Vishwa Samvad Kendra Jodhpur

TRENDING
TRENDING
TRENDING

भागवत बोले- संघ जितना विरोध किसी संगठन का नहीं हुआ, टैरिफ विवाद पर कहा- अंतरराष्ट्रीय व्यापार दबाव में नहीं होगा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को संवाद व्याख्यानमाला कार्यक्रम में कहा कि जितना विरोध संघ का हुआ है, उतना किसी अन्य संगठन का नहीं हुआ। इसके बावजूद संघ के स्वयंसेवकों के मन में समाज के प्रति केवल सात्विक और शुद्ध प्रेम है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि आज संघ के विरोध की धार कम हो गई है।

अमेरिकी टैरिफ विवाद के बीच भागवत ने आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए कहा कि “देश आत्मनिर्भर होना चाहिए। स्वदेशी का मतलब विदेशों से संबंध तोड़ना नहीं है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार जारी रहेगा, लेकिन यह किसी दबाव में नहीं होगा।”

screenshot 2025 08 27 21 24 43 76 5600c4be318a3a39d7eb640dd568d2173777001338320628164



भागवत ने स्वयंसेवकों को दिए संदेश

  • नेक लोगों से दोस्ती करें, बुरे काम करने वालों को नजरअंदाज करें।
  • विरोधियों के अच्छे कामों की भी सराहना करें।
  • गलत काम करने वालों पर क्रूरता नहीं, बल्कि करुणा दिखाएं।
  • संघ में किसी तरह का प्रोत्साहन या इंसेंटिव नहीं है।
  • जब लोग पूछते हैं कि संघ में आकर क्या मिलेगा, तो जवाब होता है- कुछ नहीं मिलेगा, जो है वह भी चला जाएगा।

उन्होंने कहा कि संघ में काम करना हिम्मत वालों का काम है। स्वयंसेवक निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा करते हैं और यही सेवा उन्हें अलग आनंद और सार्थकता देती है।

उन्होंने कहा कि संघ में काम करना हिम्मत वालों का काम है। स्वयंसेवक निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा करते हैं और यही सेवा उन्हें अलग आनंद और सार्थकता देती है।

screenshot 2025 08 27 21 24 58 90 5600c4be318a3a39d7eb640dd568d2172370560360173273070



भागवत की स्पीच की बड़ी बातें

  • हिंदुत्व की परिभाषा: भारत का लक्ष्य विश्व कल्याण है। हिंदुत्व का अर्थ है सत्य और प्रेम।
  • धर्म और कन्वर्जन: धर्म में परिवर्तन (कन्वर्जन) नहीं होता। धर्म एक सत्य तत्व है, जिसके आधार पर पूरी दुनिया चलती है।
  • आर्थिक उन्नति की चुनौतियाँ: तेज आर्थिक विकास पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है और अमीर-गरीब की खाई बढ़ाता है।
  • भारत में अच्छाई-बुराई का अनुपात: समाज में जितनी बुराई दिखाई देती है, उससे 40 गुना ज्यादा अच्छाई मौजूद है।
  • हिंदू-मुस्लिम संबंध: हिंदू विचार ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ पर आधारित है। इस्लाम भी उसी राह पर चलता है। दोनों समुदायों को दूरियां मिटाने के लिए प्रयास करने चाहिए।
  • कानून पालन पर जोर: किसी भी स्थिति में कानून हाथ में नहीं लेना चाहिए। उपद्रव फैलाने वाले इसका फायदा उठाते हैं।
  • भारत का महत्व: भारत का अस्तित्व दुनिया के लिए जरूरी है। धर्म और अध्यात्म देने वाला दूसरा कोई देश नहीं है।


भागवत ने कहा कि भारत का कर्तव्य है कि वह विश्व को समय-समय पर धर्म का मार्ग दिखाए। उन्होंने स्वामी विवेकानंद का हवाला देते हुए कहा कि भारत धर्म प्रधान देश है और विश्व गुरु बनने की राह पर है, लेकिन यह कार्य विनम्रता के साथ करना होगा।

सोशल शेयर बटन

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Archives

Recent Stories

Scroll to Top