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RSS विजयदशमी उत्सव 2025: संघ की शताब्दी वर्ष में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की ऐतिहासिक उपस्थिति और समावेशी नए विमर्श


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में इस वर्ष विजयदशमी उत्सव का आयोजन नागपुर में कर रहा है। यह उत्सव इसलिए भी विशिष्ट है क्योंकि इस वार्षिक समारोह के मुख्य अतिथि पूर्व राष्ट्रपति महामहिम रामनाथ कोविंद होंगे। उनका संघ के मंच पर आना भारतीय राजनीतिक और सामाजिक संस्कारों के नए विमर्श की ओर इशारा करता है। इससे पूर्व 2018 में संघ के नागपुर शिविर में पूर्व राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी की उपस्थिति ने भी बड़ा विमर्श खड़ा किया था।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और संघ की समावेशी नीति

आरएसएस की स्थापना 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा की गई थी। बीते 100 वर्षों में संघ ने अपने संगठनात्मक ढांचे, सामाजिक योगदान और विचारधारा में कई बदलाव किए हैं। शुरुआती वर्षों में संघ को हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के एक सीमित विचारधारा संगठन के रूप में देखा जाता था। लेकिन आज संघ लगातार संवाद को बढ़ावा दे रहा है।

आमंत्रित राष्ट्रपतीय हस्तियों की उपस्थिति, जैसे प्रणव मुखर्जी (पूर्व कांग्रेस नेता और राष्ट्रपति) और अब रामनाथ कोविंद (संपूर्ण दलित वर्ग के प्रतिनिधि और राष्ट्रपति रहे), संघ की व्यापक नीति और सामाजिक संवाद की इच्छा का संकेत है। इससे यह संदेश जाता है कि संघ अब केवल विचारधारा आधारित मंच न होकर राष्ट्रीय विमर्श के बड़े केंद्र के रूप में उभर रहा है।

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शताब्दी उत्सव के निमंत्रण का उद्देश्य

संघ के समावेशी दृष्टिकोण का उद्देश्य देश के अलग-अलग विचारधाराओं, वर्गों एवं पृष्ठभूमि वालों को आमंत्रित करके एक व्यापक चर्चा का मंच देना है।

– रामनाथ कोविंद की उपस्थिति का अर्थ है सामाजिक न्याय और राष्ट्र निर्माण के विमर्श को मंच देना।
– प्रणव मुखर्जी के पूर्व आगमन ने स्वयंसेवकों को नीति संवाद का अवसर दिया और विचारधाराओं से उपर उठकर बातचीत का रास्ता खोला।
– संघ के 100 वर्ष की यात्रा में नवीन सामाजिक अभियानों, सेवा परियोजनाओं, शैक्षिक व सांस्कृतिक योगदानों की चर्चा अति महत्वपूर्ण रही है।

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संघ की 100 वर्ष की यात्रा का विश्लेषण

– 1925-1950: स्थापना, संगठन विस्तार, स्वतंत्रता संग्राम में अप्रत्यक्ष सहभागिता।
– 1950-2000: शिक्षण, सेवा कार्य, सामाजिक पुनरुत्थान, शाखाओं का विस्तार।
– 2000-2025: टेक्नोलॉजी, राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक समरसता, समावेशिता का आग्रह और विचारधारा में नए विमर्श की शुरुआत।

आज आरएसएस विभिन्न विचारधाराओं और समुदायों के बीच संवाद कर रही है, जिससे उसका दायरा विचारों और समाज में और व्यापक हुआ है। शताब्दी वर्ष में महामहिम राष्ट्रपति जैसे व्यापकता और विविधता के प्रतिनिधियों को आमंत्रित करना संघ की परिपक्वता, राष्ट्रहित और समरसता की नीति की झलक देता है

निष्कर्ष

इस विजयदशमी पर रामनाथ कोविंद की उपस्थिति संघ के समावेशी संवाद को रेखांकित करती है। संघ अपनी 100 वर्ष की यात्रा में व्यापक विमर्श, सामाजिक सरोकार और विचारधाराओं से ऊपर उठकर एक नई राष्ट्र भावना के निर्माण की ओर बढ़ रहा है। ऐसे आयोजनों से संघ अपने उद्देश्य और नीति के विस्तार की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम उठा रहा है।

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