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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) ने पहली बार हिंदू छात्रों को परिसर में दिवाली मनाने की अनुमति दी है

हम अक्सर सुनते हैं कि शिक्षा का सर्वउपयोगी सूत्र क्या है। यह न केवल ज्ञान प्राप्त करने का स्थान है, बल्कि यह विभिन्न संस्कृतियों और परंपराओं को एक साथ लाने का माध्यम भी है। हाल ही में, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) ने इस भावना को साकार किया है। 19 अक्टूबर को, एएमयू प्रशासन ने ऐतिहासिक फैसला लिया है जिससे हिंदू छात्रों को परिसर में दिवाली मनाने की अनुमति दी गई है। यह कदम न केवल छात्रों के बीच सामंजस्य बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सांस्कृतिक समन्वय का एक अद्भुत उदाहरण भी है।

दीपावली का महत्व

दीपावली, जिसे हम दीवाली के नाम से भी जानते हैं, भारत का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। इसे प्रकाश का पर्व माना जाता है, जब अंधकार से प्रकाश की ओर जाने की इच्छा होती है। इस दिन लोग एक-दूसरे के घरों में मिठाई बांटते हैं, दीप जलाते हैं और अपने परिवार के साथ खुशियाँ मनाते हैं। एएमयू के परिसर में इस त्योहार का मानवीकरण न केवल हिंदू छात्रों के लिए, बल्कि सभी विद्यार्थियों के लिए एक सुंदर संदेश है कि हर किसी को अपनी संस्कृति को मनाने का अधिकार है।

एएमयू का कदम

एएमयू प्रशासन ने यह निर्णय न केवल सांस्कृतिक समन्वय को बढ़ावा देने के लिए लिया है, बल्कि यह छात्रों के बीच की धार्मिक बाधाओं को समाप्त करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। इस कदम के तहत, एनसीसी क्लब के अंदर दीपोत्सव मनाने की अनुमति दी गई है, जहां हिंदू छात्र एकत्र होकर अपने त्योहार को धूमधाम से मना सकेंगे। इससे यह स्पष्ट होता है कि एएमयू एक समावेशी माहौल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जहां सभी धर्म और संस्कृतियाँ एक-दूसरे का सम्मान करें।

सांस्कृतिक समन्वय का संदेश

इस निर्णय का महत्व केवल विश्वविद्यालय के अंदर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में बदलाव लाने का एक बड़ा अवसर प्रस्तुत करता है। वास्तव में, जब विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों के बीच संवाद होता है, तो इससे सहिष्णुता और आपसी समझ बढ़ती है। जैसे-जैसे युवा प्रोफेशनल और छात्र इस तरह के आयोजनों में भाग लेते हैं, उनकी सोच और दृष्टिकोण में बदलाव आ सकता है। इससे यह भी सिखने को मिलता है कि कैसे हम सभी मिलजुलकर एक समृद्ध और विविधतापूर्ण समाज का निर्माण कर सकते हैं।

अभिभावकों और समाज की प्रतिक्रिया

एएमयू के इस साहसिक निर्णय पर छात्रों और उनके अभिभावकों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कई माता-पिता ने इसे एक बेहतरीन कदम बताया है, क्योंकि इससे उनके बच्चों को अपने त्योहारों को साझा करने का एक मौका मिलेगा। यह समाज की सोच को भी दर्शाता है कि हम सभी एक समान हैं और धर्म के नाम पर किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। यह घटनाक्रम हमें यह सिखाता है कि विविधता में एकता का वास्तविक अर्थ क्या है।

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) का यह निर्णय केवल एक त्योहार मनाने की अनुमति नहीं है, बल्कि यह एक उदाहरण है कि कैसे हम सभी को एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए। यह हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि सांस्कृतिक समन्वय एक ऐसे सूत्र जैसी है जो हमारी समाज को जोड़ती है। जैसे-जैसे हम मिलकर त्योहारों का आनंद लेते हैं, हमें याद रखना चाहिए कि ये क्षण हमारे जीवन में खुशी और एकता को बढ़ाते हैं।

इस प्रकार, एएमयू का यह कदम एक नई दिशा की ओर ले जाता है, जहां हम सभी एक-दूसरे के त्योहारों का उत्सव मनाते हैं और एक-दूसरे की संस्कृति का सम्मान करते हैं। यह विचार छात्रों और युवा प्रोफेशनल्स के लिए प्रेरणास्त्रोत हो सकता है, जिसका अनुसरण करके वे अपने जीवन में भी समन्वय और सहिष्णुता को आगे बढ़ा सकते हैं।

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