भारत भले ही सीधा हमला न करने का निर्णय ले रहा हो, लेकिन अगर उकसावे वाली कोई कार्रवाई होती है, जैसे कि पहलगाम हमले के मामले में, तो भारत 24 घंटे के भीतर पूरी ताकत से जवाब देने का इरादा रखता है। यह स्थिति भारत के मजबूत संकल्प को दर्शाती है कि वह अपनी सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं करेगा।
भारतीय सुरक्षा बलों ने उन महत्वपूर्ण स्थानों और लक्ष्यों की पहचान कर ली है जिन्हें नेस्तनाबूद करने का निर्णय लिया गया है। इस सूची में दाऊद इब्राहीम और हाफिज सईद जैसे प्रमुख आतंकवादियों के ठिकानों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। मोदी सरकार की यह रणनीति स्पष्ट रूप से यह संदेश देती है कि भारत अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर है और किसी तरह की उकसावे वाली कार्रवाई के खिलाफ त्वरित और मजबूत प्रतिक्रिया देगा।
सुरक्षा बलों की ताकत को और बढ़ाने के लिए हथियारों की आपातकालीन खरीद जारी है। यह संकेत करता है कि भारत अपनी मौजूदा सैन्य क्षमता को बढ़ाने के लिए तैयार है। अगर भविष्य में किसी तरह की चुनौतियां सामने आती हैं, तो भारत पास यह सामर्थ्य होगा कि वह उनका सामना कर सके।
इस स्थिति का वैश्विक स्तर पर भी असर पड़ सकता है। अगर भारत अपनी रणनीति में मजबूती लाता है, तो यह न केवल पाकिस्तान, बल्कि अन्य देशों के लिए भी एक उदाहरण पेश करेगा कि भारत अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देता है। यह स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को मजबूत करेगा। इसके अलावा, सुरक्षा बलों की ताकत का बढ़ना भारत-चीन संबंधों और भारत के अन्य पड़ोसियों के साथ रिश्तों को भी प्रभावित कर सकता है।
भारत की सुरक्षा नीति में हाल के बदलाव एक गंभीर और प्रभावी प्रतिक्रिया को दर्शाते हैं। ऑपरेशन सिंदूर 2.0 के तहत सुरक्षा बलों की तैयारी और हथियारों की आपातकालीन खरीद इस बात का संकेत देती है कि भारत अपनी रक्षा के प्रति कतई शिथिल नहीं होगा। मोदी सरकार का यह कदम न केवल देश के भीतर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण संदेश देता है: भारत ने अपनी सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं किया है।