राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने के आरोप में 6 यूक्रेनियाई नागरिकों और एक अमेरिकी नागरिक को 30 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। ये विदेशी म्यांमार के जातीय सशस्त्र समूहों को हथियारबंद ट्रेनिंग देने, यूरोप से ड्रोन तस्करी करने और भारत के प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों से जुड़ने के आरोपों में फंसे हैं। एनआईए ने इन्हें दिल्ली, लखनऊ और कोलकाता एयरपोर्ट्स पर मार्च 2026 में गिरफ्तार किया था, और प्रारंभिक पूछताछ के बाद अदालत ने यह सख्त कदम उठाया।
एनआईए की जांच के अनुसार, आरोपी वैध वीजों पर भारत पहुंचे लेकिन मिजोरम जैसे संरक्षित क्षेत्र (प्रोटेक्टेड एरिया) में बिना विशेष अनुमति (प्रोटेक्टेड एरिया परमिट) प्रवेश कर लिया। मिजोरम से इन्होंने अवैध रूप से म्यांमार की सीमा पार की, जहां चिन स्टेट जैसे संवेदनशील इलाकों में जातीय युद्ध समूहों (एथनिक आर्म्ड ग्रुप्स) से संपर्क साधा। इन समूहों को ड्रोन ऑपरेशन, जामिंग तकनीक, हथियार चलाना और युद्ध रणनीति की ट्रेनिंग दी गई। एनआईए का दावा है कि ये समूह भारत के पूर्वोत्तर में सक्रिय प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों को हथियार, विस्फोटक और तकनीकी सहायता प्रदान करते हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हैं।
#WATCH | Delhi | NIA court sends 6 Ukrainians and one US citizen to 30 days' judicial custody after NIA interrogation.
— ANI (@ANI) April 6, 2026
It is alleged that they came to India on a visa and then entered Mizoram, which is a protected area. Thereafter, they entered Myanmar and contacted ethnic war… pic.twitter.com/OxgJuMZb5J
ड्रोन तस्करी का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क उजागर
सबसे चौंकाने वाला खुलासा यूरोप से भारत के रास्ते म्यांमार भेजे गए बड़े जत्थे के ड्रोन का है। एनआईए सूत्रों के मुताबिक, आरोपी मिजोरम को ‘ट्रांजिट हब’ के रूप में इस्तेमाल कर रहे थे, जहां ड्रोन असेंबल किए जाते और म्यांमार भेजे जाते। ये ड्रोन सैन्य ग्रेड के थे, जिनका उपयोग हमलों, निगरानी और संचार जामिंग के लिए किया जा रहा था। अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइक को ‘मर्सनरी’ (भाड़े का सैनिक) बताया जा रहा है, जो पहले सीरिया और यूक्रेन में सक्रिय रहा। अन्य आरोपी यूक्रेनियन हैं: हुरबा पेट्रो, स्लिवियाक तारास, इवान सुकमानोवस्की, स्टेफांकिव मारियन, हॉनचारुक माक्सिम और कामिन्स्की विक्टर। अदालत ने इन्हें 11 दिनों की एनआईए हिरासत के बाद 10 दिनों का विस्तार दिया और अब न्यायिक हिरासत में भेजा।
म्यांमार में चल रहे गृहयुद्ध ने इस साजिश को बल दिया। आरोपी एके-47 जैसे हथियारों से लैस संदिग्धों से मिले और भारतीय उग्रवादियों को समर्थन पहुंचाने का काम किया। एनआईए ने यूएपीए (Unlawful Activities Prevention Act) के तहत मामला दर्ज किया, जिसमें आतंकी साजिश, अवैध सीमा पार और विदेशी हस्तक्षेप के आरोप शामिल हैं। जांच में मोबाइल डेटा, यात्रा रिकॉर्ड और ड्रोन के पार्ट्स जब्त हुए हैं।
मिजोरम का संरक्षित क्षेत्र और विदेशी घुसपैठ की चुनौती
मिजोरम भारत के संवेदनशील सीमावर्ती राज्यों में से एक है, जहां विदेशी पर्यटकों को प्रोटेक्टेड एरिया परमिट (PAP) या इनर लाइन परमिट (ILP) की जरूरत पड़ती है। आरोपी बिना इनके म्यांमार बॉर्डर पार कर गए, जो विदेशी अधिनियम 1946 का स्पष्ट उल्लंघन है। मिजोरम पुलिस और स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि PAP जारी करने में देरी से ऐसी अवैध घुसपैठ बढ़ रही है। यह घटना पूर्वोत्तर की सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है, खासकर जब म्यांमार जंता के खिलाफ विद्रोही सक्रिय हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यूक्रेन ने भारत के पास औपचारिक विरोध दर्ज कराया, जबकि अमेरिका ने जांच का समर्थन किया। एनआईए विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने आरोपी की मेडिकल जांच हर 48 घंटे में कराने का आदेश दिया और बंद कमरे में सुनवाई की। जांच आगे बढ़ रही है, जिसमें अन्य विदेशी नेटवर्क और भारतीय उग्रवादियों के लिंक खंगाले जा रहे हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक निहितार्थ
यह मामला भारत की खुफिया एजेंसियों की सतर्कता को दर्शाता है। पूर्वोत्तर में उग्रवाद लंबे समय से चुनौती है, और विदेशी मर्सनरी का प्रवेश नया खतरा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन तकनीक से सीमा पर अस्थिरता बढ़ सकती थी। गृह मंत्रालय ने सभी संरक्षित क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी है। यह साजिश न केवल भारत बल्कि दक्षिण एशिया की स्थिरता को प्रभावित कर सकती थी। आगे की पूछताछ से पूरा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क बेनकाब हो सकता है।