बलूचिस्तान में आज़ादी की मांग और आंदोलन के बाद अब पाकिस्तान के सिंध प्रांत में भी स्वतंत्रता और स्वायत्तता की आवाज़ें तेज़ हो रही हैं।
सिंधी कार्यकर्ता और संगठन, जैसे कि जेय सिंध फ्रीडम मूवमेंट (JSFM), लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। वे सिंधी पहचान, सांस्कृतिक स्वायत्तता और मानवाधिकारों के हनन का विरोध कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगे
सिंधी कार्यकर्ताओं और छात्रों के जबरन गायब होने, अवैध हिरासत और यातना के आरोप।
शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर कार्रवाई, साहित्य और सोशल मीडिया पर सेंसरशिप, और असंतोष दबाने के लिए आतंकवाद विरोधी कानूनों का दुरुपयोग।
अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग-संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और एमनेस्टी इंटरनेशनल से सिंध में मानवाधिकारों के उल्लंघन की निगरानी और हस्तक्षेप की अपील।
बलूचिस्तान से तुलना
बलूचिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी जैसे संगठन स्वतंत्रता की घोषणा कर चुके हैं और बड़े पैमाने पर हमले कर रहे हैं, उनका आरोप है कि पाकिस्तान सरकार उनके संसाधनों का शोषण कर रही है और उन पर अत्याचार कर रही है।
बलूचिस्तान से प्रेरित होकर, सिंधी कार्यकर्ता भी अपनी मांगें तेज़ कर रहे हैं। हालांकि, सिंध का आंदोलन अभी तक अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित करने पर केंद्रित है।
सिंध के प्रमुख राजमार्गों पर प्रदर्शन हुए हैं, जिनमें लापता लोगों की रिहाई और सिंधी अधिकारों की मांग की गई।
सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मंचों के ज़रिए सिंध की समस्याओं को उजागर किया जा रहा है, जो बलूचिस्तान के आंदोलन की रणनीति से मेल खाता है।
बलूचिस्तान के बाद अब सिंध में भी आज़ादी और अधिकारों की मांगें तेज़ हो रही हैं। लंबे समय से चली आ रही उपेक्षा, पहचान और मानवाधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ सिंधी समुदाय की आवाज़ अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुनाई देने लगी है।