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भारत-मंगोलिया संयुक्त सैन्य अभ्यास: साझा कौशल और सहयोग में नई ऊर्जा

भारत और मंगोलिया के बीच द्विपक्षीय सैन्य सहयोग को और मजबूत करने के लिए वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास “नोमैडिक एलीफेंट 2025” का आयोजन किया जा रहा है। यह अभ्यास 31 मई से 13 जून, 2025 तक मंगोलिया की राजधानी उलानबातार स्थित स्पेशल फोर्सेज ट्रेनिंग सेंटर में आयोजित हो रहा है।

मुख्य बिंदु

  • अभ्यास का उद्देश्य:
    इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी (पारस्परिक सहयोग और समन्वय) को बढ़ाना है, ताकि वे बेहतर तरीके से साथ काम कर सकें।
  • प्रशिक्षण के प्रमुख घटक:
    • आतंकवाद विरोधी अभियान
    • प्रिसिजन स्नाइपिंग
    • एंड्योरेंस और रिफ्लेक्स शूटिंग
    • रूम इंटरवेंशन और छोटी टीम की रणनीति
    • रॉक क्राफ्ट ट्रेनिंग और साइबर युद्ध के पहलू
    • संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के अनुकरण अभ्यास
  • स्थान और परिस्थितियाँ:
    अभ्यास सेमी-अर्बन (अर्ध-शहरी) और पहाड़ी इलाकों में आयोजित किया जा रहा है, जिससे सैनिक वास्तविक परिस्थितियों के लिए तैयार हो सकें।
  • सैन्य टुकड़ियाँ:
    भारत की ओर से अरुणाचल स्काउट्स के जवानों ने हिस्सा लिया है, जबकि मंगोलिया की ओर से उसकी स्पेशल फोर्सेज की टुकड़ी शामिल है।
  • ज्ञान और अनुभव का आदान-प्रदान:
    दोनों देशों के सैनिक एक-दूसरे के साथ अपने अनुभव और युद्ध कौशल साझा कर रहे हैं, जिससे दोनों सेनाओं की क्षमता और समन्वय में सुधार हो रहा है।
  • सांस्कृतिक आदान-प्रदान:
    अभ्यास के साथ-साथ सैनिकों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी हो रहा है, जिससे दोनों सेनाओं के बीच दोस्ती और सम्मान की भावना मजबूत हो रही है।

अभ्यास का महत्व

  • सैन्य सहयोग में मजबूती:
    यह अभ्यास भारत और मंगोलिया के बीच सैन्य सहयोग को और मजबूत करने का प्रतीक है।
  • क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा:
    दोनों देश संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन में भी साथ काम करने के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा में योगदान बढ़ेगा।
  • इंटरऑपरेबिलिटी:
    इस अभ्यास से दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के साथ बेहतर तरीके से काम करने के लिए प्रशिक्षित हो रही हैं।

भारत और मंगोलिया के बीच यह सैन्य अभ्यास दोनों देशों के सैन्य संबंधों को नई ऊर्जा दे रहा है। इससे न केवल सैन्य कौशल का विकास हो रहा है, बल्कि दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी विश्वास और सहयोग भी बढ़ रहा है।

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