भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक — पद्म पुरस्कार — के 2027 संस्करण के लिए नामांकन प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) द्वारा जारी आधिकारिक घोषणा के अनुसार, 2027 गणतंत्र दिवस के अवसर पर घोषित होने वाले इन पुरस्कारों के लिए नामांकन 15 मार्च 2026 से शुरू हो चुके हैं, और आख़िरी तारीख़ 31 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है।
विशेष रूप से उल्लेखनीय बात यह है कि केवल ऑनलाइन माध्यम से, राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल (Rashtriya Puraskar Portal — https://awards.gov.in) पर ही आवेदन स्वीकार किए जाएँगे। कागज़ी, ईमेल, या डाक से भेजे गए आवेदन मान्य नहीं होंगे।
लेकिन यह केवल एक प्रशासनिक घोषणा नहीं है। यह “People’s Padma” — यानी जन-जन के पद्म पुरस्कार — के मोदी सरकार के प्रयास का एक नया अध्याय है। एक ऐसी पहल जो भारतीय समाज के गुमनाम नायकों को राष्ट्रीय मंच पर लाने का प्रयास कर रही है। पिछले कई वर्षों में हमने देखा है कि पद्म पुरस्कारों ने कैसे एक चायवाला, एक सब्ज़ी विक्रेता, एक आदिवासी संरक्षक, और एक रिक्शा चालक तक — को राष्ट्रपति भवन के दरबार तक पहुँचाया है। यह लेख आपको बताएगा कि आप — एक आम भारतीय नागरिक — कैसे अपने आसपास के असाधारण व्यक्तियों को इस सम्मान के लिए नामांकित कर सकते हैं।
पद्म पुरस्कार क्या हैं? — एक संक्षिप्त इतिहास
1954 में स्थापित — पद्म पुरस्कार भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान हैं। यह “भारत रत्न” के बाद देश के सबसे प्रतिष्ठित सम्मान माने जाते हैं। तीन श्रेणियों में दिए जाते हैं:
पद्म विभूषण (Padma Vibhushan)
- उत्कृष्ट और असाधारण सेवा के लिए
- अब तक के प्राप्तकर्ता: सचिन तेंदुलकर, लता मंगेशकर, अमिताभ बच्चन, ए.आर. रहमान, श्री श्री रविशंकर
- आम तौर पर पद्म पुरस्कारों में सर्वोच्च
पद्म भूषण (Padma Bhushan)
- उच्च स्तर की विशिष्ट सेवा के लिए
- अब तक के प्राप्तकर्ता: एन.आर. नारायण मूर्ति, अज़ीम प्रेमजी, इरफ़ान खान, राकेश शर्मा, साइना नेहवाल
- सालाना अधिकतम 17 लोग
पद्म श्री (Padma Shri)
- किसी भी क्षेत्र में विशिष्ट सेवा के लिए
- सबसे व्यापक — सालाना 120+ लोगों तक
- “People’s Padma” की अवधारणा के तहत — गुमनाम नायकों को विशेष प्राथमिकता
- 2014 के बाद से इस श्रेणी में असाधारण सामान्य लोग अधिक मिले हैं
पद्म पुरस्कारों का बदलता चरित्र — “People’s Padma” क्रांति
यह बिल्कुल नया दृष्टिकोण है जिसने पद्म पुरस्कारों को एलीट सर्कल से निकालकर जन-सम्मान बनाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2014 के बाद के कार्यकाल में पद्म पुरस्कारों का चरित्र बदला है। कुछ ऐतिहासिक उदाहरण:
राहीबाई पोपेरे — “सीडमदर ऑफ इंडिया”
2021 में पद्म श्री से सम्मानित। महाराष्ट्र के अहमदनगर ज़िले की एक आदिवासी महिला, जिसने 150+ देसी बीजों की किस्में सहेजकर भारत की कृषि विरासत बचाई। औपचारिक शिक्षा से वंचित, लेकिन उनका योगदान कृषि वैज्ञानिकों से अधिक मूल्यवान।
तुलसी गौड़ा — “वृक्ष माता”
2021 में पद्म श्री। कर्नाटक के होनवल्ली की 73-वर्षीय आदिवासी महिला, जिन्होंने 30,000+ पौधे लगाए। निरक्षर थीं, राष्ट्रपति भवन में नंगे पाँव गईं।
सुलगिति नरसम्मा — “दादी मिडवाइफ”
कर्नाटक की 96-वर्षीय महिला, जिन्होंने जीवनभर 15,000+ बच्चों के सुरक्षित जन्म में मदद की।
विद्यानंद ठाकुर — बिहार के ‘राँची ट्री मैन’
हजारों पेड़ लगाकर पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखा।
ये केवल कुछ उदाहरण हैं। 2014 से 2025 तक — कुल लगभग 1,200 लोगों को पद्म पुरस्कार दिए गए हैं। इनमें आम लोगों, गाँव के नायकों, आदिवासी संरक्षकों, और सेवा-धर्मी लोगों की संख्या 40-50% से अधिक है।
आख़िर “People’s Padma” का दर्शन क्या है?
