Vsk Jodhpur

TRENDING
TRENDING
TRENDING

टीएमसी को बड़ा झटका: I-PAC ने पश्चिम बंगाल में तुरंत प्रभाव से रोकीं सभी गतिविधियाँ

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के बीच सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को एक बड़ा झटका लगा है। राजनीतिक परामर्श फर्म इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी (I-PAC) ने कानूनी मुद्दों का हवाला देते हुए राज्य में अपनी सभी गतिविधियों को तत्काल प्रभाव से रोक दिया है। कंपनी ने कर्मचारियों को 20 दिनों की छुट्टी पर भेज दिया है, जिसके बाद 11 मई को स्थिति की समीक्षा कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

यह खबर चुनावी मौसम में राजनीतिक हलकों में भूचाल ला रही है, क्योंकि पहला चरण 23 अप्रैल को है। I-PAC टीएमसी की चुनावी रणनीति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है, खासकर ममता बनर्जी की 2021 की जीत में इसका योगदान सराहनीय था। अब इस अचानक ब्रेक से टीएमसी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। ईडी की जांच के साये में यह कदम उठाया गया लगता है।

I-PAC का पश्चिम बंगाल में इतिहास और भूमिका

I-PAC एक प्रमुख राजनीतिक सलाहकार कंपनी है जो डेटा एनालिटिक्स, ग्राउंड सर्वे और कैंपेन मैनेजमेंट में माहिर है। 2012 में स्थापित यह फर्म आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और दिल्ली जैसे राज्यों में सक्रिय रही। पश्चिम बंगाल में टीएमसी के साथ इसका गठजोड़ 2021 के विधानसभा चुनावों से मजबूत हुआ, जहां इसने 200 से अधिक सीटों पर वर्कर्स को ट्रेनिंग दी और वोटर टारगेटिंग की।

ममता बनर्जी की अगुवाई वाली टीएमसी ने I-PAC को 2026 चुनावों के लिए फिर से हायर किया था। कंपनी ने कोलकाता के गोदरेज वाटरसाइड में बड़ा ऑफिस स्थापित किया, जहां सैकड़ों कर्मचारी डेटा क्रंचिंग और फील्ड ऑपरेशंस पर काम कर रहे थे। इस फर्म ने टीएमसी को बीजेपी के खिलाफ सटीक स्ट्रैटेजी दी, जैसे मुस्लिम-बहुल इलाकों में फोकस और युवा वोटर्स को मोबिलाइज करना। लेकिन अब यह साझेदारी खतरे में पड़ गई है।

कंपनी के डायरेक्टर प्रतीक जैन और अन्य लीडर्स पर ईडी की नजर थी। तीन महीने पहले ईडी ने कोलकाता में छापे मारे, जिसमें मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगे। एक डायरेक्टर की गिरफ्तारी की खबरें भी आईं, जिससे अनिश्चितता बढ़ी। इन सबके बीच आया यह ईमेल, जो रविवार मध्यरात्रि को भेजा गया।

आधिकारिक ईमेल का पूरा विवरण

मानव संसाधन विभाग से भेजे गए ईमेल में स्पष्ट लिखा था: “कुछ कानूनी मुद्दों के मद्देनजर मैनेजमेंट ने पश्चिम बंगाल में तुरंत प्रभाव से ऑपरेशंस रोकने का फैसला किया है। सभी कर्मचारी और टीम मेंबर्स 20 दिनों की छोटी छुट्टी लें। 11 मई को हम दोबारा इकट्ठा होंगे, स्थिति की समीक्षा करेंगे और अगले कदम तय करेंगे।” इस ईमेल की कॉपी न्यूज 18 और मनीकंट्रोल ने शेयर की।

कोलकाता ऑफिस सोमवार को बंद पाया गया। कोई कर्मचारी काम पर नहीं पहुंचा। बड़ी संख्या में स्टाफ ने इस्तीफा दे दिया, खासकर फील्ड टीम्स। कुछ टीम्स को वर्क-फ्रॉम-होम पर शिफ्ट किया गया, लेकिन ग्राउंड ऑपरेशंस पूरी तरह ठप। यह फैसला चुनाव के ठीक पहले आया, जब टीएमसी को हर बूथ पर मजबूत कैंपेन की जरूरत थी।

टीएमसी ने इसे खारिज किया। पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि कैंपेन जारी है और I-PAC का कोई असर नहीं पड़ेगा। लेकिन इंडिया टुडे के सोर्सेज के मुताबिक, फील्ड ऑपरेशंस बंद हैं, जो टीएमसी के लिए चिंता की बात है।

