भारत और आर्मेनिया ने इन दिनों 3.5 से 4 बिलियन डॉलर के मूल्य के समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। यह कदम दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को एक नई दिशा में ले जाने का एक महत्वपूर्ण मौका प्रदान करता है। आर्मेनिया का ध्यान मुख्य रूप से अपने ए.डी., मिसाइल प्रणालियों और तोपखाने के आधुनिकीकरण पर केंद्रित होगा।
समझौते के प्रमुख बिंदु
भारत और आर्मेनिया के बीच रक्षा के क्षेत्र में संभावित समझौतों की चर्चा जोरों पर है। इस सहयोग में विभिन्न तकनीकी प्रणाली और हथियारों के आधुनिकीकरण पर ध्यान दिया जाएगा। इसमें शामिल प्रमुख बिंदु हैं:
- आकाश-एनजी एसएएम प्रणाली: रिपब्लिक के स्रोतों के अनुसार, आकाश-एनजी सतह-से-एयर मिसाइल प्रणाली पर सक्रिय चर्चा हो रही है। आर्मेनिया ने इसे अपने वायु रक्षा प्रणाली में शामिल करने की इच्छा व्यक्त की है, जिससे उनकी सुरक्षा स्थिति मजबूत हो सके।
- ब्रह्मोस मिसाइल: सूत्रों के अनुसार, भारतीय सेना द्वारा ऑपरेशन सिंदूर के सफल संचालन के बाद ब्रह्मोस की मांग में बढ़ोतरी हुई है। ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जो दुनिया की सबसे तेज मिसाइलों में से एक है और आर्मेनिया को इसकी आवश्यकताएँ पूरी करने में मदद कर सकती है।
- पिनाका एमएलआरएस: इन समझौतों के तहत, पिनाका मल्टी-लॉन्च रॉकेट सिस्टम पर भी समानांतर बातचीत चल रही है। यह प्रणाली भूमि की लड़ाई में तेजी लाने और उच्च सटीकता से दुश्मन के ठिकानों पर हमला करने की क्षमता प्रदान करती है।
ए.डी. प्रणाली में उन्नति
आर्मेनिया रक्षा क्षेत्र में तकनीकी उन्नति की दिशा में नए प्रयास कर रहा है। भारतीय तकनीकी सहयोग से, आर्मेनिया की ए.डी. प्रणाली को आधुनिक बनाने और उसे प्रभावी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
भारतीय सुरक्षा बलों का अनुभव आर्मेनिया के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह सहयोग न केवल सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि दोनों देशों के बीच राजनीतिक और आर्थिक संबंधों को भी मजबूती प्रदान करेगा।
भविष्य की संभावनाएँ
भारत की ओर से यह सहयोग किसी भी तरह के क्षेत्रीय तनाव को कम करने में मदद कर सकता है। आर्मेनिया के लिए इस तरह की तकनीकी सहायता उसकी सुरक्षा को बढ़ा सकती है और उसे क्षेत्रीय शक्तियों के खिलाफ मजबूती प्रदान कर सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बात की जाए Su-30 MKI की, तो यह कहा जा रहा है कि यह अफवाहें वास्तविकता से अधिक विश्वसनीय हैं। भारत अपने Su-30 MKI फाइटरों के माध्यम से आर्मेनिया की वायु शक्ति को बढ़ाने में मदद कर सकता है, जो क्षेत्र में शक्ति संतुलन को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
भारत और आर्मेनिया के बीच हो रहे यह रक्षा सहयोग के समझौते दोनों देशों के लिए नई संभावनाओं को जन्म देंगे। यह न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक महत्वपूर्ण संदेश देगा। युवा पेशेवरों, तकनीकी उत्साही लोगों और छात्रों के लिए यह एक प्रेरणादायक कड़ी है कि किस प्रकार अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और तकनीकी प्रगति से देशों के बीच सुरक्षा संबंध बेहतर बन सकते हैं।
इस प्रकार, भारत और आर्मेनिया का यह सफल प्रयास, केवल व्यापारिक या आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि सुरक्षा और विश्वास का भी प्रतीक है।