मोदी सरकार के दृष्टिकोण में पद्म पुरस्कारों का बदला हुआ चरित्र तीन सिद्धांतों पर आधारित है:
1. लोकतंत्रीकरण (Democratization)
पुराने युग में पद्म पुरस्कार राजनीतिक लॉबीइंग, सरकारी सिफ़ारिशों, और सेलिब्रिटी सर्कल से प्रभावित होते थे। नई व्यवस्था में:
- हर नागरिक नामांकित कर सकता है — स्वयं भी
- ऑनलाइन पारदर्शी प्रक्रिया
- समिति आधारित मूल्यांकन
- सरकारी प्रभाव कम
2. विकेंद्रीकरण (Decentralization)
- दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु से बाहर के लोग केंद्र में
- गाँव, जिले, छोटे क़स्बे के नायकों को प्राथमिकता
- पूर्वोत्तर, आदिवासी क्षेत्र, द्वीपीय क्षेत्र से प्रतिनिधित्व
3. योग्यता (Merit Over Position)
- औपचारिक शिक्षा या पद अनिवार्य नहीं
- सेवा का प्रभाव और अवधि महत्वपूर्ण
- सामाजिक परिवर्तन की क्षमता मायने रखती है
आपका कर्तव्य — “गुमनाम नायक” को पहचानें
Ministry of Home Affairs ने नागरिकों से एक विशेष अपील की है:
“सरकार पद्म पुरस्कारों को ‘People’s Padma’ में बदलने के लिए प्रतिबद्ध है। सभी नागरिकों से अनुरोध है कि वे नामांकन/सिफ़ारिशें करें — स्व-नामांकन सहित। प्रतिभाशाली व्यक्तियों की पहचान के लिए सक्रिय प्रयास किए जाने चाहिए, विशेषकर महिलाओं, समाज के कमज़ोर वर्गों, अनुसूचित जाति/जनजाति, दिव्यांगजनों, और अपने क्षेत्र में निःस्वार्थ सेवा कर रहे लोगों के बीच से।”
यानी आपका दायित्व है — अपने आसपास देखें। क्या आपके गाँव/शहर में कोई:
- 50 वर्षों से ग़रीब बच्चों को निःशुल्क शिक्षा दे रहा है?
- हज़ारों पेड़ लगा चुका है?
- दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष विद्यालय चला रहा है?
- पारंपरिक हस्तकला को जीवित रख रहा है?
- लोक संगीत/नृत्य की दुर्लभ शैली का संरक्षक है?
- आयुर्वेद/होमियोपैथी में अनोखा योगदान दे रहा है?
- पर्यावरण रक्षा में अग्रणी है?
- सामाजिक सुधार में जुटा है?
- खेल कोच के रूप में ग्रामीण प्रतिभा खोज रहा है?
- आदिवासी संस्कृति का संरक्षक है?
— तो आपके पास राष्ट्रीय कर्तव्य है। उन्हें नामांकित करें।
नामांकन प्रक्रिया — चरण-दर-चरण मार्गदर्शिका
चरण 1: पोर्टल पर पंजीकरण
- जाएँ: https://awards.gov.in
- “Sign Up” पर क्लिक करें (नए उपयोगकर्ता)
- मोबाइल नंबर, ईमेल, और आधार के साथ पंजीकरण
- OTP सत्यापन
चरण 2: नामांकन फ़ॉर्म
ऑनलाइन फ़ॉर्म में निम्नलिखित जानकारी आवश्यक:
नामांकित व्यक्ति के बारे में:
- पूरा नाम
- जन्म तिथि
- आयु
- पता
- संपर्क जानकारी
- फ़ोटो (पासपोर्ट साइज़)
योगदान का विवरण:
- क्षेत्र (कला, साहित्य, शिक्षा, खेल, चिकित्सा, समाज सेवा, विज्ञान-इंजीनियरिंग, सार्वजनिक मामले, सिविल सेवा, व्यापार-उद्योग आदि)
- विशिष्ट उपलब्धियाँ
- सेवा की अवधि
- प्रभावित लोगों की संख्या
- विशिष्टता का विवरण (क्यों यह व्यक्ति विशेष है?)
