा में “दृढ़ता” का अर्थ

कूटनीतिक भाषा में “strongly advised” (दृढ़ता से सलाह दी जाती है) एक अत्यंत मज़बूत शब्द है। यह नियमित “सावधानी बरतें” या “ध्यान रखें” से कई पायदान ऊपर है। ऐसी भाषा केवल तब प्रयोग होती है जब स्थिति “जीवन और मृत्यु” की हो। इसलिए हर भारतीय को इसे ज़रूर गंभीरता से लेना चाहिए।


क्यों इतनी गंभीर एडवाइज़री? — पृष्ठभूमि समझें

“2026 का ईरान युद्ध” — एक त्रासदीपूर्ण वास्तविकता

28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़रायल ने “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” (Operation Epic Fury) के तहत ईरान पर संयुक्त सैन्य कार्रवाई शुरू की। यह कार्रवाई अभूतपूर्व स्तर की थी:

  • ईरान के 31 प्रांतों में से कम से कम 26 में सैकड़ों हमले हुए
  • तेहरान, इस्फ़हान, कोम, शिराज़ — सभी प्रमुख शहर निशाने पर
  • ईरान के परमाणु ढाँचे, मिसाइल लॉन्चर्स, वायु रक्षा प्रणालियाँ व्यापक रूप से नष्ट
  • B-1 और B-2 बमवर्षक तक तैनात किए गए
  • 24 घंटे के भीतर पश्चिमी ईरान से मध्य तेहरान तक का हवाई क्षेत्र अमेरिका-इज़रायल के नियंत्रण में

ईरान की जवाबी कार्रवाई भी जारी है — मिसाइल और ड्रोन हमले खाड़ी देशों (बहरीन, कुवैत, कतर, UAE), सऊदी अरब की तेल सुविधाओं, और यहाँ तक कि तुर्की के हवाई क्षेत्र में भी प्रवेश कर चुके हैं।

हवाई क्षेत्र की वास्तविकता

28 फरवरी 2026 से ईरान का नागरिक हवाई क्षेत्र पूरी तरह बंद है। सभी प्रमुख एयरलाइंस — Lufthansa, Air France, British Airways, Emirates, Flydubai, Qatar Airways, Etihad — ईरान की सभी उड़ानें निलंबित कर चुकी हैं। यूरोप-एशिया मार्ग पर उड़ानें अब मध्य एशिया या अरब सागर के ऊपर से जा रही हैं, जिससे 2 से 5 घंटे अतिरिक्त लग रहे हैं।

तो फिर “कुछ उड़ानें शुरू” की खबर क्या है?

एडवाइज़री में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि “कुछ उड़ानों के शुरू होने की रिपोर्टों” के मद्देनज़र यह ताज़ा चेतावनी जारी की गई है। पिछले कुछ दिनों में सीमित, असामान्य उड़ान गतिविधि देखी गई है — लेकिन भारतीय दूतावास इसे सामान्य स्थिति की वापसी नहीं मानता। बल्कि यह चेतावनी है कि “कुछ उड़ानों की उपलब्धता का मतलब यह नहीं कि यात्रा सुरक्षित हो गई है।”

यह एक बेहद महत्वपूर्ण बिंदु है। कई बार यात्री यह सोचकर जोखिम उठा लेते हैं कि “अगर फ्लाइट चल रही है, तो कुछ ठीक होगा।” नहीं — भारत सरकार की एडवाइज़री स्पष्ट है: उड़ान उपलब्ध होना सुरक्षित होने की गारंटी नहीं है।


एडवाइज़रियों की पूरी समयरेखा — जनवरी 2026 से अब तक

भारत सरकार ने ईरान को लेकर जो चेतावनियाँ जारी की हैं, उनका अनुक्रम स्वयं स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है:

5 जनवरी 2026 — पहली एडवाइज़री

विदेश मंत्रालय (MEA) ने “गैर-आवश्यक यात्रा” (non-essential travel) से बचने की सलाह दी। यह शब्द तब प्रयोग होता है जब स्थिति चिंताजनक हो, लेकिन अभी आपात स्थिति न हो।

