शताब्दी वर्ष पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा प्रमुख जन गोष्ठी का किया गया आयोजन
पाली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा शताब्दी वर्ष के अंतर्गत “प्रमुख जन गोष्ठी” का आयोजन बापू नगर स्थित रोटरी भवन में किया गया। कार्यक्रम में ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, शिक्षाविद् तथा सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे और राष्ट्रीय जीवन में संघ की भूमिका, सेवा कार्यों तथा सांस्कृतिक जागरण के विषय में अपनी जिज्ञासा का समाधान किया।
जिला संघचालक नेमीचंद अखावत ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में निवास करने वाले प्रमुख जनों की गोष्ठी का शुभारंभ बालकों द्वारा पंच परिवर्तन जीवन दर्शन का सजीव नाट्य रूपांतरण प्रस्तुति और मां भारती के समक्ष दीप प्रज्वलित एवं पुष्पांजलि देकर किया गया। वंदे मातरम के बाद विभाग संघचालक माननीय सुरेश चंद्र माथुर ने प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जिसमें देश भर में चल रही संघ की शाखाओ एवं मिलन की जानकारी दी।

उन्होंने बताया शाखाओं के अलावा 50 से अधिक सम वैचारिक संगठन अखिल भारतीय स्तर पर चलते हैं तथा संघ का कार्य भारतवर्ष के अलावा 80 से अधिक देशों में है। उसके पश्चात कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी शंकर सिंह उदावत ने कहा कि आजकल घर परिवार टूट रहे हैं स्वयं के परिवार से कुटुंब प्रबोधन की शुरुआत करने से ही परिवार इकाई मजबूत बनेगी। उन्होंने विद्या भारती की स्कूलों में नैतिक शिक्षा व संस्कार के साथ विद्या दी जाने की बात कही।
गोष्ठी के मुख्य वक्ता क्षेत्रीय सह सम्पर्क प्रमुख योगेन्द्र कुमार रहे उन्होंने संघ की 100 वर्ष की यात्रा, राष्ट्र सेवा की विभिन्न धारणाओं, समाज संगठन, समरसता तथा सेवा–प्रकल्पों की आवश्यकता पर विस्तृत प्रकाश डाला और शताब्दी वर्ष को समाज में सकारात्मक परिवर्तन का अवसर बताते हुए अधिकाधिक जनसहभागिता का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि दुनिया भर को परिवर्तन नजर आ रहा है जिससे भारत की प्रतिष्ठा पूरी दुनिया में बढ़ रही है अंतरिक्ष क्षेत्र में, चिकित्सा क्षेत्र में, सैन्य शक्ति के रूप में भारत अपना लोहा मनवा रहा है।
किसी भी संगठन के लिए 100 वर्ष की यात्रा आसान नहीं रहती खासकर सोशल मीडिया के युग में आज संघ का काम और नाम किसी के लिए अपरिचित नहीं है संघ का कार्य व उद्देश्य सभी को ज्ञात हो गया है उन्होंने कहा कि किसी भी देश में रहने वाले समाज का उत्थान और पतन देश में रहने वाले लोगों पर निर्भर करता है।
संघ 100 वर्षों से एक ही काम करता आया है व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण का, स्वयंसेवक अपने आचरण व्यवहार से समाज में अपनी पहचान बनाते हैं हर प्रकार के आपातकाल में स्वयंसेवक सर्वप्रथम पहुंचते हैं। 1947 से पहले का भारत वह 2025 का भारत दोनों में अंतर नजर आ रहा है जिसमें आज हिंदू समाज संगठित होकर गुलामी की सोच को बदल रहा है और हिंदू समाज जागृत हो रहा है।कार्यक्रम स्थल पर सद साहित्य की प्रदर्शनी एवं स्टॉल लगाई गई। इस अवसर पर मारवाड़ जंक्शन, रोहट, खिवाड़ा एवं पाली नगर को छोड़कर पाली तहसील से समाज के विभिन्न वर्गों से कई प्रमुख जन मौजूद रहे।