भारतीय किसान संघ की स्थापना –
3-4 मार्च 1979 में, कोटा, राजस्थान में भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय अधिवेशन का आयोजन कर, किसानों के अखिल भारतीय संगठन की स्थापना की। देश के बहुत बड़े, शौषित–पीड़ित और असंगठित जन समुदाय में आत्म विश्वास जाग्रत करते हुए उन्होंने आव्हान किया कि, ‘‘हर किसान हमारा नेता है’’ और नारा दिया कि, ‘‘देश के हम भंडार भरेंगे, लेकिन कीमत पूरी लेगें।’’ महापुरूषों के संकल्प सत् संकल्प होते है, और सत् संकल्प, भगवान को पूरे करने होते है। सनातन हिन्दू धर्म के अधिष्ठान पर, पूर्णतः गैर–राजनैतिक, और प्रखर राष्ट्रवाद से प्रेरित, देश का सबसे बड़ा, सबसे सक्षम, जन संगठन खड़ा हुआ। सामुहिक चर्चा, सामुहिक निर्णय और सामुहिक नेतृत्व के सिद्धान्त और व्यवहार की सफलता की स्थापना की। आज भारतीय किसान संघ, किसानों और राष्ट्र के हितों का सबल, सजग प्रहरी के नाते सभी को ध्यान में आता है।

सामाजिक समरसता मंच और सर्वपंथ समादर मंच की स्थापना –
बाबा साहेब अम्बेडकर जन्म शताब्दी के अवसर पर पुणे में, दिनांक 14 अप्रेल 1983 को सामाजिक समरसता मंच की स्थापना की। यह सुखद संयोग था कि इसी दिन प. पू. डॉक्टर जी का जन्मदिन वर्ष-प्रतिपदा भी था। ‘‘सामाजिक समरसता के बिना सामाजिक समता असम्भव है।’’ इस ध्येय वाक्य का उद्घोष कर, श्रद्धेय दत्तोपंत जी ने, हिन्दु समाज की अत्यन्त पीड़ादयक व्याधि के उपचार का मार्ग प्रस्सत किया। श्रद्धेय ठेंगड़ी जी को, पूज्य बाबा साहब अम्बेडकर के निकट सानिध्य का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। पूज्य बाबा साहब के हृदय की पीड़ा को समझने का महान अवसर प्राप्त हुआ था। सर्वसमावेशी सनातन हिन्दू धर्म के अधिष्ठान पर हिन्दू समाज की एकात्मता के महान कार्य को सम्पादित करने के लिए,सामाजिक समरसता मंच के माध्यम से मार्गदर्शन प्रारम्भ किया। इसी कड़ी में, दिनांक 16 अप्रेल 1991 को नागपुर में, सर्वपंथ समादर मंच की स्थापना की।
–डॉ रणजीत सिंह जोधपुर
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