संघ शिक्षा वर्ग तृतीय वर्ष का शुभारम्भ * संघ को जानना समझना है तो संघ का प्रत्यक्ष कार्य करना पड़ेगा – दत्तात्रेय होंसबोले
मेरे पिता मेरे सपनों को पूरा करना चाहते थे …. फूलों से सुसज्जित ताबूत भेंट ….केरल में वामपंथी आतंक के पीड़ितों ने सुनाया अपना दर्द
विषम सामाजिक परिस्थितियों को रौंदते हुए हमारे राष्ट्र को सामाजिक समरसता के विचार डॉ अम्बेडकर ने दिए – नन्दलाल जी