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आधुनिकता के नाम पर हम संस्कृति और सभ्यता की जड़ों से कटाई कर रहे हैं : प्रांत कार्यवाह

सुमेरपुर | राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अंतर्गत सुमेरपुर और बेड़ा खण्ड की प्रमुख जन गोष्ठी टाउनहॉल, सुमेरपुर आयोजित की गई। इसमें मुख्य वक्ता जोधपुर प्रांत के प्रांत कार्यवाह खीमाराम ने कहा कि आधुनिकता के नाम पर हम संस्कृति व सभ्यता की जड़ों से कटाई कर रहे हैं।जिला प्रचार प्रमुख श्री हरीश आचार्य ने बताया कि संघ शताब्दी वर्ष के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रमों की योजना के क्रम में प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ वंदे मातरम प्रस्तुति एवं भारत माता के समक्ष दीपक प्रज्वलन और पुष्प अर्पित कर किया गया। संघ100 वर्ष की यात्रा पर चलचित्र के पश्चात महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 हितेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने हिंदू समाज के गौरवशाली इतिहास का वर्णन किया।खंड संघचालक श्री मोहन रावल ने प्रस्तावना में शताब्दी वर्ष में अब तक किए गए कार्यों तथा आगामी गतिविधियों की जानकारी दी।

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अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में श्री तखतसिंह राठौड़ ने राष्ट्र निर्माण एवं चरित्र निर्माण में संघ के योगदान एवं स्वयंसेवकों द्वारा समय-समय पर किए जाने वाले सेवा कार्यों का विषय रखा।कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रांत कार्यवाह खीमाराम ने कहा की शताब्दी वर्ष के अंतर्गत यह कार्यक्रम आयोजित हो रहा है, लोगों द्वारा संघ का शताब्दी वर्ष है इसलिए भव्य आयोजनो की कल्पना की होगी लेकिन संघ के शताब्दी वर्ष का आयोजन छोटे स्तर पर हो रहा है। उन्होंने कहा कि संघ का कार्य अभी पूरा नहीं हुआ है संघ निरंतर हिंदू समाज को जागृत करने का कार्य करेगा।

हमारे देश में स्वतंत्रता के बाद विभिन्न तरह के विमर्श खड़े किए गये हिंदू समाज जिसका वर्णन वेदों में भी है, हिमालय के दक्षिण एवं हिंद महासागर के उत्तर में भारतवर्ष का वर्णन है इस भूमि को पुण्य भूमि मातृभूमि हिंदू भूमि कहा गया है। प्राचीन काल से हमारी पहचान हिंदुस्तान में रहने वाले हिंदुओं के रूप में है। संघ के प्रारंभिक वर्षों में डॉक्टर हेडगेवार का उपहास किया गया। यह कहा जाता था कि हिंदू कभी संगठित नहीं हो सकते, हिंदूओं को एक करना मतलब मेंढको को तोलने के बराबर है। लेकिन डॉक्टर हेडगेवार ने 1925 से 1940 तक बिना थके बिना रुके देश के सभी राज्यों तक संघ के कार्यों को लेकर गये।

जिज्ञासा समाधान में पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में प्रांत कार्यवाह ने कहा कि प्राचीन काल से हमारे देश में अधिकारों की बात नहीं हुई है। भारत में हमेशा व्यक्तिगत कर्तव्य, सामाजिक कर्तव्य एवं राष्ट्रीय कर्तव्य को महत्व दिया जाता है। अधिकारों की सोच विदेशी सोच है। भगवान राम ने भी कर्तव्य पालन को महत्वता दी थी। एक अन्य प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि चाणक्य ने कहा है जब सज्जन शक्ति निष्क्रिय होती है तो दुर्जनों के हौसले बढ़ाते हैं, इसीलिए सज्जन शक्ति को सक्रिय होकर देश के लिए कार्य करने वालों के हौसले बढ़ाने हैं।

कार्यक्रम स्थल पर संघ साहित्य की प्रदर्शनी स्टॉल भी लगाई गई। इस अवसर पर जिला प्रचारक नारायण, श्रीमती अरुणा नागर,शेर सिंह मेवाड़ा, शैतानसिंह बिरौलिया, जगदीश सुथार,निशांत रावल,प्रोफेसर धीरज शर्मा,किशोर भाटी तथा समाज के विभिन्न वर्गों से प्रमुख जन मौजूद रहे।

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