समर्थन सामग्री:
- मीडिया रिपोर्टों के लिंक
- पुरस्कार/सम्मान का इतिहास
- फ़ोटोग्राफ़, वीडियो (यदि उपलब्ध)
- अन्य सिफ़ारिश पत्र
चरण 3: निर्धारित प्रारूप में निबंध
लगभग 800 शब्दों का एक विस्तृत विवरण देना होगा — जिसमें:
- नामांकित व्यक्ति का परिचय
- उनका कार्य
- सामाजिक प्रभाव
- विशिष्टता क्यों
- भविष्य की संभावनाएँ
चरण 4: सबमिशन और ट्रैकिंग
- फ़ॉर्म जमा करें
- रसीद नंबर सहेजें
- पोर्टल पर स्थिति ट्रैक की जा सकती है
पात्रता मानदंड — कौन नामांकित हो सकता है?
पात्र:
- सभी भारतीय नागरिक — बिना धर्म, जाति, लिंग, क्षेत्र के भेदभाव
- NRIs (अनिवासी भारतीय) — कुछ शर्तों के साथ
- PIOs (Persons of Indian Origin) — विशेष परिस्थितियों में
- विदेशी नागरिक — भारत में अपने योगदान के लिए (कुछ मामलों में)
अपात्र:
- सरकारी कर्मचारी — सामान्यतः अपात्र (अपवाद: सरकारी संस्थानों के डॉक्टर और वैज्ञानिक)
- जिन्हें पहले ही पद्म पुरस्कार मिल चुका है — एक श्रेणी में
- राजनीतिक पदाधिकारी — अपने कार्यकाल में
विशेष प्राथमिकता:
- महिलाएँ
- समाज के कमज़ोर वर्ग
- SC/ST समुदाय
- दिव्यांगजन
- प्रकृति-संरक्षक
- पारंपरिक कला/संस्कृति के रक्षक
- गुमनाम सामाजिक कार्यकर्ता
निर्णय प्रक्रिया — कैसे होता है चयन?
नामांकन के बाद की प्रक्रिया:
1. प्रारंभिक छँटनी (अगस्त-सितंबर 2026):
- गृह मंत्रालय द्वारा हज़ारों आवेदनों की प्रारंभिक स्क्रीनिंग
2. विशेषज्ञ समिति समीक्षा (अक्टूबर-नवंबर 2026):
- विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ दल
- प्रत्येक क्षेत्र के लिए अलग समिति
- सत्यापन और पृष्ठभूमि जाँच
3. केंद्रीय पद्म पुरस्कार समिति (Padma Awards Committee — दिसंबर 2026):
- कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता
- अंतिम सिफ़ारिश सूची तैयार
- गृह सचिव, राष्ट्रपति के सचिव, प्रधानमंत्री के सचिव सदस्य
4. प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति की मंज़ूरी (जनवरी 2027 की शुरुआत में)
5. आधिकारिक घोषणा — 26 जनवरी 2027 (गणतंत्र दिवस):
- राष्ट्रपति भवन से आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति
- मार्च-अप्रैल 2027 में राष्ट्रपति द्वारा सम्मान समारोह
पद्म पुरस्कार पाने वालों को क्या मिलता है?
मौद्रिक पुरस्कार नहीं। यह पूर्णतया सम्मानात्मक है। प्राप्तकर्ताओं को मिलता है:
✅ पदक — पद्म चिह्न के साथ ✅ राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षरित प्रशस्ति पत्र ✅ राष्ट्रपति भवन में औपचारिक समारोह ✅ जीवनभर “पद्म पुरस्कार से सम्मानित” पदवी ✅ राष्ट्रीय गरिमा और समाज में विशेष पहचान ✅ अंतर्राष्ट्रीय मान्यता
लेकिन यह नियम स्पष्ट है — पद्म पुरस्कार ‘टाइटल’ (पदवी) नहीं है। आप अपने नाम के आगे “पद्म श्री” नहीं लगा सकते। संविधान के अनुच्छेद 18(1) के तहत यह निषिद्ध है। हालाँकि “recipient of Padma Shri” लिखना मान्य है।
विशेष आह्वान — महिलाओं और कमज़ोर वर्गों के लिए
मोदी सरकार ने इस वर्ष विशेष आह्वान किया है — “महिलाओं की भागीदारी” बढ़ाने का। डेटा बताता है:
- 2025 में पद्म पुरस्कार पाने वाली महिलाएँ: लगभग 30%
- लक्ष्य 2027 तक: 40%+
इसी तरह:
- SC/ST समुदाय की भागीदारी बढ़ाना
- दिव्यांगजनों के लिए विशेष प्रोत्साहन
- पूर्वोत्तर, J&K, लद्दाख से अधिक नामांकन
- छोटे शहरों, गाँवों से प्रतिनिधित्व
यह एक सच्ची “People’s Padma” की दिशा में महत्वपूर्ण क़दम है।
तकनीकी सुझाव — आवेदन कैसे करें “मज़बूत”?
