संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में देशभर में आयोजित हो रहे विराट हिंदू सम्मेलनों की श्रृंखला के अंतर्गत रविवार को बालोतरा जिले के कल्याणपुर में विराट हिंदू सम्मेलन का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। सम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में विश्व हिन्दू परिषद के हिंदू जागरण मंच, प्रांत टोली सदस्य श्री दशरथ जी प्रजापत उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शोभा प्रेमगिरी आश्रम से पधारे संत प्रेमानन्दगिरी जी महाराज तथा बोटियार बालाजी मठ से विकासपूरी जी महाराज ने बढ़ाई।

मुख्य वक्ता श्री दशरथ जी प्रजापत ने अपने संबोधन में कहा कि संघ की 100 वर्षों की निरंतर साधना से देशभर में हिंदू जागरण का कार्य हुआ है। संघ ने हिंदू समाज को एकजुट और संगठित रहने का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म से निकले अन्य पंथ, जैसे सिख और बौद्ध, भी हिंदू संस्कृति के ही अंग हैं और हम सभी को आपसी एकता के साथ मिलकर रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आज का हिंदू समाज जाग चुका है—हिंदू अब किसी कमजोर जाति का नहीं, बल्कि एक सक्षम और सशक्त समाज का नाम है।
संत प्रेमानन्दगिरी जी महाराज ने समाज में पंच परिवर्तनों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से इन पंच परिवर्तनों को विस्तार से समझाया तथा लोगों से अपने बच्चों को संस्कारयुक्त शिक्षा देने का आह्वान किया। साथ ही पर्यावरण संरक्षण में समाज की भूमिका, सामाजिक समरसता तथा हिंदू समाज को संगठित रखने के उपायों पर भी प्रकाश डाला।

उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों तथा कश्मीर से कश्मीरी पंडितों के पलायन का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि हिंदू समाज संगठित नहीं रहा, तो ऐसी परिस्थितियाँ अन्य स्थानों पर भी उत्पन्न होने में समय नहीं लगेगा।

इस विराट हिंदू सम्मेलन में माताओं-बहनों, वरिष्ठ नागरिकों एवं बच्चों की भी बड़ी संख्या में उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिली, जिससे कार्यक्रम का वातावरण पूर्णतः भक्तिमय और प्रेरणादायी बन गया। कार्यक्रम के अंत में भारत माता की आरती संपन्न हुई, जिसके पश्चात सभी उपस्थित श्रद्धालुओं ने भोजन प्रसादी ग्रहण की। इसी के साथ विराट हिंदू सम्मेलन का शांतिपूर्ण एवं गरिमामय समापन हुआ।