14 जनवरी 2026 — दूसरी और कड़ी एडवाइज़री

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने स्वयं ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराग़ची से फोन पर बातचीत की। उसी दिन MEA ने एक और एडवाइज़री जारी की जिसमें “अगले नोटिस तक ईरान की यात्रा से पूरी तरह बचने” की सलाह दी गई। साथ ही वहाँ मौजूद भारतीयों को “उपलब्ध साधनों से” देश छोड़ने को कहा गया।

28 फरवरी 2026 — युद्ध शुरू

अमेरिका-इज़रायल द्वारा ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले। पूरा नागरिक हवाई क्षेत्र बंद।

जून 2025 (ऐतिहासिक संदर्भ) — “12-दिन का संघर्ष”

इससे पहले जून 2025 में भी 12-दिन का इज़रायल-ईरान संघर्ष हुआ था, जिसके बाद भारत ने “ऑपरेशन सिंधु” जैसे कार्यक्रम के तहत हज़ारों भारतीयों को सुरक्षित निकाला था। तब ईरान ने भी सहयोग किया था।

16 जुलाई 2025 — अतिरिक्त चेतावनी

“गैर-आवश्यक यात्रा से बचें” की पुनरावृत्ति, जब क्षेत्रीय तनाव फिर से बढ़े।

23 अप्रैल 2026 — ताज़ा और सबसे सख्त एडवाइज़री

वर्तमान एडवाइज़री, जिसमें हर प्रकार की यात्रा पर पूर्ण रोक की सलाह दी गई है। यह अब तक की सबसे कड़ी भाषा है।

यह समयरेखा यह दर्शाती है कि भारत सरकार न तो जल्दबाज़ी कर रही है, न ढील दे रही है। हर कदम पर स्थिति का पुनर्मूल्यांकन हो रहा है, और जैसे-जैसे खतरा बढ़ा है, एडवाइज़री भी उतनी ही कड़ी होती गई है।


“ज़मीनी मार्ग” का क्या मतलब है?

एडवाइज़री का एक बेहद महत्वपूर्ण पहलू “निर्दिष्ट ज़मीनी सीमा मार्ग” (designated land border routes) का उल्लेख है। इसे समझना ज़रूरी है।

ईरान की भौगोलिक पड़ोस

ईरान की सीमाएँ निम्नलिखित देशों से लगती हैं:

  • उत्तर-पश्चिम: आर्मेनिया, अज़रबैजान
  • पश्चिम: इराक, तुर्की
  • उत्तर-पूर्व: तुर्कमेनिस्तान
  • पूर्व: अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान
  • दक्षिण: फ़ारस की खाड़ी, ओमान की खाड़ी

भारतीय नागरिकों के लिए व्यावहारिक मार्ग

मौजूदा परिस्थितियों में कौन से मार्ग सुरक्षित हैं, यह दूतावास समय-समय पर तय करता है। सामान्यतः:

1. आर्मेनिया मार्ग: तेहरान से नोर्दुज़ सीमा चौकी होते हुए आर्मेनिया की राजधानी येरेवान — जहाँ से भारतीयों को आगे की उड़ानें मिल सकती हैं।

2. तुर्कमेनिस्तान मार्ग: मशहद के रास्ते सरख्स/बाजगिरान सीमा से तुर्कमेनिस्तान।

3. पाकिस्तान मार्ग (सीमित): तफ़तान सीमा के रास्ते — लेकिन वर्तमान में ईरान-पाकिस्तान सीमा पर भी तनाव है, इसलिए यह हर स्थिति में उपयुक्त नहीं।

4. अज़रबैजान मार्ग: अस्तारा सीमा से अज़रबैजान।

5. इराक-तुर्की मार्ग: बाज़रगान सीमा के रास्ते तुर्की — लेकिन इस क्षेत्र में भी कई बार तनाव होता है।