यदि आप किसी को नामांकित कर रहे हैं, तो ये बिंदु आपके आवेदन को मज़बूत बनाएँगे:
DO’s (क्या करें):
✅ विशिष्ट उदाहरण दें — “हज़ारों लोगों की मदद की” के बजाय “2003 से 2026 तक 8,247 ग़रीब बच्चों को मुफ़्त शिक्षा दी”
✅ मीडिया कवरेज के लिंक शामिल करें
✅ मात्रात्मक प्रभाव दिखाएँ (कितने लोग, कितनी मात्रा, कितने वर्ष)
✅ तीसरे पक्ष की पुष्टि (NGO, सरकारी अधिकारी, स्थानीय प्रशासन के पत्र)
✅ विशिष्ट क्यों स्पष्ट करें (इस व्यक्ति में ऐसा क्या है जो दूसरों में नहीं?)
✅ समय पर सबमिट करें — अंतिम दिन तक न रुकें
DON’Ts (क्या न करें):
❌ अतिशयोक्ति — झूठे दावे प्रक्रिया में पकड़े जाते हैं
❌ राजनीतिक संदर्भ — पद्म पुरस्कार राजनीति से ऊपर हैं
❌ अधूरी जानकारी — सभी फ़ील्ड भरें
❌ एक से अधिक श्रेणियों में — एक व्यक्ति को एक ही श्रेणी में नामांकित करें
❌ हाल के विवादास्पद व्यक्तियों के लिए — पुरस्कार समिति विवादों से बचती है
इतिहास का संदर्भ — पद्म पुरस्कार की यात्रा
1954: स्थापना — पंडित जवाहरलाल नेहरू सरकार में 1955-2014: परंपरागत प्रक्रिया — सरकारी सिफ़ारिशें केंद्र में 2014: ऑनलाइन नामांकन शुरू — पारदर्शिता बढ़ी 2017: “People’s Padma” अवधारणा — गुमनाम नायकों को प्राथमिकता 2020-21: कोविड के बावजूद नियमित घोषणाएँ — सेवा क्षेत्र को विशेष महत्व 2024-25: 132 पद्म पुरस्कार — रिकॉर्ड भागीदारी
अब तक के कुल पद्म पुरस्कार:
- पद्म विभूषण: ~324
- पद्म भूषण: ~1,374
- पद्म श्री: ~3,800+
यानी लगभग 5,500 भारतीय अब तक इस सम्मान से सम्मानित हो चुके हैं — हर एक की अपनी अनूठी कहानी।
निष्कर्ष — आपका भारत, आपकी पहचान, आपकी ज़िम्मेदारी
जब हम 26 जनवरी 2027 को राष्ट्रपति भवन में पद्म पुरस्कार समारोह देखेंगे — तो वहाँ खड़े हर व्यक्ति की कहानी आज कहीं अनलिखी है। शायद उनमें से कोई:
- आपके पड़ोस के गाँव में 40 साल से बच्चों को पढ़ा रहा है
- आपके शहर के बाहरी इलाक़े में विरासत के इमारतों को बचा रहा है
- आपके राज्य के दूरस्थ कोने में लोक संगीत की दुर्लभ धुनें सहेज रहा है
- आपकी जान-पहचान के किसी ऐसे व्यक्ति से, जो हज़ारों लोगों के जीवन को बदल चुका है, लेकिन कभी सुर्ख़ियों में नहीं आया
आज, इस लेख को पढ़ने के बाद — आप उनके लिए वह क़दम उठा सकते हैं।
31 जुलाई 2026 अंतिम तारीख़ है। तीन महीने हैं। प्रक्रिया आसान, ऑनलाइन, निःशुल्क है। और किसी भारतीय नायक के जीवन में राष्ट्रीय गौरव का एक क्षण आपके हाथ में है।
जब अब्दुल कलाम जी ने कहा था — “छोटे लक्ष्यों का पीछा करना अपराध है” — तब उन्होंने यही सिखाया था कि हर भारतीय बड़े सपनों का हकदार है। और पद्म पुरस्कार वह मंच हैं जहाँ छोटे गाँवों के बड़े सपने राष्ट्र की पहचान बनते हैं।
आज आपकी ज़िम्मेदारी है। वेबसाइट खोलिए: https://awards.gov.in
क्योंकि असली नायक आपके आसपास हैं — बस उन्हें पहचानने वाला चाहिए।
जय हिंद। जय पद्म-गौरव।