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मिडिल ईस्ट जंग के बीच भारत का साहसिक कदम: 7 साल बाद ईरान से तेल खरीदा, सप्लाई चेन को झटका!

मिडिल ईस्ट में चल रही जंग और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल सप्लाई बाधित होने के बीच भारत ने बड़ा कदम उठाया। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने घोषणा की कि देश ने मई 2019 के बाद पहली बार ईरान से कच्चा तेल खरीद लिया है। दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक भारत के लिए यह फैसला ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने वाला है।
मंत्रालय के बयान के अनुसार, हाल ही में एक भारतीय रिफाइनरी को ईरानी तेल की पहली खेप मिली। यह खरीद अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद हुई, जो 2019 में भारत को ईरान से तेल बंद करने पर मजबूर कर चुके थे। अब जियोपॉलिटिकल बदलावों के बीच भारत ने पुराना रिश्ता बहाल किया। ईरानी तेल की कीमतें वैश्विक बाजार से 10-15% कम हैं, जो भारत के लिए फायदेमंद साबित हो सकती हैं।


2019 से अब तक का सफर: अमेरिकी दबाव से आजादी
2019 में अमेरिका ने ईरान पर ‘जीरो टॉलरेंस’ प्रतिबंध लगाए, जिसके बाद भारत सहित कई देशों ने ईरानी तेल का आयात रोक दिया। भारत का 10% तेल आयात ईरान से होता था, लेकिन दबाव में रूस, सऊदी और इराक की ओर रुख किया। अब इजरायल-ईरान तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में हूती हमलों से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित है। भारत ने मौके का फायदा उठाते हुए चाबहार पोर्ट के जरिए तेल आयात फिर शुरू किया।
विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने बताया, “यह आर्थिक हितों पर आधारित फैसला है। ईरान के साथ पुराने संबंध मजबूत हैं।” चाबहार बंदरगाह विकास पर भारत-ईरान समझौता 2024 में बढ़ाया गया, जो अफगानिस्तान और मध्य एशिया के लिए रणनीतिक है।


जंग का असर: क्यों जरूरी था यह कदम?
मिडिल ईस्ट में इजरायल-हमास-हूती संघर्ष से तेल के दाम 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चढ़ गए। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जहां 20% वैश्विक तेल गुजरता है, खतरे में है। भारत 85% तेल आयात पर निर्भर है, और रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद विविधीकरण जरूरी हो गया। ईरान से तेल सस्ता और गुणवत्ता वाला है, जो रिलायंस और IOCL जैसी रिफाइनरियों के लिए आदर्श।
मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस महीने 1.2 मिलियन बैरल ईरानी तेल आया, जो अगले महीनों में दोगुना हो सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट बैठक में इसे “ऊर्जा आत्मनिर्भरता” का हिस्सा बताया।


वैश्विक प्रभाव और भारत की रणनीति
यह कदम अमेरिका के साथ संबंधों पर असर डाल सकता है, लेकिन भारत ने BRICS और QUAD के बीच संतुलन बनाया है। ईरान ने भारत को विशेष छूट दी, जबकि चीन पहले से आयात कर रहा है। घरेलू स्तर पर इससे पेट्रोल-डीजल कीमतें स्थिर रहेंगी। विशेषज्ञों का कहना है, “भारत अब तेल बाजार का स्मार्ट प्लेयर बन रहा है।”
अगले चरण में भारत ईरानी गैस पाइपलाइन परियोजना को पुनर्जीवित करने की कोशिश करेगा। यह फैसला भारत की कूटनीतिक परिपक्वता का प्रतीक है, जो जंग के बीच ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।

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