दूतावास “कड़ाई से समन्वय में” शब्दों का प्रयोग करता है, जिसका अर्थ है — स्वयं से कोई मार्ग न चुनें; दूतावास जो बताए वही अपनाएँ। क्योंकि एक सीमा आज सुरक्षित हो सकती है, कल नहीं।


आपातकालीन संपर्क — याद रखने योग्य जानकारी

एडवाइज़री में भारतीय दूतावास ने अपनी आपातकालीन संपर्क जानकारी भी साझा की है। यदि आप या आपका कोई परिचित ईरान में है, तो ये नंबर और ईमेल तुरंत नोट कर लें:

आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर

  • +98-912-810-9115
  • +98-912-810-9109
  • +98-912-810-9102
  • +98-993-217-9359

ईमेल

cons.tehran@mea.gov.in

सोशल मीडिया

  • X (Twitter): @India_in_Iran
  • दूतावास की वेबसाइट और आधिकारिक सोशल मीडिया पर लगातार अपडेट

क्या करना चाहिए?

  1. अगर आप ईरान में हैं:
    • तुरंत दूतावास में पंजीकरण (registration) करवाएँ यदि पहले से न किया हो
    • अपने पासपोर्ट, वीज़ा, और अन्य दस्तावेज़ तुरंत उपलब्ध रखें
    • दूतावास के निर्देशों का पालन करें
    • प्रदर्शन स्थलों, सैन्य ठिकानों, सरकारी भवनों से दूर रहें
    • स्थानीय मीडिया और दूतावास के सोशल मीडिया हैंडल पर नज़र रखें
  2. अगर आपके कोई परिजन ईरान में हैं:
    • दूतावास की हेल्पलाइन पर तुरंत संपर्क करें
    • उनसे नियमित बात करते रहें — समय क्षेत्र (time zone) का ध्यान रखें (ईरान IST से 2 घंटे पीछे है)
    • उन्हें दूतावास से संपर्क करने को कहें
    • किसी आपात स्थिति में MEA के नई दिल्ली के नियंत्रण कक्ष से भी संपर्क किया जा सकता है
  3. अगर आप ईरान की यात्रा की योजना बना रहे थे:
    • तुरंत रद्द करें — चाहे टिकट वापसी योग्य हो या नहीं
    • बाद में दोबारा यात्रा बीमा के साथ योजना बनाएँ, तब तक जब तक भारत सरकार की एडवाइज़री सकारात्मक नहीं हो जाती

ईरान में भारतीय नागरिक कौन हैं? — एक विविध समुदाय

एडवाइज़री के निहितार्थ को पूरी तरह समझने के लिए यह जानना ज़रूरी है कि ईरान में लगभग 9,000 भारतीय नागरिक रहते हैं (आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार)। ये मुख्यतः चार श्रेणियों में बँटे हैं:

1. छात्र

ईरानी विश्वविद्यालयों (तेहरान यूनिवर्सिटी, इस्फ़हान यूनिवर्सिटी, उर्मिया यूनिवर्सिटी आदि) में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र — विशेषकर कश्मीर, लद्दाख, और मुस्लिम बहुल क्षेत्रों से — MBBS, इस्लामिक अध्ययन, फ़ारसी भाषा, दंत चिकित्सा आदि की पढ़ाई कर रहे हैं। कई शिया मुस्लिम छात्र धार्मिक अध्ययन के लिए भी ईरान जाते हैं।

2. तीर्थयात्री

ईरान शिया मुस्लिमों के लिए महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है। मशहद में इमाम रज़ा की दरगाह, क़ोम में फ़ातिमा मसूमा का मज़ार — यहाँ हर साल हज़ारों भारतीय तीर्थयात्री जाते हैं। इनमें से कई वरिष्ठ नागरिक होते हैं, जिनकी देखभाल विशेष रूप से ज़रूरी है।

