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वाराणसी में पीएम मोदी का करारा जवाब: ‘डेड इकॉनमी’ विवाद पर स्वदेशी का संकल्प

और आत्मविश्वास से भरा जवाब दिया। बिना किसी सीधी टिप्पणी के, प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी की राह पर चलने का ऐतिहासिक आह्वान किया।

पीएम मोदी ने कहा कि वैश्विक स्तर पर अस्थिरता का माहौल है, हर देश अपने व्यक्तिगत हितों को केंद्र में रख रहा है और ऐसे समय में भारत जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आर्थिक हितों की रक्षा के लिए देश को लगातार सजग रहना होगा और भारत सरकार हर कदम देशवासियों के लाभ के लिए उठा रही है।

मोदी ने राजनीतिक दलों और नागरिकों से आग्रह किया कि जो भी भारत को दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा आर्थिक पावर बनाना चाहता है, वह राजनीति से ऊपर उठकर ‘स्वदेशी’ का भाव जगाए। ‘हम वही खरीदेंगे, जो किसी भारतीय के पसीने से बना है’—प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें ‘वोकल फॉर लोकल’ मंत्र को अपनाना चाहिए। उन्होंने आम जनता, व्यापारियों और दुकानदारों से विशेष आग्रह किया कि घरेलू त्योहारों और हर मौके पर स्वदेशी सामान खरीदने और बेचने की जिम्मेदारी खुद उठाएं।

पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया बेशक भारत की आर्थिक संभावनाओं पर सवाल उठाए, लेकिन “सबका प्रयास” और स्वदेशी का आत्मबल ही देश को चोटी तक पहुंचाएगा। उन्होंने अपने संबोधन में गांधीजी की स्वदेशी भावना को भी श्रद्धांजलि दी और कहा, आने वाले महीनों में भारत में हर घर, हर खरीदारी और हर आयोजन में स्वदेशी और ‘मेक इन इंडिया’ उत्पादों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने ‘हर हर महादेव’ के उद्घोष के साथ देशवासियों में आत्मविश्वास और एकजुटता का संदेश फैलाया। उनका यह संबोधन आर्थिक राष्ट्रवाद, आत्मनिर्भर भारत और वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की बढ़ती ताकत का सशक्त प्रतीक बन गया।

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