जोधपुर, 7 दिसंबर 2025 को लघु उद्योग भारती भवन में एक भव्य “शंखनाद” कार्यक्रम आयोजित किया गया, जो 20-21 दिसंबर को भारत-पाकिस्तान सीमा पर शुरू होने वाली प्रथम गाँव स्वास्थ्य सेवा यात्रा का औपचारिक शुभारंभ था। इस यात्रा का लक्ष्य 1070 किमी लंबी सीमा रेखा पर स्थित 6 सीमावर्ती जिलों के 206 प्रथम गाँवों में 20,21 दिसम्बर को एक साथ स्वास्थ्य सेवाओं हेतु 206 मेडिकल कैम्प लगाना है जिसमें 500 डॉक्टर और 1,000 चिकित्सा छात्र भाग लेंगे।

इस अवसर पर चार प्रमुख सामाजिक संगठनों – सीमाजन कल्याण समिति, नेशनल मेडिकोस ऑर्गनाइज़ेशन, सक्षम और किसान संघ – ने संयुक्त रूप से इस ऐतिहासिक पहल को आगे बढ़ाया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राजस्थान सरकार के मंत्री के.के. बिश्नोई, मुख्य वक्ता डॉ. अशोक कलवार (RPSC सदस्य),अध्यक्षता BSF IG एम.एल. गर्ग, NMO प्रान्त अध्यक्ष सिद्धेश गौड़, सीमाजन प्रदेश अध्यक्ष retd. DIG महेन्द्रपाल सिंह, व्यवसायी-भामाशाह रणवेन्द्र प्रताप सिंह तथा हिम्मताराम पटेल उपस्थित रहे।
शंखनाद की अध्यक्षता कर रहे BSF IG एम.एल. गर्ग ने अपने संबोधन में विशेष रूप से आश्वस्त किया कि BSF इस सामाजिक और राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रम में हर संभव सहयोग प्रदान करेगी, ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों में स्वास्थ्य और सुरक्षा—दोनों प्रयास एक साथ मजबूत हो सकें।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी पहलें सीमा के समीप रहने वाले नागरिकों में विश्वास और सशक्तिकरण बढ़ाती हैं तथा सीमा सुरक्षा में भी अप्रत्यक्ष रूप से महत्त्वपूर्ण योगदान देती हैं।
मुख्य अतिथि के.के. विश्नोई ने कहा सीमा सुरक्षा व स्वास्थ्य सेवा के लिए राजस्थान सरकार संवेदनशील है और सीमाजन कल्याण समिति व NMO को पूरा सहयोग रहेगा।
मुख्य वक्ता डॉ अशोक कलवार ने कहा भारत स्वस्थ और सुरक्षित रहे इस हेतु संघ स्वयंसेवक संगठन दिनरात प्रयत्न कर रहे है। राष्ट्र प्रथम यही हमारा संकल्प है।सीमावर्ती प्रतिभाएं राष्ट्र के कार्य में सहभागी बनें। संघ शताब्दी वर्ष में सीमा पर स्वास्थ्य सुरक्षा का यह अभिनव प्रयोग हो रहा है।
6 जिलों के स्वयंसेवकों ने इस शंखनाद समारोह में सक्रिय भागीदारी की। विभिन्न सत्रों में उन्होंने यात्रा की तैयारियों की समीक्षा की, आवश्यक रणनीतियाँ बनाई और यह संकल्प लिया कि 20-21 दिसंबर को होने वाली इस यात्रा में ग्रामीण जनता को चिकित्सा सेवाएँ प्रदान करने के साथ-साथ स्वास्थ्य जागरूकता और सुरक्षा सुदृढ़ीकरण पर भी विशेष कार्य किया जाएगा।

प्रथम गाँव स्वास्थ्य सेवा यात्रा के अंतर्गत डॉक्टरों और चिकित्सा छात्रों की टीमें सीमावर्ती गाँवों में स्वास्थ्य शिविर लगाएंगी, आवश्यक दवाइयाँ वितरण करेंगी और स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों को फॉलो-अप के लिए प्रशिक्षण देंगी। इस पहल से सीमावर्ती ग्रामीणों के स्वास्थ्य में सुधार होगा तथा वहाँ शांति और स्थिरता को भी बल मिलेगा।
कार्यक्रम का समापन सभी अतिथियों के धन्यवाद ज्ञापन और सामूहिक शंखनाद के साथ हुआ, जिसने इस महत्त्वपूर्ण सामाजिक मिशन की आधिकारिक शुरुआत का संदेश दिया। आगे की तैयारियों में सभी सहयोगियों की सक्रिय भूमिका की अपेक्षा की जा रही है।
सीमावर्ती क्षेत्र में समय देने का आह्वान किया गया।
20 दिसम्बर को जिला केंद्रों पर उद्घाटन कार्यक्रम और 21 को अनुभव कथन हेतु समापन कार्यक्रम अनुभूति करेंगे।
सम्पूर्ण आयोजन के संरक्षक ने कहा कि मुख्य समन्वयक डॉ अनिल जी विश्नोई,
206 डॉक्टर्स टीम के प्रमुख डॉ सिध्देश गौड़ व 206 गांवों की व्यवस्था के प्रमुख DIG MP सिंह टीम के साथ कार्य मे जुटे हुए है।