Operation Sindoor में पाकिस्तान के खिलाफ पहली बार ब्रह्मोस मिसाइल के सफल और निर्णायक इस्तेमाल के बाद, यह मिसाइल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जबरदस्त मांग में आ गई है। भारत ने इस ऑपरेशन में ब्रह्मोस का उपयोग कर पाकिस्तानी एयरबेस और रणनीतिक ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया, जिससे इसकी मारक क्षमता और विश्वसनीयता साबित हुई।
किन देशों में है ब्रह्मोस की मांग?
वियतनाम, सऊदी अरब, मलेशिया सहित करीब 15 देश अब ब्रह्मोस खरीदने की कतार में हैं।
फिलीपींस के साथ भारत ने पहले ही $375 मिलियन का बड़ा सौदा किया है और अप्रैल 2025 में दूसरी खेप भी भेजी जा चुकी है।
कई अन्य दक्षिण-पूर्व एशियाई, पश्चिम एशियाई और लैटिन अमेरिकी देश भी भारत से बातचीत कर रहे हैं।
ब्रह्मोस की खासियतें
सुपरसोनिक स्पीड: Mach 2.8–3.0 (आवाज की गति से लगभग तीन गुना तेज)।
‘फायर एंड फॉरगेट’ टेक्नोलॉजी: लॉन्च के बाद किसी गाइडेंस की जरूरत नहीं।
लो रडार सिग्नेचर और हाई एक्युरेसी: दुश्मन के डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में सक्षम, एक मीटर से कम सर्कुलर एरर प्रॉबेबिलिटी।
मल्टी-प्लेटफॉर्म लॉन्च: जमीन, समुद्र, वायु और सबमरीन से फायर किया जा सकता है।
रेंज: स्टैंडर्ड वर्जन 290 किमी, नई वेरिएंट्स 400–800 किमी तक।
रणनीतिक और निर्यात सफलता
ब्रह्मोस की युद्ध में सफलता ने भारत की रक्षा निर्यात क्षमता को नई ऊंचाई दी है।
रक्षा मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों ने इसे ‘मेड इन इंडिया’ रक्षा तकनीक की बड़ी उपलब्धि बताया है।
Operation Sindoor के बाद ब्रह्मोस मिसाइल की मांग वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ी है। वियतनाम से लेकर सऊदी अरब तक कई देश इसे खरीदने के लिए भारत से संपर्क कर रहे हैं, जिससे भारत की रक्षा डिप्लोमेसी और निर्यात को बड़ा बढ़ावा मिला है।