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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस वर्ष भारत दौरे पर, भारत-रूस संबंधों में नई दिशा की उम्मीद

मॉस्को/नई दिल्ली: रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने गुरुवार को घोषणा की कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस वर्ष भारत का दौरा करेंगे। यह दौरा रूस-यूक्रेन युद्ध के शुरू होने के बाद से पुतिन की पहली भारत यात्रा होगी। लावरोव ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की यूक्रेन संकट पर संतुलित नीति की सराहना करते हुए कहा कि भारत ने हमेशा कूटनीतिक संवाद के माध्यम से समाधान की वकालत की है।

रूसी विदेश मंत्री ने “रूस और भारत: एक नए द्विपक्षीय एजेंडे की ओर साथ” नामक सम्मेलन में वीडियो संदेश के जरिए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए रूस को चुना, जिससे दोनों देशों के बीच घनिष्ठ संबंधों की झलक मिलती है। उन्होंने कहा, “अब हमारी बारी है,” यह संकेत देते हुए कि रूस भी भारत के साथ अपने संबंधों को और गहरा करने के लिए तत्पर है।

लावरोव ने यह भी स्पष्ट किया कि पुतिन की भारत यात्रा के लिए तैयारियां जारी हैं, हालांकि यात्रा की सटीक तारीखें अभी तय नहीं हुई हैं।


यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस-यूक्रेन युद्धविराम को मध्यस्थता के जरिए समाप्त करने का प्रयास कर रहे हैं। साथ ही, ट्रंप इस साल भारत में होने वाले क्वाड नेताओं के शिखर सम्मेलन में भाग लेने की भी संभावना जता चुके हैं। इन घटनाओं के बीच पुतिन की भारत यात्रा कूटनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

भारत और रूस के बीच सदियों पुराने रणनीतिक संबंध हैं, जिनमें व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग शामिल है। लावरोव ने कहा कि दोनों देश सालाना 100 अरब डॉलर से अधिक के द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने के लिए काम कर रहे हैं।

पुतिन की इस यात्रा के दौरान कई प्रमुख मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है, जिनमें रक्षा सौदे, ऊर्जा साझेदारी, व्यापार विस्तार और वैश्विक कूटनीति में सहयोग शामिल हैं।

इसके अलावा, भारत रूस से सस्ता कच्चा तेल आयात कर रहा है और दोनों देश रुपया-रूबल व्यापार व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के प्रयास कर रहे हैं। साथ ही, भारत रूस के सुदूर पूर्व क्षेत्र में निवेश बढ़ाने पर भी विचार कर रहा है।

इस यात्रा से भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती मिलने की उम्मीद है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। भारत की “बहु-ध्रुवीय विदेश नीति” में रूस एक महत्वपूर्ण भागीदार बना हुआ है, और यह यात्रा इस साझेदारी को और सुदृढ़ कर सकती है।

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