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नागौर में RSS शताब्दी वर्ष की जनगोष्ठी, राजस्थान सह क्षेत्र कार्यवाह गेंदालाल ने रखा पंच परिवर्तन का विज़न

नागौर जिला मुख्यालय पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की श्रृंखला में तृतीय चरण का कार्यक्रम प्रमुख जन गोष्ठी के रूप में संपन्न हुआ। शारदा बालिका निकेतन के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में संघ के राजस्थान सह क्षेत्र कार्यवाह गेंदालाल ने मुख्य वक्ता के रूप में विचार व्यक्त किए। मंच पर नागौर विभाग कार्यवाह संजय कुमार सोनी उपस्थित रहे।

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इस अवसर पर क्षेत्र सह कार्यवाह गेंदालाल ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने उद्बोधन में कहा कि संघ के संस्थापक डॉ हेडगेवार ने विचार किया कि आदिकाल में विश्व गुरु रहा भारत परकीयों के अधीन कैसे हो गया। इस कारण का निवारण करने के लिए अहंकार मुक्त, स्वाभिमान से परिपूर्ण समाज रचना का निर्माण करना होगा। संघ के माध्यम से व्यक्ति निर्माण का कार्य उन्होंने प्रारंभ किया। आज संघ स्थापना के 100 वर्ष पश्चात यह ध्यान में आया कि संघ कुछ नहीं करेगा लेकिन स्वयंसेवक वह सब करेंगे जो एक समर्थ व सक्षम राष्ट्र के लिए आवश्यक है। उन्होंने सभी संगोष्ठी में सहभागी बन्धुओं से आग्रह किया कि संघ के 40 से अधिक अनुषांगिक संगठनों में अपनी रुचि व अपने क्षेत्र के अनुसार सक्रिय होकर हर व्यवस्था में परिवर्तन का कार्य करें।

भारत के विचारों के अनुरूप रामराज्य, स्वर्ण युग व परम वैभव की कल्पना को सार्थक करने में सक्रिय भूमिका का निर्वहन करें। मुख्य वक्ता ने संगठनों के विविध, बहु आयामी व संस्कारक्षम कार्यों व अभियानों का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में 16 छात्रावासों में घुमंतु परिवार व समाज के बालकों को निशुल्क पढ़ने, आवास छात्रावास संचालित हैं। यह इसी धारणा पर आधारित है कि हिंदू समाज का एक भी वर्ग पिछड़ा नहीं रहेगा। संघ के अनुषांगिक संगठन सक्षम ने जिस प्रकार से प्रयागराज कुंभ में विशाल रूप से नेत्र कुंभ का आयोजन किया उसी के एक कड़ी के रूप में रामदेवरा में भी नेत्र कुंभ का आयोजन कर 88 हजार से भी अधिक बंधुओं को इसका लाभ दिया।

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उन्होंने कहा कि डॉ. हेडगेवारजी के अनुसार भारत एक हिंदू राष्ट्र है, प्राचीन राष्ट्र है और एक राष्ट्र है। आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार धाम, गंगा माता व भारत माता तथा हमारे जीवन मूल्य के साथ-साथ धरती व नागरिक में पुत्रवत संबंध हमारा इतिहास, हमारे महापुरुष और हमारी संस्कृति यह सब हमारे एक प्राचीन राष्ट्र के चिह्न है। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व का अर्थ सर्वे भवंतु सुखिनः का भाव रखने वाला समाज, विश्व का कल्याण की कामना करने वाला समाज है। इसीलिए भारत में यहूदी व फारसी आदि शरणार्थियों ने भी यहां के समाज द्वारा दिए गए आत्मीय व्यवहार की सराहना की है। उन्होंने कहा कि जब संघ और समाज एक हो जाए तब संघ का कार्य पूर्ण माना जाएगा। आज अनेक लोग स्वार्थ के कारण हिंदू समाज व राष्ट्रवादी घटनाओं के प्रति आंखें मूंदे रहते हैं। मंच पर जो बात कहते हैं वही व्यक्तिगत बाद में इससे विपरीत संघ की विचार को स्वीकारते हैं।

मुख्य वक्ता गेंदालाल ने संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर अपेक्षित पांच परिवर्तन के संबंध में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि समाज श्रेष्ठ बनेगा तो देश श्रेष्ठ बनेगा। पंच परिवर्तन के बिंदु केवल चर्चा के साथ नहीं हमारे आचरण में भी हो। इससे संघ जैसा सोचता है वैसा ही देश बनेगा।इस गोष्ठी में डॉ मंजू सारस्वत, रतन सिंह राठौड़, मनीषा औदिच्य, पवन काला, प्रहलाद सिंह जोरड़ा, मूलाराम सुथार, धर्मपाल डोगीवाल, परमाराम जाखड़, लाल सिंह चावंडिया सहित अनेक नागरिकों द्वारा अपने विचार रखे गए तथा प्रश्नों के माध्यम से जिज्ञासा समाधान करवाया। इससे पूर्व दृश्य श्रव्य सामग्री के माध्यम से आगंतुकों द्वारा संघ स्थापना की पृष्ठभूमि, इतिहास, विविध राष्ट्रीय अभियानों में योगदान, पंच परिवर्तन प्रदर्शनी का अवलोकन किया गया।

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अतिथियों का परिचय संघ के नागौर जिला सह कार्यवाह मनीष शर्मा द्वारा करवाया गया जबकि जिला कार्यवाह दिलीप शर्मा द्वारा कार्यक्रम की भूमिका रखी गई। समापन आभार विभाग कार्यवाह संजय सोनी द्वारा किया गया। कार्यक्रम में काव्य गीत का सुमधुर गायन गजेंद्र गौड द्वारा किया गया।कार्यक्रम में डॉ.प्रवीण प्रजापत शिवशंकर व्यास, नृत्यगोपाल मित्तल, भोजराज सारस्वत, डॉ शंकर सियाग, बलवीर खती, गजराज कंवर, नंदकिशोर देवड़ा, मनीष बंसल, रामकुमार भाटी, गोविंद गुप्ता, रामेश्वर सारस्वत नरोत्तम पाठक व श्रद्धानंद तिवाड़ी सहित जाने माने नागरिक मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन अजय शर्मा ने किया।

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1 thought on “नागौर में RSS शताब्दी वर्ष की जनगोष्ठी, राजस्थान सह क्षेत्र कार्यवाह गेंदालाल ने रखा पंच परिवर्तन का विज़न”

  1. प्रेम प्रकाश शर्मा

    संघे शक्ति,कलयुगे l
    हम सब बने समरस,
    समाज मे हो नव रस l

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