सायला कस्बे के बालाजी मंदिर के सामने रविवार को विराट हिंदू सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ भारतमाता की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जबकि समापन भारतमाता की सामूहिक आरती के साथ किया गया। सुबह से ही श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया था और दोपहर तक वातावरण भगवामय हो गया। रामधुन और भजनों से संपूर्ण क्षेत्र धर्ममय दिखाई दिया।

सम्मेलन में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष, युवा व बालक-बालिकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विभिन्न क्षेत्रों की महान विभूतियों, साधु-संतों और समाज के प्रबुद्धजनों की उपस्थिति से कार्यक्रम विशिष्ट बना। आयोजन में सहयोग देने वाले भामाशाहों का सम्मान भगवान श्रीराम की मूर्ति और श्रीफल देकर किया गया।
सम्मेलन में कई मठों और आश्रमों के पूज्य संत उपस्थित रहे। इनमें आशा भारती महाराज (उम्मेदाबाद मठ), प्रेमानाथ (जालौर मठ), जैनाचार्य जयरत्न शुरीश्वर महाराज (भाण्डवपुर), तीर्थगिरी महाराज (मंडवारिया मठ), पारसभारती (वालेरा मठ), महामंडलेश्वर रविशरणानन्द गिरी (पालनपुर), सेवाभारती महाराज (सायला मठ) और राजुगिरी महाराज (वाण सिरोही) शामिल रहे। संतों के सानिध्य से वातावरण शांत, आध्यात्मिक और प्रेरणादायी बना।
कार्यक्रम के दौरान जैनाचार्य जयरत्न शुरीश्वरजी ने समाज में एकता, सद्भाव और करुणा का संदेश दिया। उन्होंने साधु-संतों से गरीबों के लिए अन्नपूर्णा सेवा में योगदान देने की अपील करते हुए कहा कि धर्म तभी सार्थक है जब उसमें सेवा का भाव हो। महामंडलेश्वर रविशरणानन्द गिरी, तीर्थगिरी महाराज और राजूगिरी महाराज ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता आरएसएस जोधपुर प्रांत के प्रांत प्रचारक विजयानन्दजी रहे। उन्होंने वर्तमान सामाजिक स्थिति, सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्रप्रेम पर प्रेरक उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि समाज को छुआछूत, भेदभाव और रूढ़ियों को मिटाकर संगठित होकर आगे बढ़ना होगा, तभी राष्ट्र मजबूत होगा। उन्होंने जाति प्रथा को जड़ से खत्म करने का आह्वान करते हुए कहा कि जातियों में बंटे रहने से हिंदू समाज का विघटन हो रहा है, इसलिए सभी समाजों को जाति प्रथा तोड़ने की दिशा में कार्य करना होगा।

कार्यक्रम में नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित समाजसेविका रूमा देवी ने भी संबोधित किया। उन्होंने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और अपनी पारिवारिक एवं सामाजिक भूमिका को मजबूती से निभाने की बात कही। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन और संस्कृति संरक्षण पर जोर दिया।
देशभर में विख्यात भजन कलाकार प्रकाश माली ने अपने भजनों से उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनका भजन “मेरे भारत का बच्चा-बच्चा जय जय श्रीराम बोलेगा…” गूंजते ही श्रोता भावविभोर हो उठे और पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। मंच संचालन राजू माली, भोपालसिंह राजपुरोहित और धीराराम चौधरी ने किया।

कस्बे के विद्यालय के विद्यार्थियों ने दो प्रभावी नाटक प्रस्तुत किए। पहले नाटक में जाति आधारित भेदभाव पर प्रहार करते हुए सामाजिक एकता और समरसता का संदेश दिया गया, जबकि दूसरे नाटक में बुजुर्गों के साथ हो रहे व्यवहार और वृद्धाश्रमों की स्थिति को संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत किया गया। दोनों नाटकों ने दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया।
पूरे कार्यक्रम के दौरान पुलिस प्रशासन पूरी तरह सजग और मुस्तैद रहा। भीड़ नियंत्रण, यातायात व्यवस्था और सुरक्षा के लिए प्रभावी प्रबंध किए गए, जिससे किसी प्रकार की अव्यवस्था नहीं हुई।
संतों, वक्ताओं और कलाकारों के संदेशों के साथ विराट हिंदू सम्मेलन का समापन भारतमाता की आरती, संतों के आशीर्वाद और राष्ट्रहित के संकल्प के साथ हुआ। सैकड़ों लोगों की उपस्थिति और भजनों की सुरीली प्रस्तुति ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।