भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने हाल ही में चीन की अत्याधुनिक PL-15 मिसाइल के कम से कम 8 अवशेषों को सफलतापूर्वक हासिल कर उनका गहन विश्लेषण किया है। यह मिसाइल विश्व स्तर पर अपनी लंबी रेंज, तेज गति और उन्नत गाइडेंस तकनीक के लिए जानी जाती है। DRDO ने पंजाब के होशियारपुर जिले में पाए गए इन अवशेषों का तकनीकी अध्ययन किया, जिसमें एक मिसाइल का अवशेष लगभग पूरी तरह से सुरक्षित था।
DRDO ने इन मिसाइलों के महत्वपूर्ण हिस्सों—जैसे प्रोपल्शन सिस्टम, डेटालिंक, इनर्शियल रेफरेंस यूनिट और एक्टिव रडार सीकर—का विस्तृत विश्लेषण शुरू कर दिया है। इससे भारत को चीन की उन्नत मिसाइल तकनीक (जैसे AESA रडार, ड्यूल-पल्स मोटर, गाइडेंस अल्गोरिदम) को समझने और अपने इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (EW) सिस्टम को उन्नत बनाने का अनूठा मौका मिला है। DRDO की टीम ने इन मिसाइलों की तकनीक को डिकोड करने में सफलता हासिल की है, जिससे भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों (Rafale, Su-30, Tejas) को PL-15E जैसी मिसाइलों के खिलाफ बेहतर सुरक्षा और जैमिंग क्षमता मिल सकेगी।
PL-15 मिसाइल को चीन का 607 इंस्टीट्यूट और चाइना एयरोस्पेस साइंस एंड इंडस्ट्री कॉरपोरेशन (CASIC) द्वारा विकसित किया गया है। यह मिसाइल 4 से 4.5 मीटर लंबी और लगभग 200 मिमी व्यास की है, जिसका वजन 200 से 250 किलोग्राम तक हो सकता है। यह मिसाइल मैक 4 से मैक 5 से भी अधिक की रफ्तार से उड़ सकती है और इसकी रेंज डोमेस्टिक वर्जन में 200 से 300 किलोमीटर तक होती है, जबकि एक्सपोर्ट वर्जन में यह कम होकर 145 किलोमीटर तक हो जाती है। मिसाइल में हाई-एक्सप्लोसिव फ्रैगमेंटेशन वारहेड लगा होता है, जिसका वजन 20 से 40 किलोग्राम तक हो सकता है।
PL-15 मिसाइल को डुअल-पल्स सॉलिड-फ्यूल रॉकेट मोटर से बल मिलता है और इसमें इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम, मिड-कोर्स बीडोउ सैटेलाइट अपडेट, टू-वे डाटालिंक और टर्मिनल एक्टिव रडार होमिंग (AESA सीकर) जैसी उन्नत तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यह मिसाइल इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग और काउंटरमेजर्स के खिलाफ भी काफी प्रतिरोधी है। इसे चीन के J-10C, J-16, J-20 और पाकिस्तान के JF-17 Block III जैसे लड़ाकू विमानों से लॉन्च किया जा सकता है।
DRDO ने इन 8 अवशेषों के प्रोपल्शन सिस्टम, डेटालिंक, इनर्शियल रेफरेंस यूनिट और एक्टिव रडार सीकर का विस्तृत विश्लेषण किया है। इससे भारतीय वायुसेना को PL-15 जैसी मिसाइलों के खिलाफ अपनी इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और मिसाइल रक्षा क्षमता को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। DRDO की इस उपलब्धि को चीन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि इससे उनकी मिसाइल तकनीक की कमजोरियों और कार्यक्षमता को समझने में मदद मिलेगी। यह खोज न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया भर के कई देशों के लिए भी महत्वपूर्ण है, जो चीन की मिसाइल तकनीक को समझना चाहते हैं।
इस खोज ने दुनिया भर में खलबली मचा दी है और अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया, फ्रांस जैसे देशों ने भी इस तकनीकी डेटा तक पहुंच की मांग की है। DRDO की इस उपलब्धि को चीन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि यह उनकी मिसाइल तकनीक की कमजोरियों और कार्यक्षमता को उजागर करता है। इस प्रकार, DRDO ने चीन की PL-15 मिसाइल की तकनीक को सफलतापूर्वक डिकोड किया जिससे भारत की इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और मिसाइल रक्षा क्षमता में बड़ा सुधार होगा और चीन की मिसाइल प्रौद्योगिकी की कमियों को समझने में मदद मिलेगी भारतीय रक्षा तंत्र को एक बड़ा फायदा पहुंचाया है।