संस्कृति संरक्षण, सामाजिक समरसता एवं आर्थिक विकास के मूल में परिवार की भूमिका होती है और परिवार को परिष्कृत स्त्री करती है. -श्रीमती सुमित्रा महाजन
मातृशक्ति के बिना भारत न अपने परम वैभव को पा सकता है न ही विश्व को परम वैभव पर ले जा सकता है.- डॉ. मोहनराव भागवत
लोकमंथन के माध्यम से नवउदारवाद और वैश्वीकरण के मौजूदा दौर में राष्ट्रीयता का देशज या यूं कहें कि शुद्ध भारतीय पाठ तैयार करने की योजना – श्री जे. नन्द कुमार,अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख