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वंदे मातरम की गरिमा अब कानूनी रूप से सुरक्षित, राष्ट्रभक्ति का नया अध्याय

केंद्र सरकार ने 5 मई 2026 को Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 में संशोधन को मंजूरी दे दी है। अब वंदे मातरम के अपमान, बीच में खड़े न होने, व्यवधान डालने या अपमानजनक व्यवहार को राष्ट्रगान (जन गण मन) के समान दंडनीय अपराध माना जाएगा।

नये नियमों की मुख्य बातें:

  • सजा: जानबूझकर अपमान या व्यवधान डालने पर 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकता है।
  • पूर्ण गीत अनिवार्य: सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों-कॉलेजों और आधिकारिक आयोजनों में वंदे मातरम के सभी 6 छंद (पूर्ण संस्करण) गाने/बजाने होंगे। अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड
  • प्रोटोकॉल: यदि किसी कार्यक्रम में वंदे मातरम और जन गण मन दोनों हों, तो पहले वंदे मातरम गाया/बजाया जाएगा।
  • खड़े होना अनिवार्य: उपस्थित सभी लोगों को सम्मानपूर्वक खड़े होना होगा, ठीक राष्ट्रगान की तरह।
  • कब लागू: संसद में बिल पास होने के बाद यह कानून बनेगा।

क्या मुसलमानों (या किसी भी समुदाय) को जबरन गाना पड़ेगा?

  • सरकारी, आधिकारिक और स्कूल-कॉलेज कार्यक्रमों में खड़े होना और प्रोटोकॉल का पालन करना सभी के लिए अनिवार्य होगा।
  • केवल गाना जबरन अनिवार्य नहीं है, लेकिन अपमान, बीच में बोलना, बैठे रहना या व्यवधान डालना दंडनीय होगा।
  • कई मुस्लिम संगठन (AIMPLB, Jamiat आदि) इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि गीत के कुछ छंद देवी-देवताओं से संबंधित हैं, जो उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाते हैं। वे इसे असंवैधानिक बताकर कोर्ट जाने की तैयारी में हैं।

पृष्ठभूमि

  • वंदे मातरम बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखित है।
  • पहले आमतौर पर केवल पहले दो छंद गाए जाते थे।
  • फरवरी 2026 में गृह मंत्रालय ने पहले गाइडलाइंस जारी की थीं (पूर्ण 6 छंद + पहले गाना), लेकिन उनमें कानूनी सजा का प्रावधान नहीं था।
  • अब कैबिनेट ने कानूनी दर्जा (statutory backing) दे दिया है।

यह फैसला वंदे मातरम को राष्ट्रगान के बराबर कानूनी सम्मान और सुरक्षा देता है। सरकारी आयोजनों में इसका सख्ती से पालन होगा, जबकि निजी जीवन में कोई जबरदस्ती नहीं।

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