3. व्यापारी और पेशेवर

ईरान की चाबहार बंदरगाह परियोजना में भारत की बड़ी हिस्सेदारी है। IRCON, NHAI, JNPT जैसी भारतीय कंपनियों के इंजीनियर और तकनीकी कर्मचारी ईरान में कार्यरत हैं। व्यापार (विशेषकर बासमती चावल निर्यात, चाय, दवाइयाँ) से जुड़े कारोबारी भी मौजूद हैं।

4. राजनयिक और सहायक स्टाफ

तेहरान में भारतीय दूतावास, ज़ाहेदान और बंदर अब्बास में भारतीय वाणिज्य दूतावासों में कार्यरत कर्मचारी और उनके परिवार।

प्रत्येक श्रेणी के सामने अलग-अलग चुनौतियाँ हैं, और दूतावास सबके लिए अलग-अलग व्यावहारिक सहायता प्रदान कर रहा है।


भारत की कूटनीतिक सक्रियता — विदेश मंत्री जयशंकर की भूमिका

तेहरान से सीधी बातचीत

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 14 जनवरी 2026 को ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराग़ची से फोन पर विस्तृत बातचीत की थी। उन्होंने “विकसित होते क्षेत्रीय हालात” (evolving regional situation) पर चर्चा की।

यह केवल औपचारिक बातचीत नहीं थी — यह भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए कूटनीतिक पुल का निर्माण था। भारत चाहता है कि चाहे परिस्थिति कुछ भी हो, ईरान सरकार भारतीय नागरिकों की सुरक्षित निकासी में सहयोग करे।

पूर्व उदाहरण — जून 2025 का “12-दिवसीय संघर्ष”

यह बात याद रखने योग्य है कि जून 2025 में जब 12-दिवसीय इज़रायल-ईरान संघर्ष हुआ था, तब भी ईरान ने भारतीय नागरिकों की सुरक्षित निकासी में सहयोग किया था। जयशंकर ने तब अराग़ची को इसके लिए “धन्यवाद” कहा था।

यह कूटनीतिक सद्भावना का पूँजी भंडार (capital) है जो आज काम आ रहा है। भले ही बड़े राजनीतिक मुद्दों पर मतभेद हों, मानवीय मामलों पर भारत-ईरान सहयोग बना हुआ है।

भारत की विशिष्ट स्थिति

वर्तमान संघर्ष में भारत की भूमिका अनूठी है:

  • अमेरिका के साथ गहरे रणनीतिक संबंध
  • इज़रायल के साथ घनिष्ठ रक्षा सहयोग
  • ईरान के साथ पारंपरिक सांस्कृतिक-व्यापारिक रिश्ते
  • चाबहार बंदरगाह में बड़ा निवेश

इसलिए भारत की स्थिति है — “हमारे नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है, बाकी सब बाद में।” यही कारण है कि भारत ने किसी भी पक्ष का सीधा साथ नहीं दिया, बल्कि सभी से लगातार संपर्क बनाए रखा है।


पूर्व की सफल निकासी — भारत की विश्वसनीयता

भारत की विदेशी संकट-प्रबंधन क्षमता पिछले एक दशक में एक ब्रांड बन गई है। कुछ याद रखने योग्य अभियान:

2015 — “ऑपरेशन राहत” (यमन)

5,600+ भारतीय नागरिक + 48 देशों के 960+ विदेशी नागरिक भी सुरक्षित निकाले गए। जनरल वी.के. सिंह ने स्वयं नेतृत्व किया।

2020 — “वंदे भारत मिशन” (कोविड)

सबसे बड़ा निकासी अभियान — 60+ लाख भारतीय 100+ देशों से वापस लाए गए।

2022 — “ऑपरेशन गंगा” (यूक्रेन)

22,500+ भारतीय छात्र सक्रिय युद्ध क्षेत्र से निकाले गए — चार केंद्रीय मंत्रियों ने स्वयं मोर्चा सँभाला।

2023 — “ऑपरेशन अजय” (इज़रायल) और “ऑपरेशन कावेरी” (सूडान)