कानूनी मुद्दों का पृष्ठभूमि

ईडी की जांच I-PAC पर 2026 की शुरुआत से चल रही है। फर्म पर आरोप है कि टीएमसी चुनाव फंड्स के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग हुई। प्रतीक जैन के घर पर छापा पड़ा, दस्तावेज जब्त हुए। एक अन्य डायरेक्टर चांडेल की गिरफ्तारी ने मामला गरमा दिया। ये कार्रवाई मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के दौरान हुईं, जो संवेदनशील है।

कानूनी दबाव के कारण I-PAC को ऑपरेशंस रोकने पड़े। कंपनी ने कहा कि यह अस्थायी है, लेकिन 20 दिनों में चुनाव खत्म हो जाएंगे। रिजल्ट 4 मई को हैं। क्या यह टीएमसी को कमजोर करेगा? राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि हां, क्योंकि I-PAC के बिना डेटा-ड्रिवन कैंपेन मुश्किल।

पिछले चुनावों में I-PAC ने टीएमसी को 215 सीटें दिलाने में मदद की। इस बार बीजेपी मजबूत चैलेंजर है। सुभेंदु अधिकारी जैसे लीडर्स इसे टीएमसी की कमजोरी बता रहे हैं।

टीएमसी पर प्रभाव

टीएमसी की कैंपेन अब खतरे में है। फील्ड सर्वे, वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन और लास्ट-मिनट स्ट्रैटेजी I-PAC संभाल रही थी। अब पार्टी को इंटरनल टीम्स पर निर्भर रहना पड़ेगा, जो कम एक्सपीरियंस्ड हैं। ममता बनर्जी ने रैलियों पर फोकस बढ़ाया, लेकिन ग्रासरूट लेवल पर कमी खलेगी।

पहले चरण के 30 सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग। I-PAC की कमी से टीएमसी को नुकसान हो सकता है। बीजेपी इसे प्रचारित कर रही है: “टीएमसी का पर्चा-फर्जी ग्रुप भाग गया।” सोशल मीडिया पर #IPACExit ट्रेंड कर रहा।

ममता ने कहा, “हमारे वर्कर्स ही असली I-PAC हैं।” लेकिन आलोचक कहते हैं कि प्रोफेशनल हेल्प के बिना टीएमसी पिछड़ जाएगी। 2021 में I-PAC ने बीजेपी के 77 सीटों के दावे को तोड़ा था। अब वैसा जादू नहीं चलेगा।

बीजेपी ने इसे टीएमसी पर हमला बोला। सुवendu अधिकारी ने ट्वीट: “ईडी का डर, I-PAC का फरार। ममता का खेल खत्म।” सीएम ने जवाब दिया कि यह अफवाह है। कांग्रेस और लेफ्ट ने तटस्थ रहने का फैसला किया।

विश्लेषकों का मानना है कि यह टीएमसी की इमेज को हिट करेगा। चुनाव आयोग ने मॉनिटरिंग बढ़ाई। क्या I-PAC वापस लौटेगी? 11 मई तक इंतजार। तब तक टीएमसी अकेले लड़ेगी।

I-PAC अन्य राज्यों में सक्रिय है, लेकिन बंगाल में ठप्पी से रेपुटेशन को झटका। कर्मचारियों का इस्तीफा और ऑफिस लॉक ने सवाल उठाए। कंपनी ने कहा कि लीगल क्लियरेंस के बाद रिव्यू होगा। लेकिन चुनावी नुकसान स्थायी हो सकता।

टीएमसी को अल्टरनेटिव ढूंढना पड़ेगा। प्रग्या प्रसाद जैसे कंसल्टेंट्स या इंटरनल स्ट्रक्चर। ममता की पॉपुलैरिटी मजबूत है, लेकिन ऑर्गनाइजेशन कमजोर। यह घटना राजनीतिक कंसल्टेंसी के रिस्क दिखाती है।

2026 बंगाल चुनाव बीजेपी vs टीएमसी का मुकाबला है। टीएमसी 215 सीटें जीत चुकी, बीजेपी 77 पर। इस बार बीजेपी 200+ का टारगेट। I-PAC की गैरमौजूदगी बीजेपी को फायदा। मुस्लिम वोट, युवा और शहरी एरिया में फोकस जरूरी।

चुनाव आयोग ने मॉडल कोड सख्ती से लागू किया। ईडी जैसी एजेंसियां एक्टिव। टीएमसी पर भ्रष्टाचार के केस बढ़े। यह I-PAC कांड उस चेन का हिस्सा।

यह झटका टीएमसी के लिए बड़ा है। प्रोफेशनल बैकअप के बिना कैंपेन कमजोर। लेकिन ममता की ब्रांडिंग मजबूत। रिजल्ट 4 मई को साफ करेंगे। I-PAC का फैसला चुनावी इतिहास का टर्निंग पॉइंट बन सकता।

सोशल शेयर बटन

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Archives

Recent Stories

Scroll to Top