प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्राज़ील के रियो डी जेनेरियो में आयोजित 17वें BRICS शिखर सम्मेलन में पाकिस्तान पर आतंकवाद को समर्थन देने के मुद्दे पर जोरदार हमला बोला। मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत आतंकवाद का शिकार है, जबकि पाकिस्तान ने इसे अपनी राज्य नीति बना लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के पीड़ित और उसका समर्थन करने वाले देशों को एक ही तराजू पर नहीं तौला जा सकता। पीएम मोदी ने उन देशों का भी आभार जताया जिन्होंने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की थी, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई थी।
मोदी ने अपने भाषण में कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल सुविधा या राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि सिद्धांत के आधार पर होनी चाहिए। उन्होंने BRICS देशों से अपील की कि आतंकवाद को किसी भी रूप में समर्थन या मौन सहमति देना मानवता के साथ विश्वासघात है। मोदी ने यह भी कहा कि आतंकवादियों और उनके समर्थकों पर बिना किसी हिचकिचाहट के सख्त प्रतिबंध लगाए जाने चाहिए। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान-समर्थित आतंकियों को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के प्रयासों में चीन की भूमिका का भी परोक्ष रूप से उल्लेख किया.
BRICS के संयुक्त घोषणापत्र ‘रियो डी जेनेरियो डिक्लेरेशन’ में भी आतंकवाद की कड़ी निंदा की गई और सभी रूपों में आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की प्रतिबद्धता जताई गई। हालांकि पाकिस्तान का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया, लेकिन सीमा पार आतंकवाद, आतंकी फंडिंग और सुरक्षित पनाहगाहों के खिलाफ एकजुटता दिखाई गई।
इसी बीच, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने BRICS देशों को धमकी दी कि जो भी देश BRICS की “एंटी-अमेरिकन” नीतियों के साथ खड़ा होगा, उस पर अमेरिका 10% अतिरिक्त टैरिफ (शुल्क) लगाएगा। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि इस नीति में कोई अपवाद नहीं होगा। ट्रंप की इस धमकी ने वैश्विक व्यापार और कूटनीति में नई अनिश्चितता पैदा कर दी है, खासकर तब जब BRICS समूह लगातार विस्तार कर रहा है और डॉलर के विकल्प पर चर्चा तेज हो गई है।
BRICS अब 10 देशों का समूह बन चुका है, जिसमें ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका के अलावा मिस्र, इथियोपिया, ईरान, यूएई और इंडोनेशिया शामिल हैं। यह समूह अब विश्व की 45% आबादी और 35% वैश्विक GDP का प्रतिनिधित्व करता है। ट्रंप की धमकी के जवाब में चीन ने कहा कि BRICS का उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि सहयोग है, लेकिन अमेरिकी दबाव से वैश्विक व्यापार और आर्थिक स्थिरता पर असर पड़ सकता है।
पीएम मोदी ने BRICS मंच का इस्तेमाल न सिर्फ आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकजुटता के लिए किया, बल्कि भारत की वैश्विक नेतृत्व क्षमता और ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज को भी मजबूती से उठाया। उन्होंने विकासशील देशों के लिए जलवायु वित्त, तकनीक और संसाधनों के न्यायसंगत वितरण की मांग की और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया।
BRICS शिखर सम्मेलन 2025 ने साफ कर दिया कि भारत अब आतंकवाद, वैश्विक दक्षिण और बहुपक्षीय सहयोग जैसे मुद्दों पर निर्णायक भूमिका निभाने को तैयार है, जबकि अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ नई आर्थिक और कूटनीतिक खींचतान भी तेज़ हो गई है।
BRICS मंच पर पाकिस्तान पर पीएम मोदी का बड़ा हमला, ट्रंप की धमकी से वैश्विक राजनीति में हलचल
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Mayank Kansara
- 7 July 2025
- 2:30 pm