तेज़ प्रतिक्रिया, सुरक्षित घर वापसी।

2024 — ईरान-इज़रायल के पहले दौर में Indian ships का सुरक्षित मार्ग

MSC Aries ज़हाज पर सवार 17 भारतीय नाविकों की रिहाई जयशंकर की ईरानी विदेश मंत्री से बातचीत से सुनिश्चित हुई।

इन सभी अनुभवों का कुल निचोड़ यह है — भारत सरकार अपने नागरिकों को विदेशी संकटों में अकेला नहीं छोड़ती। यही भरोसा आज ईरान में मौजूद हर भारतीय के पास है।


एडवाइज़री क्यों ज़रूरी है — मानवीय दृष्टिकोण

क्यों कुछ लोग फिर भी जोखिम उठाते हैं?

दुःख की बात है कि एडवाइज़रियों के बावजूद कुछ लोग यात्रा कर लेते हैं। कारण विविध होते हैं:

  • व्यापारिक दबाव — “बस एक सप्ताह का सौदा है”
  • धार्मिक प्रतिबद्धता — “इमाम रज़ा की दरगाह पर जाना मेरा सपना है”
  • पारिवारिक मजबूरी — “रिश्तेदार वहाँ फँसे हैं”
  • शैक्षिक मजबूरी — “परीक्षा छूट जाएगी”
  • सस्ता टिकट — “अभी कीमतें कम हैं”

लेकिन एक बार सोचें…

कोई भी व्यापार, कोई भी तीर्थ, कोई भी परीक्षा — आपके जीवन से ज़्यादा महत्वपूर्ण नहीं है। जब एक पूरा देश सक्रिय युद्ध क्षेत्र में है, जब मिसाइलें रोज़ गिर रही हैं, जब हवाई क्षेत्र बंद है — तब वहाँ जाना केवल वीरता नहीं, बल्कि लापरवाही है।

विदेश मंत्रालय का एक दशक से अधिक का अनुभव यही कहता है — जब सरकार कहती है “न जाएँ”, तो वास्तव में न जाएँ। इस सरकार ने कभी भी अनावश्यक रूप से एडवाइज़री जारी नहीं की। हर एडवाइज़री ज़मीनी इनपुट, खुफिया विश्लेषण, और राजनयिक आकलन के आधार पर जारी होती है।

परिवारों की पीड़ा

जब कोई भारतीय विदेश में फँसता है, तो उसके परिवार पर क्या बीतती है — यह अनकहा दर्द है। रातों की नींद, दिन की भूख — सब समाप्त हो जाते हैं। हमारे रिश्तेदारों, मित्रों को यह पीड़ा न देनी पड़े, इसलिए यह सलाह एक पारिवारिक ज़िम्मेदारी भी है।


भारत की विदेश नीति की सफल कड़ी — “नागरिकों पर केंद्रित कूटनीति”

मोदी डॉक्ट्रिन की विशेषता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यकाल में विदेश नीति में एक नई धारा जोड़ी है — “नागरिक-केंद्रित कूटनीति” (citizen-centric diplomacy)। इसका सिद्धांत सरल है: भारतीय सरकार हर भारतीय नागरिक के लिए ज़िम्मेदार है, चाहे वह दुनिया के किसी भी कोने में हो।

यही कारण है कि यमन से यूक्रेन तक, सूडान से इज़रायल तक — हर संकट में भारत सरकार ने व्यक्तिगत रूप से हर नागरिक को वापस लाने का ज़िम्मा उठाया। यह ईरान एडवाइज़री भी उसी दर्शन का हिस्सा है — पहले चेतावनी दो, फिर सुरक्षित निकासी की व्यवस्था करो।

“विश्वगुरु” की ज़िम्मेदारी

जब भारत स्वयं को “विश्वगुरु” कहता है, तो उसका एक अर्थ यह भी है कि हम अपने नागरिकों की रक्षा का ज़िम्मा स्वीकार करते हैं — चाहे वे कहीं भी हों। पश्चिम एशिया के चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में भी, जहाँ सुपरपावर स्वयं उलझे हुए हैं, भारत अपने लोगों के लिए खड़ा है। यह गर्व की बात है।


सुनें सरकार की बात, बचाएँ अपना जीवन

यह लेख किसी डर फैलाने के उद्देश्य से नहीं लिखा गया है। यह एक तथ्य-आधारित, जीवन-रक्षक चेतावनी है जो भारतीय दूतावास द्वारा जारी की गई है, और जिसका पालन करना हर भारतीय की ज़िम्मेदारी है।

सारांश में याद रखें:

✅ क्या करें:

  1. ईरान की किसी भी प्रकार की यात्रा तुरंत रद्द करें
  2. अगर ईरान में हैं, तो तुरंत दूतावास से संपर्क करें
  3. निर्दिष्ट ज़मीनी सीमा मार्गों से बाहर निकलें — केवल दूतावास के निर्देश पर
  4. पासपोर्ट, वीज़ा, अन्य दस्तावेज़ तत्काल उपलब्ध रखें
  5. दूतावास के X हैंडल @India_in_Iran पर नियमित अपडेट देखें
  6. हेल्पलाइन नंबरों को सहेजें: +98-912-810-9115 / +98-912-810-9109 / +98-912-810-9102 / +98-993-217-9359
  7. ईमेल: cons.tehran@mea.gov.in
  8. अपने परिवार के सभी सदस्यों को यह जानकारी बताएँ

❌ क्या न करें:

  1. यह न सोचें कि “कुछ उड़ानें चल रही हैं तो सुरक्षित है”
  2. स्वयं कोई ज़मीनी मार्ग तय न करें
  3. अपुष्ट स्रोतों से मिली सूचना पर विश्वास न करें
  4. दूतावास से अलग-थलग न रहें
  5. प्रदर्शन स्थलों, सैन्य ठिकानों, सरकारी भवनों के पास न जाएँ

एक संदेश हर माँ, हर पिता, हर भाई-बहन के लिए

अगर आपके परिवार में कोई ईरान में है, या जाने की योजना बना रहा है, तो आज ही उनसे बात करें। यह लेख उनके साथ साझा करें। भारत सरकार जो कह रही है, उसे गंभीरता से लें। एक एडवाइज़री केवल कागज़ नहीं है — यह किसी की जान बचाने का प्रयास है।

जब 1990 में कुवैत संकट में एयर इंडिया ने रिकॉर्ड 1,70,000 भारतीयों को निकाला (जो गिनीज़ बुक में दर्ज है), तब भी सरकार की एडवाइज़रियों का पालन करने वाले परिवारों को कम कष्ट हुआ। इतिहास गवाह है — जो सरकार की सुनते हैं, वे सुरक्षित रहते हैं।

भारत माता के हर संतान की सुरक्षा भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। और हर भारतीय नागरिक की ज़िम्मेदारी है कि वह अपनी सुरक्षा में सरकार का भरोसेमंद साथी बने।

जय हिंद। सुरक्षित रहें। अपनों को सुरक्षित रखें।


आधिकारिक स्रोत एवं संपर्क

मुख्य स्रोत

  • Embassy of India, Tehran — आधिकारिक X हैंडल: @India_in_Iran (23 अप्रैल 2026 की पोस्ट)
  • विदेश मंत्रालय (MEA) की आधिकारिक वेबसाइट
  • India TV, India.com, Business Upturn, The Wire, News On Air, ANI की 23-24 अप्रैल 2026 की रिपोर्टिंग

आपातकालीन संपर्क (फिर से)

  • हेल्पलाइन: +98-912-810-9115, +98-912-810-9109, +98-912-810-9102, +98-993-217-9359
  • ईमेल: cons.tehran@mea.gov.in
  • MEA 24×7 नियंत्रण कक्ष (नई दिल्ली): +91-11-2301-4104 / +91-11-2301-7905
  • MADAD पोर्टल (कांसुलर सहायता): madad.gov.in
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